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इतिहास

गाँधीवादी युग

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन: चरण, धाराएँ, योगदानकर्ता

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 5 / 11 0 PYQ 33 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

गाँधीवादी युग

4.1 गाँधी की वापसी और प्रारंभिक सत्याग्रह

मोहनदास करमचंद गाँधी (1869–1948): जन्म पोरबंदर (गुजरात); लंदन में कानून की शिक्षा। उन्होंने 1893–1915 दक्षिण अफ्रीका में अहिंसक प्रतिरोध (सत्याग्रह — "सत्य-बल") विकसित करते हुए बिताए। गोखले के सुझाव पर 1915 में भारत लौटे और एक वर्ष भ्रमण के बाद राजनीति में उतरे।

प्रारंभिक सत्याग्रह (1917–18) — "अभ्यास प्रयोग":

  • चंपारण (1917): भारत में पहला सत्याग्रह — नील किसानों की ओर से जिन्हें अपनी 3/20 भूमि पर नील उगाना पड़ता था (तिनकठिया प्रणाली); गाँधी की जाँच से जबरन नील अनुबंध समाप्त हुआ
  • अहमदाबाद मिल मजदूर हड़ताल (1918): गाँधी का पहला उपवास — कपड़ा मिल मजदूरों की वेतन वृद्धि की माँग पर; उनकी माँगें पूरी हुईं
  • खेड़ा सत्याग्रह (1918): फसल खराब होने पर भू-राजस्व स्थगन की माँग; वल्लभभाई पटेल ने यहाँ पहली बार गाँधी का साथ दिया

4.2 असहयोग आंदोलन (1920–22)

संदर्भ:

  • जलियाँवाला बाग हत्याकांड (अप्रैल 1919)
  • खिलाफत मुद्दा (अली बंधु)
  • सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस-खिलाफत गठबंधन

कार्यक्रम:

  • उपाधियों और सम्मानित पदों का त्याग
  • विधायी परिषदों का बहिष्कार
  • सरकारी शिक्षण संस्थाओं का बहिष्कार
  • अदालतों और चुनावों का बहिष्कार
  • विदेशी कपड़े का बहिष्कार; मद्य दुकानों पर पिकेटिंग

पैमाना और प्रमुख प्रतिभागी:

  • पहले वर्ष में 30,000 गिरफ्तारियाँ
  • सुभाष चंद्र बोस आंदोलन में शामिल हुए (ICS की पढ़ाई छोड़कर लौटे)
  • सी.आर. दास ने अपनी वकालत छोड़ी
  • खिलाफत नेताओं ने मुस्लिम भागीदारी का नेतृत्व किया

चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी 1922):

चौरी-चौरा गाँव (गोरखपुर, UP) में प्रदर्शनकारी भीड़ ने एक पुलिस चौकी पर हमला करके उसे जला दिया — 22 पुलिसकर्मी मारे गए। गाँधी ने दो सप्ताह बाद (12 फरवरी 1922) पूरा आंदोलन वापस ले लिया — यह तर्क देते हुए कि अहिंसा का उल्लंघन हुआ। यह निर्णय कई नेताओं (मोतीलाल नेहरू, सुभाष बोस) द्वारा — आंदोलन को उसके चरम पर छोड़ने के रूप में — आलोचित हुआ।

4.3 सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी मार्च (1930–34)

1930 तक की पृष्ठभूमि:

  • साइमन कमीशन (1928, पूरी तरह ब्रिटिश, कोई भारतीय नहीं) का बहिष्कार
  • नेहरू रिपोर्ट (1928): पहला भारतीय-रचित संवैधानिक प्रस्ताव, पर मुस्लिम लीग ने अस्वीकार किया
  • लाहौर कांग्रेस (दिसंबर 1929): पूर्ण स्वराज (संपूर्ण स्वतंत्रता) का उद्घोष
  • 26 जनवरी 1930 पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया (अब गणतंत्र दिवस)

दांडी मार्च (12 मार्च–5 अप्रैल 1930):

