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इतिहास

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

पुनर्जागरण एवं धर्म-सुधार आंदोलन

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 31 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

Q1 (5 अंक — 50 शब्द): मार्टिन लूथर की 95 थीसिस क्या थीं? कैथोलिक चर्च के विरुद्ध उनके मुख्य धार्मिक तर्क क्या थे?

आदर्श उत्तर:

मार्टिन लूथर ने 31 अक्टूबर 1517 को विटेनबर्ग, जर्मनी में अपनी 95 थीसिस चस्पाँ कीं, जिसमें कैथोलिक चर्च द्वारा क्षमा-पत्र (इंडलजेंस) की बिक्री को चुनौती दी। उनके मुख्य धार्मिक तर्क: सोला फिड — केवल विश्वास से मोक्ष, कार्यों से नहीं; सोला स्क्रिप्टुरा — केवल बाइबल प्राधिकरण, पोप नहीं; सार्वभौमिक पुरोहित-भाव — हर विश्वासी बिना पादरी के ईश्वर से सीधा जुड़ सकता है। इन सिद्धांतों ने पश्चिमी ईसाईयत को स्थायी रूप से विभाजित कर दिया।


Q2 (5 अंक — 50 शब्द): ट्रेंट की परिषद क्या थी? इसके प्रमुख निर्णय क्या थे?

आदर्श उत्तर:

ट्रेंट की परिषद (1545–63) प्रोटेस्टेंट सुधार के विरुद्ध कैथोलिक चर्च की 25 सत्रों में प्रतिक्रिया थी। प्रमुख निर्णय: (1) धर्मग्रंथ और परंपरा दोनों को समान प्राधिकरण माना — सोला स्क्रिप्टुरा को अस्वीकार; (2) विश्वास और कर्म दोनों से मोक्ष — सोला फिड को अस्वीकार; (3) सात संस्कारों और ट्रांसबस्टैंशिएशन की पुष्टि; (4) पादरियों के लिए सेमिनरी प्रशिक्षण अनिवार्य; (5) इंडेक्स लिब्रोरम प्रोहिबिटोरम (निषिद्ध पुस्तकों की सूची) प्रकाशित — प्रति-सुधार का प्रमुख स्तम्भ।


Q3 (5 अंक — 50 शब्द): पुनर्जागरण और धर्म-सुधार के लिए गुटेनबर्ग की मुद्रण प्रेस का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

आदर्श उत्तर:

जोहानेस गुटेनबर्ग ने लगभग 1440 में मेंज़ में चल-अक्षर मुद्रण प्रेस का आविष्कार किया। इसका महत्त्व: 1500 तक 2 करोड़ से अधिक पुस्तकें छप चुकी थीं — कीमत घटी, साक्षरता बढ़ी, पाठ-मानकीकरण हुआ। इसने लूथर की 95 थीसिस को हफ्तों में यूरोप भर में फैला दिया (1517)। बाइबल के अनुवाद और वितरण (लूथर की जर्मन बाइबल, 1522) को संभव बनाया। चर्च के सूचना-एकाधिकार को तोड़कर पुनर्जागरण मानवतावाद और प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार दोनों को सीधे प्रेरित किया।


Q4 (5 अंक — 50 शब्द): लियोनार्डो दा विंची कौन थे? उनकी चित्रकृति "द लास्ट सपर" का वर्णन कीजिए।

आदर्श उत्तर:

लियोनार्डो दा विंची (1452–1519) सर्वोच्च "पुनर्जागरण पुरुष" थे — चित्रकार, मूर्तिकार, इंजीनियर, शरीर-वैज्ञानिक और वैज्ञानिक। "द लास्ट सपर" (लगभग 1494–99) मिलान के सांता मारिया डेले ग्राज़िए में 15 × 29 फुट का फ्रेस्को है। इसमें ईसा मसीह के अंतिम भोजन का चित्रण है — वह क्षण जब वे विश्वासघात की घोषणा करते हैं। लियोनार्डो ने रैखिक परिप्रेक्ष्य का उपयोग किया — ईसा के सिर पर केन्द्रित — और प्रत्येक प्रेरित की अलग मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया को यथार्थवादी ढंग से उकेरा — यथार्थवाद और नाटकीयता का क्रांतिकारी संयोजन।


Q5 (10 अंक — 150 शब्द): प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार के कारणों और मुख्य विशेषताओं की विवेचना कीजिए। इसने यूरोपीय समाज और राजनीति को कैसे बदला?

