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परिचय एवं संदर्भ
अवलोकन
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (1857–1947) इतिहास के सबसे महत्त्वपूर्ण उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्षों में से एक है। यह 90 वर्षों की एक प्रक्रिया थी जिसमें संवैधानिक याचिकाएँ, जन सविनय अवज्ञा, क्रांतिकारी संघर्ष और कूटनीतिक जुड़ाव — सभी शामिल थे। अंततः इसने उपनिवेशी शक्ति को सैन्य पराजय दिए बिना स्वतंत्रता प्राप्त की।
यह आंदोलन अपनी आंतरिक बहसों की जटिलता के लिए भी उल्लेखनीय है: उदारवादी बनाम उग्रवादी, अहिंसक बनाम क्रांतिकारी, हिंदू-मुस्लिम संबंध, और यह प्रश्न कि स्वतंत्र भारत का नेतृत्व कौन करेगा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
यह विषय RPSC प्रश्न-पत्र I, इकाई I में सर्वाधिक अंक लाने वाले विषयों में से है। छह परीक्षा वर्षों (2013–2023) में 37 अंक अर्जित किए हैं — औसतन 7.4 अंक/वर्ष — विषय 4 और विषय 5 के बाद तीसरे स्थान पर। 2021 में 2 अंकों के एक प्रश्न ने विशेष रूप से भारत छोड़ो आंदोलन में अरुणा आसफ़ अली की भूमिका को परखा। 2023 में शून्य अंक होने से 2026 में एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न की उच्च संभावना है।
परीक्षा रणनीति
विषय की व्यापकता — 90 वर्ष, दर्जनों घटनाएँ, सैकड़ों योगदानकर्ता — के लिए चरण-आधारित व्यवस्थित संगठन आवश्यक है।
- 5 अंक के प्रश्नों के लिए: किसी एक घटना/व्यक्ति को गहराई से जानो — सटीक तिथियाँ, स्थान, विशिष्ट विवरण
- 10 अंक के प्रश्नों के लिए: तुलनात्मक/विश्लेषणात्मक ढाँचे का प्रयोग करो: संदर्भ → तरीका → परिणाम → महत्त्व
