सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
बौद्ध धर्म — मूल दर्शन और विकास
3.1 स्थापना और मूल सिद्धांत
सिद्धार्थ गौतम का जीवन
- लगभग 563 ई.पू. में लुम्बिनी (अब नेपाल) में जन्म; शाक्य वंश के राजा शुद्धोदन के पुत्र
- 29 वर्ष की आयु में चार दृश्यों (वृद्ध, रोगी, शव, भिक्षु) को देखकर गृहत्याग
- 6 वर्षों के कठोर तप के बाद उसे त्यागा और बोध गया में सुजाता से खीर स्वीकार की
- बोध गया (बिहार) में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान (निर्वाण) प्राप्त किया, लगभग 528 ई.पू.
- प्रथम उपदेश (धम्मचक्कप्रवत्तन सुत्त) सारनाथ (वाराणसी के निकट) में पाँच पूर्व-साथियों को दिया — संघ की स्थापना
- लगभग 483 ई.पू. में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में निधन — महापरिनिर्वाण
चार आर्य सत्य (चतुर आर्य सत्य)
- दुःख: समस्त अस्तित्व में दुःख है — जन्म, मृत्यु, प्रिय से वियोग, अप्रिय से संयोग
- समुदय: दुःख का कारण तृष्णा है — सुख, अस्तित्व और अनस्तित्व की लालसा
- निरोध: तृष्णा के सम्पूर्ण विनाश से दुःख का अंत संभव है
- मार्ग: अष्टांगिक मार्ग दुःख-निरोध की ओर ले जाता है
अष्टांगिक मार्ग (अष्टांगिक मार्ग)
सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि — तीन समूहों में वर्गीकृत:
- प्रज्ञा: सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प
- शील: सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीव
- समाधि: सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि
प्रमुख सिद्धांत
- अनात्मन्: कोई स्थायी आत्मा नहीं
- अनिच्च: अनित्यता
- प्रतीत्यसमुत्पाद: प्रतीत्य-उत्पत्ति — सब कुछ परिस्थितियों पर निर्भर होकर उत्पन्न होता है; किसी की स्वतंत्र सत्ता नहीं
- निर्वाण: संसार से मुक्ति — तृष्णा का विनाश
3.2 बौद्ध संगीतियाँ और विभाजन
| संगीति | तिथि | स्थान | प्रमुख परिणाम |
|---|---|---|---|
| प्रथम | 483 ई.पू. | राजगृह (बिहार) | विनय पिटक और धम्म पिटक का संकलन |
| द्वितीय | 383 ई.पू. | वैशाली | विभाजन का आरंभ — महासांघिक बनाम स्थविरवादी |
| तृतीय | 250 ई.पू. | पाटलिपुत्र | अशोक का संरक्षण; मोग्गलिपुत्त तिस्स; विदेशों में प्रचारक (महिंद — श्रीलंका) |
| चतुर्थ | लगभग 100 ई. | कुंडलवन, कश्मीर | कनिष्क का संरक्षण; हीनयान/महायान विभाजन |
3.3 हीनयान बनाम महायान
| पक्ष | हीनयान (थेरवाद) | महायान |
|---|---|---|
| लक्ष्य | व्यक्तिगत मुक्ति (निर्वाण) | सभी प्राणियों की मुक्ति (बोधिसत्व आदर्श) |
| भाषा | पाली | संस्कृत |
| बुद्ध की अवधारणा | ऐतिहासिक शिक्षक, मानव | दिव्य सत्ता, ब्रह्मांडीय बुद्ध |
| भौगोलिक प्रसार | श्रीलंका, दक्षिण-पूर्व एशिया | तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया |
| प्रमुख ग्रंथ | त्रिपिटक (पाली कैनन) | प्रज्ञापारमिता सूत्र, लोटस सूत्र |
वज्रयान (तांत्रिक बौद्ध धर्म) — 5वीं–7वीं शती ई. में उत्तर-पूर्व भारत में उभरा तीसरा विद्यालय; तिब्बत में प्रसारित; तांत्रिक अनुष्ठानों, मंत्रों और प्रत्यक्ष संचरण पर बल।
