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इतिहास

मुख्य बिंदु

राजस्थानी भाषा एवं साहित्यिक कृतियाँ

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 1 / 15 0 PYQ 48 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

  1. Rajasthani Language Classification

    • राजस्थानी भाषा पश्चिमी हिंदी की शाखा है
    • इसकी 4 प्रमुख बोलियाँ हैं: मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी और हाड़ौती
    • 8+ उप-बोलियाँ भी हैं जिनमें शेखावाटी, वागड़ी, मेवाती, अहीरवाटी शामिल हैं
  2. Dingal and Pingal — Literary Forms

    • Dingal (डिंगल): literary form of Marwari, used by Charan court poets in Rajput kingdoms
    • Pingal (पिंगल): eastern literary form influenced by Braj Bhasha, used in Mewar and eastern Rajputana
    • डिंगल मारवाड़ी का साहित्यिक रूप है जिसे चारण कवि राजपूत दरबारों में प्रयोग करते थे
    • पिंगल पूर्वी साहित्यिक रूप है जो ब्रजभाषा से प्रभावित है और मेवाड़ व पूर्वी राजपूताने में प्रचलित था
    • दोनों रूप शब्द-भंडार, छंद और विषयवस्तु में भिन्न हैं
  3. Prithviraj Raso

    • Written by Chand Bardai (चंद बरदाई), court poet of Prithviraj III Chahamana
    • चंद बरदाई द्वारा रचित; पृथ्वीराज III चाहमान के दरबारी कवि थे
    • मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य का प्रथम महाकाव्य माना जाता है
    • 12वीं शताब्दी के पृथ्वीराज तृतीय के जीवन — युद्ध, प्रणय और वंशावली — का वर्णन करता है
  4. Veli Krishan Rukmini ri

    • Composed by Rathore Prithviraj (पृथ्वीराज राठौड़) around 1610 CE
    • रठौड़ पृथ्वीराज द्वारा लगभग 1610 ई. में रचित
    • समकालीन कवियों ने इसे "पाँचवाँ वेद" और "19वाँ पुराण" कहा
    • डिंगल काव्य का उत्कृष्ट उदाहरण है
  5. Vamsh Bhaskar and Veer Satsai

    • Written by Surya Mal Mishran (सूर्यमल्ल मिश्रण, 1815–1868)
    • सूर्यमल्ल मिश्रण (1815–1868) द्वारा रचित
    • वंश भास्कर: राजस्थानी साहित्य का सबसे दीर्घ काव्य-ग्रंथ (~20,000 पद), बूँदी राजवंश का इतिहास
    • वीर सतसई: 707 दोहों की ब्रज-राजस्थानी रचना, वीर भावना से ओतप्रोत
  6. Kanhad De Prabandh

    • Written by Padmanabha (पद्मनाभ) in 1455 CE
    • पद्मनाभ द्वारा 1455 ई. में रचित
    • प्राचीन राजस्थानी की सबसे प्रारंभिक उपलब्ध कथात्मक कविता है
    • 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण और जालोर के कान्हड़दे सोनिगरा के प्रतिरोध का वर्णन
  7. Charan Literature Tradition

    • चारण राजपूत राजदरबारों में वंशानुगत कवि-इतिहासकार होते थे
    • वे अपने संरक्षक राज्यों की वंशावली और मौखिक इतिहास के संरक्षक थे
    • उनके डिंगल काव्य में युद्ध-विवरण, प्रशस्तियाँ और नीतिवचन संरक्षित हैं
  8. Unique Literary Genres of Rajasthani

    • Vat (वात): prose narrative; Vachnika (वचनिका): semi-prose historical narrative
    • Raso (रासो): martial epic; Dingal Kavya (डिंगल काव्य): Dingal verse
    • Veli (वेलि): lyrical form — all five are unique to Rajasthani literary tradition
    • वात: गद्य आख्यान; वचनिका: अर्ध-गद्य ऐतिहासिक आख्यान
    • रासो: वीर महाकाव्य; डिंगल काव्य: डिंगल पद्य रचना
    • वेलि: गीतिकाव्य — ये पाँचों विधाएँ राजस्थानी साहित्य की मौलिक विशेषता हैं
  9. Jain Literary Contribution

    • Hemachandra (हेमचंद्र, 1089–1173 CE) standardised Old Gujarati-Rajasthani grammar in Apabhramsha Vyakarana
    • जैन साहित्य ने प्राकृत, संस्कृत और पुरानी राजस्थानी रचनाओं से भाषा को समृद्ध किया
    • हेमचंद्र (1089–1173 ई.) ने अपभ्रंश व्याकरण में पुरानी गुजराती-राजस्थानी व्याकरण का मानकीकरण किया
    • यद्यपि वे गुजरात के विद्वान थे, उनका कार्य प्रारंभिक राजस्थानी के लिए आधारभूत है
  10. Vijay Dan Detha "Bijji"

  • Vijay Dan Detha (विजयदान देथा, 1926–2013): most celebrated figure of modern Rajasthani literature
  • Batan ri Phulwari (बातां री फुलवारी): 14-volume anthology of 800+ Rajasthani folk tales
  • विजयदान देथा 'बिज्जी' (1926–2013) आधुनिक राजस्थानी साहित्य के सर्वोच्च कवि-कथाकार हैं
  • बातां री फुलवारी: 14 खंडों में 800+ लोककथाओं का अनुपम संग्रह
  • नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित; साहित्य अकादमी पुरस्कार (1974) और पद्मश्री (2007) प्राप्त
  1. Komal Kothari and Rupayan Sansthan
  • Komal Kothari (कोमल कोठारी, 1929–2004): foremost ethnomusicologist of Rajasthan
  • Co-founded Rupayan Sansthan (रूपायन संस्थान, Borunda, 1960) with Vijay Dan Detha
  • कोमल कोठारी (1929–2004) राजस्थान के सर्वप्रमुख लोक-संगीतशास्त्री थे
  • विजयदान देथा के साथ 1960 में रूपायन संस्थान (बोरुंदा) की सह-स्थापना की
  • संस्थान में 15,000+ लोकगीत और 500+ वाद्ययंत्र रिकॉर्डिंग संरक्षित हैं
  1. Rajasthani Speakers and 8th Schedule
  • जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 8 करोड़ मातृभाषी
  • मातृभाषियों की दृष्टि से भारत की छठी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा
  • संविधान की 8वीं अनुसूची में अभी तक शामिल नहीं; माँग 1950 के दशक से जारी, 2026 तक अनसुलझी
  1. Rajasthan Assembly Resolution 2003
  • राजस्थान विधानसभा ने 2003 में एकमत से प्रस्ताव पारित किया
  • पटासकर समिति सहित अनेक समितियों ने शामिल करने की सिफारिश की
  • 2026 तक संसद ने इन सिफारिशों पर कोई कदम नहीं उठाया
  1. Rajasthan Sahitya Academy
  • Administers the Meera Award (मीरा पुरस्कार) and Sumitraanandan Pant Award
  • Publishes Madhumati (मधुमती) literary journal
  • राजस्थान सरकार द्वारा 1958 में उदयपुर में स्थापित
  • मीरा पुरस्कार और सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार प्रदान करती है
  • साहित्यिक पत्रिका मधुमती का प्रकाशन करती है