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3.1 सूरत विभाजन (1907)
कांग्रेस का विभाजन सूरत अधिवेशन (दिसंबर 1907) में अध्यक्ष पद के विवाद पर हुआ। उग्रवादियों (तिलक गुट) ने लाला लाजपत राय को अध्यक्ष चाहा; उदारवादियों ने रास बिहारी घोष पर जोर दिया। उग्रवादियों ने अधिवेशन बाधित किया, जिससे उदारवादियों और उग्रवादियों के बीच औपचारिक विभाजन हो गया। यह विभाजन लखनऊ समझौते (1916) तक बना रहा।
3.2 बाल-पाल-लाल — उग्रवादी त्रिमूर्ति
बाल गंगाधर तिलक (1856–1920)
- मंडाले में कारावास के दौरान गीता रहस्य (1908–14) लिखी — भगवद्गीता पर टीका
- 1 अगस्त 1920 को निधन — गाँधी का पहला राजनीतिक जन-शोक
- पूर्ण परिचय धारा 2.2 में देखें
बिपिन चंद्र पाल (1858–1932)
- बंगाली पत्रकार और वक्ता; "निष्क्रिय प्रतिरोध" के समर्थक (गाँधी से पहले असहयोग का एक रूप)
- New India के संपादक; "भारत में क्रांतिकारी विचार के जनक" कहलाए
- 1908 में तिलक के राजद्रोह मुकदमे में गवाही देने से इनकार किया और अवमानना में कारावास भोगा
लाला लाजपत राय (1865–1928)
- "पंजाब केसरी"; कैथरीन मेयो की Mother India के जवाब में Unhappy India (1928) लिखी
- लाहौर में साइमन कमीशन (एक पूरी तरह ब्रिटिश संवैधानिक समीक्षा समिति जिसमें कोई भारतीय नहीं था) के विरुद्ध विरोध का नेतृत्व किया — 30 अक्टूबर 1928
- पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट के आदेश पर लाठियाँ पड़ीं; 17 नवंबर 1928 को चोटों से मृत्यु
- उनकी मृत्यु ने भगत सिंह के प्रसिद्ध बदले की हत्या को प्रेरित किया
3.3 स्वदेशी आंदोलन (1905–08)
बंगाल का विभाजन ने भारत का पहला जन राष्ट्रीय आंदोलन छेड़ा।
- ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार: विशेष रूप से ब्रिटिश कपड़ा — "स्वदेशी कपड़ा" राष्ट्रवादी प्रतीक बना
- स्वदेशी उद्यम को प्रोत्साहन: राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, स्वदेशी वित्तीय संस्थाएँ
- बंगाल में उग्र राजनीतिक कार्रवाई: बम कारखाने; खुदीराम बोस को 1908 में फाँसी (उम्र 18 वर्ष) — स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे युवा शहीद
- भौगोलिक विस्तार: पहले बंगाल-केंद्रित, फिर पंजाब (लाजपत राय) और महाराष्ट्र (तिलक) तक
- पलटाव: बंगाल का विभाजन दिल्ली दरबार (1911) में रद्द हुआ, पर सांप्रदायिक रेखाएँ कठोर हो चुकी थीं
3.4 होम रूल लीगें (1916)
एनी बेसेंट (आयरिश-ब्रिटिश थियोसोफिस्ट) ने होम रूल लीग (मद्रास, अप्रैल 1916) की स्थापना की। बाल गंगाधर तिलक ने समानांतर होम रूल लीग (महाराष्ट्र, अप्रैल 1916) बनाई। इन लीगों ने ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर भारत के लिए "होम रूल" (स्वशासन) की माँग की — पूर्ण स्वतंत्रता से कम।
एनी बेसेंट को ब्रिटिश ने नजरबंद किया (जून 1917), जिससे विरोधाभासी रूप से उनकी लोकप्रियता बढ़ी। वे दिसंबर 1917 में INC अध्यक्ष बनीं — पहली महिला अध्यक्ष।
लखनऊ समझौता (दिसंबर 1916)
- कांग्रेस में उदारवादी-उग्रवादी विभाजन समाप्त हुआ
- कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन-मंडल पर सहमति व्यक्त की (लीग की माँग)
- संवैधानिक सुधार माँगों के संयुक्त कार्यक्रम पर भी सहमति बनी
- यह समझौता हिंदू-मुस्लिम राजनीतिक एकता का एक क्षण था
