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इतिहास

संभावित प्रश्न एवं उत्तर

भारतीय विरासत: ललित कला, प्रदर्शन कला, स्थापत्य, साहित्य (सिंधु सभ्यता से ब्रिटिश काल तक)

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 32 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं उत्तर


प्रश्न 1 (5 अंक — 50 शब्द): सारनाथ सिंह शीर्ष और उसके महत्त्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।

आदर्श उत्तर:
सारनाथ सिंह स्तंभ शीर्ष (लगभग 250 ई.पू.), अशोक के शासनकाल में निर्मित, में चुनार बलुआ पत्थर पर "मौर्य पॉलिश" तकनीक से घड़े चार पीठ-से-पीठ जुड़े सिंह हैं, जो घंटाकार आधार पर बने हैं। इस आधार पर चार पशु और एक धम्म चक्र उत्कीर्ण हैं। यह शीर्ष साम्राज्यिक धर्म और अखिल-भारतीय संप्रभुता का प्रतीक था। भारत ने 1950 में इसे राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया। इसके आधार का धम्म चक्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित है।


प्रश्न 2 (5 अंक — 50 शब्द): नागर और द्रविड़ मंदिर स्थापत्य शैलियों में अंतर स्पष्ट करो।

आदर्श उत्तर:
नागर शैली (उत्तर भारत) में गर्भगृह के ऊपर वक्ररेखीय शिखर होता है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण कंदारिया महादेव, खजुराहो (लगभग 1025 ई.) है। द्रविड़ शैली (दक्षिण भारत) में पिरामिडनुमा विमान और ऊँचे अलंकृत गोपुरम (प्रवेश द्वार) होते हैं; इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर (1010 ई.) है। नागर शैली में बलुआ पत्थर का उपयोग होता है, जबकि द्रविड़ में ग्रेनाइट। दक्कन में इन दोनों के मिश्रण से वेसर शैली का विकास हुआ।


प्रश्न 3 (5 अंक — 50 शब्द): मुगल स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? दो उदाहरण दो।

आदर्श उत्तर:
मुगल स्थापत्य कला में फ़ारसी, मध्य एशियाई और भारतीय तत्त्वों का समन्वय है। प्रमुख विशेषताएँ: वास्तविक मेहराब और गुंबद, चारबाग (चार भागों में विभाजित बगीचा), पित्त्रा ड्यूरा (अर्ध-बहुमूल्य पत्थरों की जड़ाई), मीनारें, और लाल बलुआ पत्थर/सफ़ेद संगमरमर का उपयोग। उदाहरण: ताजमहल, आगरा (1653) — शाहजहाँ का श्वेत संगमरमर मकबरा, चार कोनों पर मीनारें; हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली (1572) — भारत का पहला बाग-मकबरा, ताजमहल का अग्रदूत।


प्रश्न 4 (10 अंक — 150 शब्द): गुप्त काल के भारतीय साहित्य और कला में योगदान पर चर्चा करो। इसे "स्वर्ण युग" क्यों कहा जाता है?

आदर्श उत्तर:
गुप्त काल (320–550 ई.) को "स्वर्ण युग" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसने पूर्ववर्ती सभी भारतीय कलात्मक परंपराओं को परिष्कृत करके शाश्वत शास्त्रीय रूप दिया।

साहित्य: महान संस्कृत नाटककार कालिदास ने इसी काल में अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूत और रघुवंश की रचना की। विशाखदत्त ने मुद्राराक्षस लिखा। गणितज्ञ-खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने आर्यभटीय (499 ई.) में पृथ्वी के घूर्णन की गणना की और पाई का मान 3.1416 बताया। पंचतंत्र की कहानियाँ भी इसी युग में आकार पाईं।

