सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
क्रांतिकारी धारा
5.1 प्रारंभिक क्रांतिकारी (1905–1920)
खुदीराम बोस (1889–1908)
- मुजफ्फरपुर में एक ब्रिटिश मजिस्ट्रेट की गाड़ी पर बम फेंका (30 अप्रैल 1908)
- 11 अगस्त 1908 को 18 वर्ष की आयु में फाँसी — भारत के सबसे कम उम्र के शहीद क्रांतिकारी
वी.डी. सावरकर (1883–1966)
- लंदन में अभिनव भारत (Young India Society) की स्थापना (1906)
- The Indian War of Independence 1857 लिखी (ब्रिटिश द्वारा प्रतिबंधित)
- अंडमान सेलुलर जेल (काला पानी) में 1910–24 तक कारावास
- बाद में अपनी पुस्तक (1923) में हिंदुत्व विचारधारा विकसित की
अनुशीलन समिति
- बंगाली क्रांतिकारी संगठन (स्थापना कलकत्ता, 1902)
- बम-निर्माण, क्रांतिकारी साहित्य में सक्रिय
- स्वदेशी आंदोलन के उग्र पक्ष से जुड़ी
5.2 भगत सिंह और उनकी पीढ़ी (1920–30 का दशक)
भगत सिंह (1907–1931) — भारतीय स्वतंत्रता के सबसे प्रतिष्ठित क्रांतिकारी।
- हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल हुए (1924 में सचींद्र नाथ सान्याल द्वारा स्थापित)
- चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य के साथ इसे 1928 में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी (HSRA) के रूप में पुनर्गठित किया
- सॉन्डर्स की हत्या (17 दिसंबर 1928): राजगुरु के साथ लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स को गोली मारी — लाला लाजपत राय की मौत का बदला
- केंद्रीय विधान सभा में बम (8 अप्रैल 1929): दो धुआँ बम फेंके (अघातक, जानबूझकर) "बहरों को सुनाने के लिए" — पुलिस को आत्मसमर्पण; भागने से इनकार
- जेल-लेखन: लाहौर केंद्रीय कारागार में व्यापक लेखन; समाजवादी बने — उनका निबंध "मैं नास्तिक क्यों हूँ" (1930) भारतीय तर्कवादी साहित्य की कृति है
- 23 मार्च 1931 को फाँसी (सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु के साथ), लाहौर केंद्रीय जेल
चंद्रशेखर आज़ाद (1906–1931)
- HSRA अभियानों का नेतृत्व किया
- काकोरी ट्रेन डकैती (9 अगस्त 1925) का आयोजन किया (राम प्रसाद बिस्मिल और अन्य के साथ)
- कभी जीवित न पकड़े जाने का संकल्प; अल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद) में पुलिस से घिरे, 27 फरवरी 1931
- जब घिर गए तो अपनी आखिरी गोली खुद को मार ली
5.3 भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA/आज़ाद हिंद फौज)
सुभाष चंद्र बोस की यात्रा:
- कलकत्ता में नजरबंदी से भागे (जनवरी 1941); अफगानिस्तान–USSR होते हुए जर्मनी पहुँचे; हिटलर से मिले
- जर्मनी में भारतीय युद्धबंदियों से एक भारतीय सेना बनाने का प्रयास किया
- दक्षिण-पूर्व एशिया गए (पनडुब्बी यात्रा 1943); INA का नेतृत्व सँभाला
- 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार (आज़ाद हिंद) की घोषणा की
INA अभियान (1944–45):
- INA जापानी सेनाओं के साथ इम्फाल और कोहिमा (पूर्वोत्तर भारत) की ओर बढ़ी
- इम्फाल-कोहिमा युद्ध (जून–जुलाई 1944) में जापान को निर्णायक पराजय, पीछे हटना पड़ा
- बोस की ताइहोकू (ताइपे), ताइवान में विमान दुर्घटना में मृत्यु, 18 अगस्त 1945
INA मुकदमे (1945–46):
- ब्रिटिश ने INA अधिकारियों पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया — अभियुक्त राष्ट्रीय नायक बन गए
- उनका बचाव करने वाले वकीलों में जवाहरलाल नेहरू (इस मामले के लिए बार में लौटे), तेज बहादुर सप्रू और भुलाभाई देसाई शामिल थे
- जनता के व्यापक आक्रोश के सामने मुकदमे छोड़ने पड़े — जिसने ब्रिटेन के भारत छोड़ने के निर्णय में योगदान दिया
