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इतिहास

त्वरित पुनरावलोकन सारणी

राजस्थानी भाषा एवं साहित्यिक कृतियाँ

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 12 / 15 0 PYQ 48 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

त्वरित पुनरावलोकन सारणी

मद विवरण वर्ष / स्रोत
राजस्थानी भाषा परिवार पश्चिमी हिंदी शाखा, भारतीय-आर्य परिवार; शौरसेनी अपभ्रंश से व्युत्पन्न ग्रियर्सन, भाषाई सर्वेक्षण, 1908
4 प्रमुख बोलियाँ मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी (जयपुरी), हाड़ौती मानक वर्गीकरण
ढूँढाड़ी उप-बोलियाँ (2023 PYQ) जयपुरी, अजमेरी (टोंकाटी तीसरी किस्म) RPSC मेन्स 2023
डिंगल साहित्यिक मारवाड़ी; चारण दरबारी परम्परा; पश्चिमी राजस्थान शास्त्रीय पदनाम
पिंगल पूर्वी साहित्यिक रूप; ब्रज भाषा-प्रभावित; मेवाड़/जयपुर शास्त्रीय पदनाम
पृथ्वीराज रासो रचनाकार: चंद बरदाई; 69 खंड; ~16,306 छंद; डिंगल रासो 12वीं–13वीं शताब्दी
कान्हड़दे प्रबंध रचनाकार: पद्मनाभ; 1455 ई.; सबसे प्रारंभिक दिनांकित पुरानी राजस्थानी आख्यान; विषय: 1311 जालोर घेराबंदी 1455 ई.
वेलि क्रिशन रुक्मिणी री रचनाकार: राठौड़ पृथ्वीराज (पीथल); लगभग 1610 ई.; "5वाँ वेद / 19वाँ पुराण"; डिंगल वेलि रूप लगभग 1610 ई.
वंश भास्कर रचनाकार: सूर्यमल्ल मिश्रण; ~20,000 छंद; सबसे लंबा राजस्थानी काव्य; विषय: बूँदी राजवंश 1842–1868 ई.
वीर सतसई रचनाकार: सूर्यमल्ल मिश्रण; 707 दोहे; ब्रज-राजस्थानी; शौर्य/देशभक्ति विषय 1850 का दशक
हम्मीर महाकाव्य रचनाकार: नयनचंद्र सूरि (जैन विद्वान); 1301 ई. रणथम्भौर घेराबंदी प्रारंभिक 15वीं शताब्दी
विश्व वल्लभ (2018 PYQ) रचनाकार: मंडलिक; संस्कृत-राजस्थानी नीतिशास्त्र; मंडोर दरबार; संस्कृत के साथ भाषा का प्रारंभिक उपयोग प्रारंभिक मध्यकाल
मुनहता नैनसी ख्यात + मारवाड़ रे परगना री विगत; जोधपुर दीवान, जसवंत सिंह I के अधीन; "राजस्थान का अबुल फजल" 1650–1670 ई.
वात (2023 PYQ) राजस्थानी में गद्य आख्यान; ऐतिहासिक/किंवदंती; मौखिक-वाचन शैली; अंतर्निहित पद्य शास्त्रीय विधा
वचनिका (2023 PYQ) अर्ध-गद्य, अर्ध-पद्य ऐतिहासिक आख्यान; गद्य = घटनाएँ, पद्य = भावनात्मक चरमोत्कर्ष शास्त्रीय विधा
रासो वीर महाकाव्य; राजपूत शासक के लिए प्रशस्ति काव्य; वंशावली + युद्ध; चारण परम्परा शास्त्रीय विधा
चारण समुदाय वंशानुगत दरबारी कवि-इतिहासकार; अर्ध-दैवीय दर्जा; राजपूत वंशावली के संरक्षक मध्यकालीन संस्था
जयपुर, जैसलमेर पांडुलिपि संग्रह राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर (40,000+ पांडुलिपियाँ); जैसलमेर जैन भंडार (3,000+ ताड़पत्र) सक्रिय पुरालेखागार
रूपायन संस्थान स्थापना 1960, बोरुंदा (जोधपुर); संस्थापक: विजयदान देथा + कोमल कोठारी; 15,000+ लोकगीत पुरालेखित 1960, बोरुंदा
विजयदान देथा "बिज्जी" 1926–2013; बातां री फुलवारी (14 खंड, 800+ लोककथाएँ); साहित्य अकादमी पुरस्कार 1974; पद्मश्री 2007 20वीं–21वीं शताब्दी
कोमल कोठारी 1929–2004; रूपायन सह-संस्थापक; पद्म भूषण 2004; लोक-संगीतशास्त्री 20वीं–21वीं शताब्दी
कन्हैयालाल सेठिया 1919–2008; "धरती धोरां री" (1951) — राजस्थानी का समकक्ष राष्ट्रगान 20वीं शताब्दी
राजस्थान साहित्य अकादमी स्थापना 1958, उदयपुर; मधुमती प्रकाशित करती है; मीरा पुरस्कार प्रदान करती है 1958
8वीं अनुसूची माँग वर्तमान में 22 भाषाएँ सूचीबद्ध; राजस्थानी के 8 करोड़ वक्ता; विधान सभा प्रस्ताव 2003; पाटासकर समिति सिफारिश 2015 2003 / 2015
92वाँ संविधान संशोधन बोडो, डोगरी, मैथिली, संताली जोड़ी गईं — राजस्थानी बाहर 2003
राजस्थानी वक्ता कुल ~8 करोड़ (जनगणना 2011); भारत की छठी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा जनगणना 2011