सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
प्रागैतिहासिक एवं प्राचीन भारतीय कला
2.1 सिंधु घाटी सभ्यता की कला (लगभग 2600–1900 ई.पू.)
सिंधु घाटी सभ्यता, जो आधुनिक पाकिस्तान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा में फैली थी, ने बिना किसी ज्ञात धार्मिक संरक्षण प्रणाली के एक उल्लेखनीय कलात्मक परंपरा का निर्माण किया।
प्रमुख कला वस्तुएँ:
- "नृत्यांगना" कांस्य मूर्ति (मोहनजोदड़ो, लगभग 2500 ई.पू.): 10.8 सेमी ऊँची, खोया-मोम (cire-perdue) तकनीक से ढली, हार पहने एक युवती की प्राकृतिक contrapposto मुद्रा में — भारत की प्रारंभिक कांस्य मूर्तिकला।
- "पुरोहित-राजा" का अर्ध-प्रतिमा (मोहनजोदड़ो): स्टेटाइट मूर्ति, 17.5 सेमी ऊँची, त्रिपत्र-अलंकृत वस्त्र और पट्टिका — किसी शासक या पुरोहित का प्रतिनिधित्व मानी जाती है।
- मुहरें: 4,000 से अधिक उत्कीर्ण मुहरें, मुख्यतः स्टेटाइट में, जिनपर पशु (कूबड़दार बैल, हाथी, गैंडा, बाघ), पौराणिक प्राणी और अपाठ्य लिपि अंकित है।
- मृद्भांड: चाक पर बना लाल/काला रंगा मिट्टी के बर्तन जिन पर ज्यामितीय और पुष्प आकृतियाँ — इस सभ्यता की सर्वाधिक संख्या में प्राप्त कला वस्तुएँ।
- नगर नियोजन एक शहरी कला के रूप में: ग्रिड-पैटर्न नगर, एकसमान पक्की ईंट के मकान, ढकी नाली प्रणाली — विश्व की प्रथम ज्ञात नगरपालिका शहरी नियोजन सौंदर्य।
2.2 वैदिक और उत्तर-वैदिक काल (लगभग 1500–300 ई.पू.)
प्रारंभिक वैदिक काल (लगभग 1500–1000 ई.पू.) मुख्यतः गैर-स्मारकीय था — कोई जीवित स्थापत्य नहीं। साहित्यिक परंपरा ही प्रधान थी: चार वेद (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद), उपनिषद, आरण्यक और ब्राह्मण ग्रंथ मानवता की महानतम साहित्यिक धरोहरों में से एक हैं।
ऋग्वेद (लगभग 1500–1200 ई.पू.) में वैदिक संस्कृत में 1,028 सूक्त हैं — किसी भी हिंद-यूरोपीय भाषा में सबसे प्राचीन ज्ञात व्यवस्थित साहित्यिक संग्रह।
परवर्ती वैदिक काल ने दो मूलभूत महाकाव्यों का निर्माण किया:
- महाभारत (व्यास को आरोपित, लगभग 8वीं–4वीं शती ई.पू.): ~1,00,000 श्लोक — विश्व का दीर्घतम महाकाव्य
- रामायण (वाल्मीकि, लगभग 5वीं–4वीं शती ई.पू.): 24,000 श्लोक
इन महाकाव्यों ने परवर्ती सभी भारतीय कला रूपों के लिए पौराणिक-साहित्यिक आधार का कार्य किया।
2.3 मौर्य कला (322–185 ई.पू.)
मौर्य साम्राज्य की कला अशोक (272–232 ई.पू.) के राज्याश्रय से विशिष्ट है, जो कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के बाद बौद्ध धर्म में परिवर्तित हुए और धम्म प्रचार के लिए कला को साम्राज्यिक उपकरण बनाया।
अशोक स्तंभ
एकाश्म बलुआ पत्थर के स्तंभ (लगभग 40 ज्ञात), सामान्यतः 12–15 मीटर ऊँचे, उच्च पालिशदार सतह ("मौर्य पॉलिश") के साथ। शीर्ष के प्रकार:
- सिंह शीर्ष (सारनाथ, वाराणसी, लगभग 250 ई.पू.): चार पृष्ठसंलग्न सिंह एक घंटाकार आधार पर, जिस पर चार पशु (घोड़ा, बैल, हाथी, सिंह) और एक धम्म चक्र उत्कीर्ण — 1950 में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना
- अन्य शीर्ष: एकल सिंह (वैशाली), एकल हाथी (संकिसा), एकल बैल
स्तूप स्थापत्य
साँची स्तूप क्रमांक 1 (मध्य प्रदेश) का निर्माण मूलतः अशोक ने किया और बाद में शुंग काल (2री–1री शती ई.पू.) में चार अलंकृत तोरणों (प्रवेश द्वारों) से सुसज्जित किया, जिन पर जातक कथाएँ और बुद्ध के जीवन के दृश्य उत्कीर्ण हैं।
बराबर गुफाएँ (बिहार)
अशोक द्वारा आजीविक भिक्षुओं को अर्पित सात शैल-कट गुफाएँ — भारत की प्रारंभिकतम जीवित शैल-कट स्थापत्य कला, भीतरी दीवारों पर विशिष्ट मौर्य पॉलिश के साथ।