गाँधी ने नमक कर को केंद्र चुना — सार्वभौमिक रूप से लागू, नैतिक रूप से स्पष्ट, सबसे गरीब तक प्रभाव। साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से दांडी (गुजरात तट) तक 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की यात्रा — 5 अप्रैल 1930 को समुद्र जल से नमक बनाया।

  • गाँधी 5 मई 1930 को गिरफ्तार
  • धरासना नमक कारखाने पर छापा (21 मई 1930): सरोजिनी नायडू और अब्बास तैयबजी के नेतृत्व में; अहिंसक प्रदर्शनकारियों को इस्पात-नोकदार डंडों से पीटा गया — अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर ने कवरेज दी, अंतरराष्ट्रीय आक्रोश फैला
  • पेशावर: भारी प्रदर्शन; खान अब्दुल गफ्फार खान की खुदाई खिदमतगार ("ईश्वर के सेवक") — अहिंसक पश्तून आंदोलन

गोलमेज सम्मेलन और समझौता:

  • पहला गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930): कांग्रेस ने बहिष्कार किया; रियासतें और मुस्लिम लीग शामिल हुईं
  • गाँधी-इर्विन समझौता (5 मार्च 1931): गाँधी ने सविनय अवज्ञा निलंबित की; इर्विन ने राजनीतिक कैदी रिहा किए, तटीय नमक उत्पादन की अनुमति दी; गाँधी दूसरे गोलमेज सम्मेलन (सितंबर–दिसंबर 1931) में गए पर यह विफल रहा
  • सांप्रदायिक पंचाट (अगस्त 1932): रैम्से मैकडोनाल्ड ने अनुसूचित जातियों को पृथक निर्वाचन-मंडल दिया — गाँधी ने मृत्यु-पर्यंत उपवास किया
  • पूना समझौता (24 सितंबर 1932): गाँधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच सहमति — पृथक निर्वाचन-मंडल की जगह संयुक्त हिंदू निर्वाचन-मंडल में आरक्षित सीटें

4.4 भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

संदर्भ:

  • द्वितीय विश्व युद्ध भारत की सीमा तक पहुँच चुका था (जापानी सेना बर्मा-भारत सीमा पर, 1942)
  • क्रिप्स मिशन (मार्च–अप्रैल 1942) ने युद्ध के बाद अधिराज्य का दर्जा देने की पेशकश की — तत्काल स्वशासन नहीं
  • कांग्रेस ने इसे "डूबते बैंक पर उत्तर-दिनांकित चेक" (नेहरू) कहकर अस्वीकार किया

प्रस्ताव (8 अगस्त 1942):

गोवालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान), बॉम्बे में AICC की बैठक में कांग्रेस ने भारत छोड़ो प्रस्ताव पास किया — तत्काल ब्रिटिश वापसी की माँग। गाँधी का नारा: "करो या मरो"

तत्काल गिरफ्तारी:

प्रस्ताव के कुछ घंटों बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने पूरे कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया — गाँधी पुणे के बिड़ला हाउस में; नेहरू, पटेल, आज़ाद सब कारावास में। आंदोलन नेतृत्वहीन हो गया।

अरुणा आसफ़ अली (1909–1996):

  • 9 अगस्त 1942 को गोवालिया टैंक मैदान पर कांग्रेस का झंडा फहराया — 1942 विद्रोह का प्रतीक बनीं
  • तीन वर्षों तक भूमिगत रहीं, गतिविधियाँ समन्वित करती रहीं
  • भारत रत्न (1997, मरणोपरांत); "भारत छोड़ो आंदोलन की नायिका" कहलाईं
  • दिल्ली की पहली महिला महापौर (1958) भी रहीं

दमन का पैमाना:

  • लगभग 1 लाख लोग गिरफ्तार
  • पुलिस गोलीबारी में 1,028 मारे गए
  • 3,200 पुलिस थाने, 749 सरकारी इमारतें, 88 रेलवे स्टेशन, 231 टेलीग्राफ दफ्तर क्षतिग्रस्त या नष्ट
  • 1942 के अंत तक आंदोलन प्रभावी रूप से दबा दिया गया, पर इसने दीर्घकालिक ब्रिटिश शासन की असंभवता सिद्ध की