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परिचय एवं संदर्भ
यह विषय क्यों महत्त्वपूर्ण है
भारत की सांस्कृतिक विरासत सिंधु घाटी की प्रथम नगरीय सभ्यता से लेकर औपनिवेशिक काल की जटिल भारत-ब्रिटिश संश्लेषण परंपरा तक 5,000 से अधिक वर्षों में फैली हुई है। यह विरासत असम्बद्ध कालखंडों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक सतत जीवंत परंपरा है — प्रत्येक नई राजनीतिक व्यवस्था ने पूर्ववर्ती सौंदर्य-शब्दावली को आत्मसात, अनुकूलित और समृद्ध किया।
2023 की RPSC प्रश्नपत्र I में "भारतीय सभ्यता की निरंतरता" (10 अंक) और "मौर्य स्तंभ कला की स्वदेशी उत्पत्ति" (10 अंक) पर प्रश्न पूछे गए थे। इससे स्पष्ट है कि परीक्षक सभ्यतागत निरंतरता के सिद्धांत को परखते हैं, न केवल तथ्यात्मक कालक्रम को।
परीक्षा की दृष्टि से संरचनात्मक महत्त्व
विषय 12 भारतीय इतिहास के संपूर्ण विस्तार को कला, स्थापत्य, प्रदर्शन कला और साहित्य के परिप्रेक्ष्य में समेटता है। यह विषय 5 (राजस्थान कला/स्थापत्य) का "भारत" समकक्ष है।
- भाग B (विषय 12–17) समग्र रूप से इकाई I के 70 अंकों में से लगभग आधे का योगदान करता है
- विषय 12 ने अकेले 2023 में 20 अंक प्राप्त किए — इकाई I में विषय 4 के बाद एकल वर्ष में सर्वाधिक
- प्रदर्शन कला, स्थापत्य और साहित्य सभी परीक्षा में आते हैं; विशिष्ट स्मारकों पर लघु टिप्पणियाँ अपेक्षित हैं
परिधि
यह विषय सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 2600 ई.पू.) से ब्रिटिश औपनिवेशिक काल (1947 तक) तक समस्त भारत को समेटता है। इसमें शामिल हैं:
- ललित कलाएँ — मूर्तिकला, चित्रकला
- प्रदर्शन कलाएँ — संगीत, नृत्य, नाटक
- स्थापत्य — मंदिर, मस्जिद, किले, मकबरे
- साहित्य — संस्कृत, तमिल, लोकभाषाएँ, उर्दू, अंग्रेज़ी माध्यम
यह विषय जानबूझकर राजस्थान-विशिष्ट विषयवस्तु (विषय 5–10 में) और स्वतंत्रता-पश्चात सांस्कृतिक विकास को बाहर रखता है।
