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इतिहास

भारत में सूफीवाद

धार्मिक आंदोलन एवं दर्शन (प्राचीन एवं मध्यकालीन)

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 7 / 11 0 PYQ 31 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

भारत में सूफीवाद

6.1 उद्गम और मूल अवधारणाएँ

सूफीवाद (अरबी: सूफ = ऊन, आरम्भिक इस्लामी रहस्यवादियों के मोटे ऊनी वस्त्रों के संदर्भ में) उमैय्यद और अब्बासी खिलाफतों की सांसारिकता की प्रतिक्रिया में 8वीं–9वीं शती ई. में उभरा। मूल अवधारणाएँ:

  • फना (ईश्वरीय प्रेम में अहम् का विलय): सूफी का लक्ष्य है व्यक्तिगत पहचान को ईश्वरीय में घुलाना
  • तौहीद (वजूद की एकता): ईश्वर ही एकमात्र वास्तविक सत्ता है — बाकी सब ईश्वर की अभिव्यक्ति
  • सिलसिला (आध्यात्मिक अधिकार की श्रृंखला): प्रत्येक सूफी सिलसिला हज़रत मुहम्मद तक अटूट गुरु-परम्परा का दावा करता है
  • खानकाह: सूफी आश्रम जहाँ शिष्य शेख (गुरु) से आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं
  • समा (आध्यात्मिक संगीत): ईश्वर के साथ आनंदमय मिलन पाने के साधन के रूप में भक्ति संगीत और नृत्य (चक्कर)

6.2 भारत के प्रमुख सूफी सिलसिले

सिलसिला भारत में प्रमुख व्यक्ति क्षेत्र विशेष लक्षण
चिश्ती मोइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर, लगभग 1143–1236); कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी (दिल्ली); निज़ामुद्दीन औलिया (दिल्ली, लगभग 1238–1325); बंदे नवाज़ गेसुदराज़ (गुलबर्गा) दिल्ली, राजस्थान, दक्कन प्रेम, संगीत (समा), ग़रीबों की सेवा पर जोर; भक्ति परम्पराओं के सर्वाधिक निकट
सुहरावर्दी बहाउद्दीन ज़करिया (मुल्तान, 1170–1267); जलालुद्दीन बुखारी पंजाब, सिंध अधिक रूढ़िवादी; राज्य से घनिष्ठ सम्बंध; सरकारी अनुदान स्वीकार किए
कादिरी सैयद मुहम्मद गेसुदराज़ दक्कन, दक्षिण भारत बगदाद के अब्दुल क़ादिर जीलानी के नाम पर; व्यक्तिगत मुक्ति पर केंद्रित
नक्शबंदी ख्वाजा बाकी बिल्लाह (दिल्ली); अहमद सिरहिंदी (1564–1624) दिल्ली, पंजाब रूढ़िवादी; अहमद सिरहिंदी ने अकबर के दीन-ए-इलाही का विरोध किया; शरिया पर बल

मोइनुद्दीन चिश्ती (लगभग 1141–1236 ई.)

भारत के सर्वाधिक श्रद्धेय सूफी संत, ग़रीब नवाज़ (ग़रीबों के रक्षक) के नाम से जाने जाते हैं। अजमेर स्थित उनकी दरगाह विश्व के सर्वाधिक दर्शनीय तीर्थस्थलों में से एक है — हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी यहाँ आते हैं। वे मुहम्मद गोरी की आक्रमणकारी सेना के साथ भारत आए किन्तु अजमेर में स्थायी रूप से बस गए।

निज़ामुद्दीन औलिया (लगभग 1238–1325 ई.)

दिल्ली के सर्वाधिक प्रिय सूफी संत — हुमायूँ के मकबरे के निकट उनकी खानकाह आध्यात्मिक जीवन का केंद्र बनी। फरीदुद्दीन गंजशकर ("बाबा फरीद," पंजाब) के शिष्य। अमीर खुसरो (कवि-संगीतकार) उनके सर्वाधिक प्रसिद्ध शिष्य थे।

6.3 भारतीय संस्कृति पर सूफीवाद का प्रभाव

सूफीवाद ने भारत के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक समन्वयों में से एक को सुगम बनाया:

  • साहित्यिक प्रभाव: फारसी, उर्दू और लोकभाषाओं में सूफी काव्य — अमीर खुसरो की फारसी-हिंदी रचनाएँ; मसनवी (कथा-काव्य) रूप; वली दक्कनी की उर्दू गज़लें
  • संगीत प्रभाव: दरगाहों पर क़व्वाली परम्परा; हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में ख्याल रूप; अमीर खुसरो के नवाचार
  • सामाजिक प्रभाव: खानकाहें सामाजिक कल्याण के केंद्र बनीं, ग़रीबों की सेवा की; ईश्वर के समक्ष सभी आत्माओं की समानता पर सूफी बल निचली जाति के हिंदुओं में गूँजा
  • समन्वयकारी प्रभाव: सूफीवाद और भक्ति ने एक-दूसरे को पोषित किया — वैयक्तिक भक्ति, बाह्य कर्मकांड की अस्वीकृति, लोकभाषा के उपयोग में समान बल; कबीर जैसे व्यक्तित्व दोनों परम्पराओं से जुड़े थे