कला एवं स्थापत्य: गुप्तकालीन मूर्तिकला में आदर्श शांत सौंदर्य — "गुप्त मुस्कान" — अपनी ऊँचाई पर पहुँचा। अजंता की गुफा-चित्रकारी (विशेषतः गुफा 1 का बोधिसत्त्व पद्मपाणि, लगभग 475 ई.) खनिज रंगों से बनाई गई भारतीय शास्त्रीय चित्रकला का शिखर है। नागर मंदिर शैली की नींव पड़ी — देवगढ़ का दशावतार मंदिर (लगभग 500 ई.) इसका प्रारंभिक उदाहरण है।

"स्वर्ण युग" क्यों: गांधार की हेलेनिस्टिक विदेशी छाप या इस्लाम के साथ परवर्ती संश्लेषण के विपरीत, गुप्त काल भारत की पूर्णतः स्वदेशी कलात्मकता का सर्वोत्तम प्रकटीकरण है — जो परवर्ती सभी भारतीय कला के लिए मानदंड बना।


प्रश्न 5 (10 अंक — 150 शब्द): इस दावे का मूल्यांकन करो कि मौर्य स्तंभ कला एक स्वदेशी विकास थी। इस दृष्टिकोण का समर्थन या खंडन करने वाले क्या साक्ष्य हैं?

आदर्श उत्तर:
मौर्य स्तंभ कला के स्वदेशी या अचमेनिद फ़ारसी (पर्सेपोलिस) प्रभाव पर बहस भारतीय कला इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण विवाद है।

विदेशी प्रभाव के तर्क: अशोक के स्तंभों के घंटाकार शीर्ष पर्सेपोलिस के स्तंभ शीर्षों से मिलते-जुलते हैं; अशोक के अभिलेखों में ब्राह्मी के साथ अरामाइक लिपि (अचमेनिद प्रशासनिक भाषा) का उपयोग हुआ है; मौर्य पॉलिश तकनीक फ़ारसी पत्थर-पॉलिश परंपरा से मेल खाती है; मौर्य प्रशासन पर फ़ारसी प्रभाव सांस्कृतिक उधार का संकेत देता है।

स्वदेशी उत्पत्ति के तर्क: शीर्षों पर बने पशु — सिंह, बैल, हाथी, घोड़ा — पूर्णतः भारतीय हैं, फ़ारसी नहीं। धम्म चक्र का कोई अचमेनिद समानांतर नहीं है। साँची स्तूप के तोरणों पर यक्ष-यक्षी और जातक कथाएँ पूर्णतः भारतीय हैं। गंगा के मैदान में प्रारंभिक टेराकोटा और हाथी-दाँत की अत्यधिक चमकदार कारीगरी की परंपरा मौर्य पॉलिश का पूर्वज हो सकती है।

मूल्यांकन: अधिकांश विद्वान (John Marshall, A.L. Basham) अब मिश्रित दृष्टिकोण को स्वीकार करते हैं — मौर्य कला ने फ़ारसी तकनीकी शैली (शीर्ष, पॉलिश, साम्राज्यिक पैमाना) अपनाई, किंतु अभिव्यक्ति पूर्णतः भारतीय रही। यह संश्लेषण स्वयं भारतीय संस्कृति की पहचान है — विदेशी तकनीकों को स्वदेशी अभिव्यक्ति में ढाल लेने की क्षमता।


प्रश्न 6 (5 अंक — 50 शब्द): भारतीय साहित्य में टैगोर की गीतांजलि का क्या महत्त्व है?

आदर्श उत्तर:
गीतांजलि (बांग्ला: "गीतों की अर्पण", 1910) रवींद्रनाथ टैगोर की 157 कविताओं का संग्रह है, जो भक्तिपूर्ण प्रेम, आध्यात्मिक आकांक्षा और आत्मा के परमात्मा से मिलन को अभिव्यक्त करता है। टैगोर के स्वयं के अंग्रेज़ी अनुवाद (1912) को 1913 में साहित्य का Nobel पुरस्कार मिला — इससे वे पहले एशियाई Nobel विजेता बने। इस कृति ने भारतीय आध्यात्मिक चेतना को पश्चिमी साहित्य जगत से परिचित कराया और बांग्ला साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई।