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मुख्य बिंदु
Rajasthani Language Classification
- राजस्थानी भाषा पश्चिमी हिंदी की शाखा है
- इसकी 4 प्रमुख बोलियाँ हैं: मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी और हाड़ौती
- 8+ उप-बोलियाँ भी हैं जिनमें शेखावाटी, वागड़ी, मेवाती, अहीरवाटी शामिल हैं
Dingal and Pingal — Literary Forms
- Dingal (डिंगल): literary form of Marwari, used by Charan court poets in Rajput kingdoms
- Pingal (पिंगल): eastern literary form influenced by Braj Bhasha, used in Mewar and eastern Rajputana
- डिंगल मारवाड़ी का साहित्यिक रूप है जिसे चारण कवि राजपूत दरबारों में प्रयोग करते थे
- पिंगल पूर्वी साहित्यिक रूप है जो ब्रजभाषा से प्रभावित है और मेवाड़ व पूर्वी राजपूताने में प्रचलित था
- दोनों रूप शब्द-भंडार, छंद और विषयवस्तु में भिन्न हैं
Prithviraj Raso
- Written by Chand Bardai (चंद बरदाई), court poet of Prithviraj III Chahamana
- चंद बरदाई द्वारा रचित; पृथ्वीराज III चाहमान के दरबारी कवि थे
- मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य का प्रथम महाकाव्य माना जाता है
- 12वीं शताब्दी के पृथ्वीराज तृतीय के जीवन — युद्ध, प्रणय और वंशावली — का वर्णन करता है
Veli Krishan Rukmini ri
- Composed by Rathore Prithviraj (पृथ्वीराज राठौड़) around 1610 CE
- रठौड़ पृथ्वीराज द्वारा लगभग 1610 ई. में रचित
- समकालीन कवियों ने इसे "पाँचवाँ वेद" और "19वाँ पुराण" कहा
- डिंगल काव्य का उत्कृष्ट उदाहरण है
Vamsh Bhaskar and Veer Satsai
- Written by Surya Mal Mishran (सूर्यमल्ल मिश्रण, 1815–1868)
- सूर्यमल्ल मिश्रण (1815–1868) द्वारा रचित
- वंश भास्कर: राजस्थानी साहित्य का सबसे दीर्घ काव्य-ग्रंथ (~20,000 पद), बूँदी राजवंश का इतिहास
- वीर सतसई: 707 दोहों की ब्रज-राजस्थानी रचना, वीर भावना से ओतप्रोत
Kanhad De Prabandh
- Written by Padmanabha (पद्मनाभ) in 1455 CE
- पद्मनाभ द्वारा 1455 ई. में रचित
- प्राचीन राजस्थानी की सबसे प्रारंभिक उपलब्ध कथात्मक कविता है
- 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण और जालोर के कान्हड़दे सोनिगरा के प्रतिरोध का वर्णन
Charan Literature Tradition
- चारण राजपूत राजदरबारों में वंशानुगत कवि-इतिहासकार होते थे
- वे अपने संरक्षक राज्यों की वंशावली और मौखिक इतिहास के संरक्षक थे
- उनके डिंगल काव्य में युद्ध-विवरण, प्रशस्तियाँ और नीतिवचन संरक्षित हैं
Unique Literary Genres of Rajasthani
- Vat (वात): prose narrative; Vachnika (वचनिका): semi-prose historical narrative
- Raso (रासो): martial epic; Dingal Kavya (डिंगल काव्य): Dingal verse
- Veli (वेलि): lyrical form — all five are unique to Rajasthani literary tradition
- वात: गद्य आख्यान; वचनिका: अर्ध-गद्य ऐतिहासिक आख्यान
- रासो: वीर महाकाव्य; डिंगल काव्य: डिंगल पद्य रचना
- वेलि: गीतिकाव्य — ये पाँचों विधाएँ राजस्थानी साहित्य की मौलिक विशेषता हैं
Jain Literary Contribution
- Hemachandra (हेमचंद्र, 1089–1173 CE) standardised Old Gujarati-Rajasthani grammar in Apabhramsha Vyakarana
- जैन साहित्य ने प्राकृत, संस्कृत और पुरानी राजस्थानी रचनाओं से भाषा को समृद्ध किया
- हेमचंद्र (1089–1173 ई.) ने अपभ्रंश व्याकरण में पुरानी गुजराती-राजस्थानी व्याकरण का मानकीकरण किया
- यद्यपि वे गुजरात के विद्वान थे, उनका कार्य प्रारंभिक राजस्थानी के लिए आधारभूत है
Vijay Dan Detha "Bijji"
- Vijay Dan Detha (विजयदान देथा, 1926–2013): most celebrated figure of modern Rajasthani literature
- Batan ri Phulwari (बातां री फुलवारी): 14-volume anthology of 800+ Rajasthani folk tales
- विजयदान देथा 'बिज्जी' (1926–2013) आधुनिक राजस्थानी साहित्य के सर्वोच्च कवि-कथाकार हैं
- बातां री फुलवारी: 14 खंडों में 800+ लोककथाओं का अनुपम संग्रह
- नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित; साहित्य अकादमी पुरस्कार (1974) और पद्मश्री (2007) प्राप्त
- Komal Kothari and Rupayan Sansthan
- Komal Kothari (कोमल कोठारी, 1929–2004): foremost ethnomusicologist of Rajasthan
- Co-founded Rupayan Sansthan (रूपायन संस्थान, Borunda, 1960) with Vijay Dan Detha
- कोमल कोठारी (1929–2004) राजस्थान के सर्वप्रमुख लोक-संगीतशास्त्री थे
- विजयदान देथा के साथ 1960 में रूपायन संस्थान (बोरुंदा) की सह-स्थापना की
- संस्थान में 15,000+ लोकगीत और 500+ वाद्ययंत्र रिकॉर्डिंग संरक्षित हैं
- Rajasthani Speakers and 8th Schedule
- जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 8 करोड़ मातृभाषी
- मातृभाषियों की दृष्टि से भारत की छठी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा
- संविधान की 8वीं अनुसूची में अभी तक शामिल नहीं; माँग 1950 के दशक से जारी, 2026 तक अनसुलझी
- Rajasthan Assembly Resolution 2003
- राजस्थान विधानसभा ने 2003 में एकमत से प्रस्ताव पारित किया
- पटासकर समिति सहित अनेक समितियों ने शामिल करने की सिफारिश की
- 2026 तक संसद ने इन सिफारिशों पर कोई कदम नहीं उठाया
- Rajasthan Sahitya Academy
- Administers the Meera Award (मीरा पुरस्कार) and Sumitraanandan Pant Award
- Publishes Madhumati (मधुमती) literary journal
- राजस्थान सरकार द्वारा 1958 में उदयपुर में स्थापित
- मीरा पुरस्कार और सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार प्रदान करती है
- साहित्यिक पत्रिका मधुमती का प्रकाशन करती है
