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इतिहास

प्रमुख व्यक्तित्व

स्वतंत्रता के बाद भारत: रियासतों का विलय, भाषाई पुनर्गठन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास, महिला सशक्तिकरण

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 7 / 11 0 PYQ 30 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

प्रमुख व्यक्तित्व

सरदार वल्लभभाई पटेल (1875–1950): "भारत के लोह पुरुष" — उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री; 562 रियासतों के विलय में व्यक्तिगत रूप से वार्ता की — प्रेरणा, प्रोत्साहन (प्रिवी पर्स) और दबाव के संयोजन से। उनका माध्यम: V.P. मेनन के साथ राज्य मंत्रालय1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित।

V.P. मेनन (1893–1966): राज्य मंत्रालय के सचिव; विलय-पत्र के प्राथमिक प्रारूपकार; हैदराबाद के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका; "द स्टोरी ऑफ द इंटीग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स" (1956) के लेखक।

पोट्टी श्रीरामुलु (1901–1952): तेलुगु कार्यकर्ता; उनके 56-दिन के आमरण अनशन ने भारत को आंध्र राज्य बनाने पर विवश किया — जिसने सर्वभारतीय भाषाई पुनर्गठन की माँग को सीधे बल दिया।

डॉ. B.R. अम्बेडकर (1891–1956): भारतीय संविधान के जनक और हिंदू कोड बिलों के प्राथमिक निर्माता; 1951 में सुधार बिलों के कमजोर होने पर इस्तीफा एक बड़ा राजनीतिक क्षण था; बाद में बौद्ध धर्म अपनाया (14 अक्टूबर 1956)।

होमी भाभा (1909–1966): भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक; TIFR (1945) और BARC (1954) बनाए; तीन-चरणीय परमाणु रणनीति तैयार की; 1950 के दशक से भारत को परमाणु-जागरूक राष्ट्र बनाया।

विक्रम साराभाई (1919–1971): INCOSPAR (1962) की स्थापना की और ISRO की स्थापना (1969) का मार्गदर्शन किया; विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (TV शिक्षा, कृषि के लिए दूर-संवेदन) की उनकी दृष्टि ने भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम को आकार दिया।