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परिचय एवं संदर्भ
अवलोकन
धार्मिक आंदोलन और दर्शन — ये विश्व सभ्यता को भारत का सबसे स्थायी योगदान हैं। वैदिक दार्शनिक परंपरा (लगभग 1000–500 ई.पू.) से लेकर भक्ति एवं सूफी आंदोलनों (6वीं–17वीं शती) तक भारत ने आध्यात्मिक जिज्ञासा की एक अटूट परंपरा को जन्म दिया। इस परंपरा ने केवल धर्म को नहीं, बल्कि कला, साहित्य, वास्तुकला, संगीत और सामाजिक संगठन को भी गहराई से आकार दिया।
परीक्षा में महत्त्व
RPSC मेन्स के PYQ विश्लेषण में यह विषय प्रत्येक वर्ष आया है — पेपर I, इकाई I का सर्वाधिक नियमित एकल विषय।
- 2021: एक 2-अंकी प्रश्न में चार आस्तिक दर्शनों की जाँच हुई; दूसरे में सुहरावर्दी सूफी सिलसिले की
- 2023: एक 5-अंकी प्रश्न में नयनमार और अलवार भक्ति संतों की चर्चा हुई
- यह विषय 2,500 वर्षों का फलक समेटे है — प्रश्न किसी भी बिंदु पर केंद्रित हो सकते हैं: एक दार्शनिक, धार्मिक विद्यालय, सूफी सिलसिला अथवा भक्ति संत
परीक्षा रणनीति
5-अंकी प्रश्नों के लिए: तिथि और स्थान सहित 3–4 विशिष्ट उदाहरण तैयार रखो।
10-अंकी प्रश्नों के लिए: तुलनात्मक ढाँचे का उपयोग करो: पृष्ठभूमि → मूल दर्शन → सामाजिक प्रभाव → साहित्यिक/कलात्मक विरासत।