आदर्श उत्तर:

प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार (1517–1648) एक धार्मिक क्रांति थी जिसने पश्चिमी ईसाईयत को स्थायी रूप से विभाजित कर दिया। इसके कारण अनेक थे: चर्च भ्रष्टाचार (सेंट पीटर के निर्माण हेतु क्षमा-पत्र बिक्री, भाई-भतीजावाद, पादरी-अज्ञानता); जर्मन राजकुमारों का राजनीतिक असंतोष पोप-कर के विरुद्ध; और मुद्रण प्रेस द्वारा विद्रोही विचारों का तीव्र प्रसार।

मार्टिन लूथर की 95 थीसिस (31 अक्टूबर 1517) ने आंदोलन को प्रज्वलित किया — सोला फिड (केवल विश्वास से मोक्ष), सोला स्क्रिप्टुरा (केवल बाइबल प्राधिकरण), और सार्वभौमिक पुरोहित-भाव (हर विश्वासी अपना स्वयं का पुजारी)। 1521 में बहिष्कृत परंतु जर्मन राजकुमारों द्वारा संरक्षित लूथर ने बाइबल का जर्मन अनुवाद किया (1522) — धर्मग्रंथ को सर्वसुलभ बनाया।

जॉन काल्विन ने जिनेवा में काल्विनवाद विकसित किया — पूर्वनियति और कठोर नैतिक अनुशासन पर बल। काल्विनवाद फ्रांस (ह्यूगनॉट्स), नीदरलैंड और स्कॉटलैंड में फैला। हेनरी VIII ने राजनीतिक कारणों से एंग्लिकन चर्च (1534) की स्थापना की।

धर्म-सुधार के राजनीतिक परिणाम गहरे थे: पोप की शक्ति क्षीण हुई, राष्ट्रीय राजतंत्र मजबूत हुए, और अंततः वेस्टफेलिया की शांति (1648) स्थापित हुई — जिसने राष्ट्रीय संप्रभुता को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कानून की नींव बनाया। प्रोटेस्टेंट बाइबल-पठन के जोर ने साक्षरता बढ़ाई। मैक्स वेबर के अनुसार इसने "प्रोटेस्टेंट कार्यनीति" उत्पन्न की जो आधुनिक पूँजीवाद का आधार बनी।


Q6 (10 अंक — 150 शब्द): "पुनर्जागरण आधुनिक विश्व का प्रारम्भ था।" कला, विज्ञान एवं दर्शन के संदर्भ में विवेचना कीजिए।

आदर्श उत्तर:

पुनर्जागरण (लगभग 1300–1600), जो फ्लोरेंस, इटली में उदित हुआ, मध्यकालीन बौद्धिक सीमाओं को तोड़कर मानवीय उपलब्धि, तर्कशक्ति और प्रेक्षण को सभ्यता के केंद्र में स्थापित करके आधुनिक विश्व की दहलीज बना।

कला में: ब्रुनेलेस्की द्वारा रैखिक परिप्रेक्ष्य का आविष्कार (1420 का दशक), लियोनार्डो द्वारा विज्ञान और सौंदर्य का संयोजन, माइकेलएंजेलो द्वारा मानव शरीर का उत्सव (डेविड, सिस्टिन चैपल), और राफेल की "एथेंस की पाठशाला" — जो पगान दार्शनिकों को आदरणीय के रूप में दर्शाती है — ने मिलकर एक दृश्य-शब्दावली रची जिसने 600 वर्षों तक पश्चिमी कला को परिभाषित किया। इन कृतियों ने घोषित किया कि दृश्य, भौतिक संसार में अंतर्निहित गरिमा और अर्थ है।

विज्ञान में: पुनर्जागरण ने प्राकृतिक जिज्ञासा को धर्मशास्त्रीय अधिकार से मुक्त किया। कोपर्निकस (डी रेवोलूशनिबस, 1543) ने पृथ्वी को ब्रह्मांड के केंद्र से हटाया। गैलीलियो के दूरबीन-आधारित प्रेक्षण और वेसेलियस की शरीर-रचना ने सदियों की निर्विवाद सत्ता को ध्वस्त किया। बेकन की आगमनात्मक पद्धति और देकार्त की तर्कबुद्धि ने आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति की दार्शनिक नींव रखी।

दर्शन और साहित्य में: पेट्रार्क, इरास्मस, मोर और मैकियावेली ने ईश्वरीय उद्देश्य के स्थान पर मानवीय सद्गुण, आलोचनात्मक तर्क और राजनीतिक व्यावहारिकता को केंद्रीय सिद्धांत बनाया। देशी भाषाओं का साहित्य — दाँते, शेक्सपियर, सर्वांटेस — ने सामान्य भाषाओं को गौरवान्वित किया और राष्ट्रीय साहित्य की रचना की।

पुनर्जागरण ने सीधे धर्म-सुधार (लूथर ने मानवतावादी पाठ-आलोचना का उपयोग किया), वैज्ञानिक क्रांति और अंततः प्रबोधन को संभव बनाया। जैसा बर्कहार्ट ने लिखा — यह वह क्षण था जब यूरोपीय मन ने "विश्व और मनुष्य की खोज की" — आधुनिकता की नींव।