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इतिहास

मुख्य बिंदु

ब्रिटिश नीतियाँ: राजनीतिक, आर्थिक, प्रशासनिक एकीकरण

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 1 / 10 0 PYQ 29 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

सहायक संधि (1798, लॉर्ड वेलेस्ली)

  • भारतीय शासकों को अपने खर्च पर ब्रिटिश सेना रखनी होती थी
  • दरबार में ब्रिटिश रेजीडेंट स्वीकार करना अनिवार्य था
  • बदले में ब्रिटेन ने बाहरी और आंतरिक खतरों से संरक्षण दिया
  • शामिल राज्य: हैदराबाद (1798), मैसूर (1799), अवध (1801), मराठा सरदार (1802)
  • औपचारिक विलय के बिना भारतीय शासकों की स्वतंत्रता समाप्त की

व्यपगत सिद्धांत (लॉर्ड डलहौजी, 1848–1856)

  • भारतीय शासकों से दत्तक पुत्र का अधिकार छीना — गोद लिया पुत्र सामंती राज्य का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता था
  • हड़पे गए राज्य: सतारा (1848), जैतपुर और संबलपुर (1849), बाघत (1850), उदयपुर (1852), झाँसी (1853), नागपुर (1854)
  • अवध (1856) को अलग आधार — "कुशासन" — पर अधिग्रहीत किया गया
  • वंचित शासक 1857 के विद्रोह के मुख्य नेता बने

बंगाल का स्थायी बंदोबस्त (1793, लॉर्ड कॉर्नवालिस)

  • ज़मींदारों के साथ भूमि राजस्व स्थायी रूप से निर्धारित; उन्हें वंशानुगत स्वामित्व मिला
  • किसान (रैयत) केवल किरायेदार रह गए, उनका कोई स्वामित्व अधिकार नहीं
  • कृषि अधिशेष ब्रिटिश-समर्थक नए ज़मींदार वर्ग को हस्तांतरित हुआ
  • ग्रामीण ऋणग्रस्तता बढ़ी और कृषि गरीबी गहरी हुई

रैयतवारी और महालवारी बंदोबस्त

  • रैयतवारी (थॉमस मुनरो, मद्रास 1820; एल्फिंस्टन, बॉम्बे): व्यक्तिगत किसानों (रैयत) से सीधा राजस्व; उन्हें काश्तकारी अधिकार थे
  • महालवारी (विलियम बेंटिक, उत्तर भारत): गाँवों (महाल) के साथ सामूहिक बंदोबस्त, संयुक्त देनदारी
  • तीनों प्रणालियाँ मिलकर सम्पूर्ण ब्रिटिश भारत में लागू हुईं

भारत में रेलवे

  • पहली रेलवे लाइन (बॉम्बे से ठाणे, 21 मील) 16 अप्रैल 1853 को लॉर्ड डलहौजी के अधीन प्रारंभ हुई
  • 1900 तक भारत में 25,000 मील रेल थी
  • ब्रिटिश साम्राज्यिक उद्देश्य: कच्चा माल बंदरगाहों तक, सैनिकों की आवाजाही, बाज़ारों का एकीकरण
  • आलोचक: रेलवे ने धन-निकासी गहरी की; समर्थक: एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार बनाया

धन-निकासी सिद्धांत

  • दादाभाई नौरोजी ने पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया (1901) में इसे प्रतिपादित किया
  • आर.सी. दत्त ने द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया (1902) से इसे पूरक किया
  • नौरोजी का अनुमान: ब्रिटेन "होम चार्जेज" के माध्यम से प्रतिवर्ष कम से कम £30 मिलियन निकालता था
  • होम चार्जेज में शामिल: सिविल/सैन्य पेंशन, रेलवे ऋण ब्याज, India Office की लागत, प्रेषित लाभ

भारतीय सिविल सेवा (ICS)

  • 1833 के चार्टर अधिनियम से स्थापना; भारत सरकार अधिनियम 1853 से प्रतिस्पर्धी परीक्षाएँ
  • 1922 तक परीक्षाएँ केवल लंदन में; उसके बाद भारत और इंग्लैंड में एक साथ
  • लॉर्ड मैकॉले के 1835 के "शिक्षा पर विवरण-पत्र" ने अंग्रेजी को शिक्षा माध्यम बनाया
  • जो औपनिवेशिक नौकरशाही बनाई वही स्वतंत्रता के बाद IAS बनी

लॉर्ड मैकॉले का शिक्षा विवरण-पत्र (1835)

  • तर्क दिया कि "एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी भारत और अरब के सम्पूर्ण साहित्य से अधिक मूल्यवान है"
  • अंग्रेजी माध्यम शिक्षा की सिफारिश — "खून और रंग में भारतीय, पर विचार, राय, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज" वर्ग बनाना
  • भारत के शिक्षित वर्ग को बदला लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के बौद्धिक नेता भी पैदा किए
  • नौरोजी, गोखले, तिलक, बनर्जी — सभी ने पश्चिमी स्वतंत्रता विचारों से स्वराज की माँग की

महारानी विक्टोरिया की घोषणा, 1858

  • 1857 के विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को सत्ता हस्तांतरित
  • धर्म में अहस्तक्षेप और भारतीयों को समान रोजगार अवसर का वादा
  • भारतीय राजाओं के साथ विद्यमान संधियों के सम्मान का वादा
  • 1947 तक चले प्रत्यक्ष क्राउन शासन (ब्रिटिश राज) का ढाँचा तैयार किया
**लॉर्ड रिपन का स्थानीय स्वशासन अधिनियम (1882)**
- निर्वाचित भारतीय बहुमत वाले स्थानीय निकाय (नगरपालिकाएँ और जिला बोर्ड) बनाए
- भारतीयों को शक्ति का पहला महत्त्वपूर्ण हस्तांतरण
- **इल्बर्ट विधेयक विवाद (1883)** से भी जुड़े — भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय अभियुक्तों पर मुकदमा चलाने की अनुमति का प्रयास
- यूरोपीय समुदाय के विरोध से विधेयक वापस लेना पड़ा



**भारतीय परिषद् अधिनियम — 1892 और 1909**
- **भारतीय परिषद् अधिनियम 1892:** विधान परिषदों में भारतीयों के नामांकन की अनुमति
- **भारतीय परिषद् अधिनियम 1909 (मोर्ले-मिंटो सुधार):** सीमित चुनाव प्रारंभ
- विवादास्पद रूप से **मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र** पेश किए — सांप्रदायिक पहचान गहरी हुई
- यह अलग निर्वाचन नीति अंततः विभाजन की पूर्वपीठिका बनी



**बंगाल विभाजन (1905, लॉर्ड कर्जन)**
- बंगाल को पूर्वी बंगाल (मुस्लिम बहुमत) और पश्चिमी बंगाल (हिंदू बहुमत) में बाँटा गया
- प्रशासनिक दक्षता के नाम पर; राष्ट्रवादियों ने इसे "फूट डालो और राज करो" माना
- **स्वदेशी आंदोलन** को जन्म दिया — ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, भारतीय उत्पादों को बढ़ावा
- 1911 में दिल्ली दरबार में राजा जॉर्ज पंचम के समय रद्द; राजधानी भी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित