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इतिहास

आदर्श उत्तर रूपरेखा

राजस्थानी भाषा एवं साहित्यिक कृतियाँ

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 11 / 15 0 PYQ 48 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

आदर्श उत्तर रूपरेखा

5-अंक उत्तर रूपरेखा A: विधा परिभाषा (50 शब्द)

प्रश्न (2023 PYQ पर आधारित): राजस्थानी साहित्य के संदर्भ में वात और वचनिका शब्दों की व्याख्या कीजिए।

आदर्श उत्तर:

वात राजस्थानी में लघु गद्य आख्यान है जो ऐतिहासिक या किंवदंती घटनाओं पर आधारित होता है; इसमें मौखिक वाचन शैली और अंतर्निहित पद होते हैं जो वंशावली और नैतिक सूक्तियाँ संप्रेषित करते हैं। वचनिका अर्ध-गद्य, अर्ध-पद्य ऐतिहासिक आख्यान है — गद्य घटनाओं का, पद्य भावनात्मक चरमोत्कर्ष का वर्णन करता है। मुनहता नैनसी के वृत्तांत वचनिका परम्परा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। दोनों राजस्थानी साहित्यिक विरासत की मौलिक विधाएँ हैं।

शब्द संख्या: ~52 शब्द। संरचना: शब्द 1 परिभाषा + कार्य → शब्द 2 परिभाषा + उदाहरण → साझा महत्त्व।


5-अंक उत्तर रूपरेखा B: विशिष्ट ग्रंथ (50 शब्द)

प्रश्न (2018 PYQ शैली पर आधारित): वेलि क्रिशन रुक्मिणी री का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

आदर्श उत्तर:

वेलि क्रिशन रुक्मिणी री राठौड़ पृथ्वीराज (पीथल) द्वारा लगभग 1610 ई. में रचित डिंगल गीतिकाव्य महाकाव्य है। यह कविट्ट छंद में वेलि काव्य रूप का उपयोग करते हुए कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का आख्यान करती है। समकालीनों ने इसे "5वाँ वेद" और "19वाँ पुराण" कहा। यह मारवाड़ के दरबारी परम्परा में डिंगल साहित्य का शीर्ष प्रतिनिधित्व करती है।

शब्द संख्या: ~53 शब्द। संरचना: शीर्षक + रचनाकार + तिथि + विधा → सामग्री सारांश → समकालीन ग्रहण → महत्त्व।


10-अंक उत्तर रूपरेखा: चारण साहित्य (150 शब्द)

प्रश्न (2021 PYQ, शब्दशः): राजस्थान के शास्त्रीय साहित्य में चारण साहित्य के महत्त्व की परीक्षा कीजिए।

आदर्श उत्तर:

परिचय: चारण साहित्य, डिंगल (साहित्यिक मारवाड़ी) में वंशानुगत दरबारी कवियों द्वारा रचित, 12वीं शताब्दी से राजस्थानी शास्त्रीय साहित्यिक परम्परा की रीढ़ है।

प्रमुख बिंदु:

  1. ऐतिहासिक अभिलेख: चारण ख्यातें — विशेषत: मुनहता नैनसी की ख्यात (1650-1670 ई.) — राजपूत वंश इतिहास के प्राथमिक स्रोत हैं; नैनसी को "राजस्थान का अबुल फजल" कहते हैं।
  2. साहित्यिक विकास: चारण कवियों ने रासो, वचनिका, वेलि और बिरुद विधाएँ बनाईं और मानकीकृत कीं; राठौड़ पृथ्वीराज की वेलि क्रिशन रुक्मिणी री (लगभग 1610 ई.) को "5वाँ वेद" कहा जाता है।
  3. भाषा संरक्षण: डिंगल ग्रंथ पुरानी राजस्थानी की शब्द-संपदा और व्याकरण संरक्षित करते हैं; राजस्थान राज्य अभिलेखागार में 40,000+ डिंगल पांडुलिपियाँ हैं।
  4. सीमा: राजाश्रय के कारण स्तुतिपरक पूर्वाग्रह — पराजय और विफलताएँ व्यवस्थित रूप से कम दर्शाई गई हैं।

निष्कर्ष: स्तुतिपरक सीमाओं के बावजूद, चारण ग्रंथ राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास पुनर्निर्माण के लिए अपरिहार्य हैं और एक विशिष्ट राजस्थानी साहित्यिक पहचान को संरक्षित करते हैं।

शब्द संख्या: ~152 शब्द।


5-अंक उत्तर रूपरेखा C: 8वीं अनुसूची (50 शब्द)

प्रश्न (2026 के लिए पूर्वानुमानित): भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में राजस्थानी को शामिल किए जाने की माँग क्या है? इसकी वर्तमान स्थिति बताइए।

आदर्श उत्तर:

लगभग 8 करोड़ वक्ताओं वाली राजस्थानी भाषा 8वीं अनुसूची (वर्तमान में 22 भाषाएँ) में शामिल होने की माँग करती है। राजस्थान विधानसभा ने 2003 में सर्वसम्मति से इसके समर्थन में प्रस्ताव पारित किया। पाटासकर समिति ने शामिल करने की सिफारिश की, किंतु संसद ने संशोधन विधेयक पारित नहीं किया। 2026 तक माँग सक्रिय है।

शब्द संख्या: ~49 शब्द।