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शब्दावली
| पद (HI) | परिभाषा | परीक्षा प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| अनिकोनिक | किसी देवता को मानवीय रूप की बजाय प्रतीकों (चरण-चिह्न, सिंहासन) से दर्शाना | प्रारंभिक बौद्ध कला काल जब बुद्ध को मानव रूप में नहीं दर्शाया गया था |
| मोम-लुप्त/खोया-मोम विधि | खोया-मोम ढलाई — मोम के मॉडल को मिट्टी से ढककर मोम पिघलाने के बाद पिघला धातु डाला जाता है | सिंधु घाटी की "नृत्यांगना" कांस्य मूर्ति के लिए प्रयुक्त तकनीक |
| चारबाग | जल नालियों द्वारा चार भागों में विभाजित बगीचा — फ़ारसी/मुगल उद्यान योजना | मुगल मकबरे के बगीचे: हुमायूँ का मकबरा, ताजमहल |
| कोर्बेलिंग | क्रमिक क्षैतिज परतें अंदर की ओर निकालकर पत्थर निर्माण — झूठा मेहराब बनाता है | सल्तनत-पूर्व भारतीय स्थापत्य; 1200 ई. के बाद वास्तविक मेहराब से प्रतिस्थापित |
| धम्म चक्र | धर्म का चक्र — बुद्ध के प्रथम उपदेश का बौद्ध प्रतीक; भारतीय ध्वज पर अंकित | अशोक स्तंभ, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रीय ध्वज (24-अरी चक्र) |
| गोपुरम | दक्षिण भारतीय द्रविड़ मंदिरों का विशाल अलंकृत प्रवेश-द्वार मीनार | द्रविड़ स्थापत्य पहचान चिह्न; नागर शैली से भिन्नता |
| जातक | बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ, बौद्ध उपदेशात्मक साहित्य और कला में प्रयुक्त | अजंता भित्तिचित्र, साँची स्तूप नक्काशी — मानक परीक्षा उदाहरण |
| मौर्य पॉलिश | रेत से पत्थर पर दर्पण जैसी चमक — अशोककालीन पत्थर की पहचान | मौर्यकालीन मूर्तियों और स्थापत्य की पहचान |
| लघु चित्रकला | छोटे आकार के विस्तृत चित्र, सामान्यतः कागज/कपड़े पर, मुगल और राजपूत दरबारों से जुड़े | मुगल स्कूल (हम्ज़ानामा, चित्रांकन), राजपूत स्कूल (मेवाड़, कांगड़ा) |
| नागर | उत्तर भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली — गर्भगृह के ऊपर वक्ररेखीय शिखर | खजुराहो, सोमनाथ, दिलवाड़ा मंदिर — परीक्षा के मानक उदाहरण |
| नाट्यशास्त्र | भरत मुनि (लगभग 200 ई.पू.–200 ई.) द्वारा प्रदर्शन कलाओं पर ग्रंथ — रस, नृत्य, नाट्य संहिताबद्ध | सभी 8 शास्त्रीय नृत्य रूपों का आधार; 9 रस की अवधारणा |
| नव रस | भारतीय सौंदर्यशास्त्र के नौ भावनात्मक सार: शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत, शांत | नाट्यशास्त्र — नृत्य/साहित्य प्रश्नों में परीक्षित |
| पित्त्रा ड्यूरा | संगमरमर में अर्ध-बहुमूल्य पत्थरों (लैपिस, कार्नेलियन, मैलाकाइट) की जड़ाई — मुगल सजावटी तकनीक | ताजमहल, आगरा किले के भीतरी भाग — मुगल स्थापत्य पहचान |
| पुरम | संगम परंपरा का बाह्य/वीर काव्य — युद्ध, मृत्यु, राजा और सार्वजनिक जीवन से संबंधित | संगम साहित्य वर्गीकरण; अकम (प्रेम) से विपरीत |
| राग | भारतीय शास्त्रीय संगीत में मेलोडिक ढाँचा — स्वर, विशिष्ट वाक्यांश, दिन का समय और भावनात्मक मनोदशा निर्दिष्ट | हिंदुस्तानी/कर्नाटक संगीत — मूलभूत अवधारणा |
| संगम | प्राचीन तमिलनाडु की साहित्यिक सभा; साथ ही वहाँ रचित साहित्य का संग्रह (लगभग 300 ई.पू.–300 ई.) | संगम साहित्य — भारत का प्रारंभिकतम धर्मनिरपेक्ष साहित्यिक संग्रह |
| सारनाथ | वाराणसी के निकट वह स्थल जहाँ बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया; सिंह शीर्ष का स्थान | मौर्य कला — भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का मूल स्थान |
| शिखर | नागर मंदिर स्थापत्य में गर्भगृह के ऊपर उठने वाला वक्ररेखीय मीनार | नागर शैली पहचान चिह्न; विमान (द्रविड़) से विपरीत |
| स्तूप | गुंबद-आकार का बौद्ध स्मारक, सामान्यतः बुद्ध के अवशेषों के ऊपर या तीर्थ स्थलों पर | साँची स्तूप (UNESCO 1989) — मानक परीक्षा उदाहरण |
| ताल | भारतीय शास्त्रीय संगीत में लयबद्ध चक्र, मात्राओं में मापा गया — जैसे तीनताल (16 मात्रा), एकताल (12 मात्रा) | हिंदुस्तानी/कर्नाटक संगीत — राग के साथ युग्म |
| तोरण | स्तूप या मंदिर के प्रवेश द्वार पर अलंकृत द्वार या मेहराब, विस्तृत मूर्तिकला सज्जा के साथ | साँची स्तूप तोरण (शुंग काल, 2री–1री शती ई.पू.) |
| त्रिभंग | भारतीय मूर्तिकला/नृत्य में तीन-मोड़ मुद्रा — सिर, धड़ और कूल्हे पर S-आकार | ओडिसी शास्त्रीय नृत्य; बौद्ध/जैन मूर्तिकला में भी सामान्य |
| वेसर | दक्कन की संकर मंदिर स्थापत्य शैली — नागर और द्रविड़ तत्त्वों का संयोजन | चालुक्य/होयसल स्थापत्य; दोड्डबसप्पा मंदिर, गदग |
| विमान | द्रविड़-शैली के मंदिर का पिरामिडनुमा मीनार — दक्षिण भारतीय उपयोग में संपूर्ण मंदिर संरचना को भी संदर्भित | बृहदेश्वर मंदिर विमान (66 मी.) — द्रविड़ शैली का शिखर |
