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परिचय एवं पाठ्यक्रम
इस विषय का दायरा
यह विषय राजस्थानी भाषा के भाषाई वर्गीकरण और बोली-संरचना, 12वीं शताब्दी से राजस्थानी दरबारों में विकसित प्रमुख साहित्यिक परम्पराओं और विधाओं, प्रमुख साहित्यिक कृतियों और उनके ऐतिहासिक महत्त्व, तथा भाषा की समकालीन स्थिति — जिसमें 8वीं अनुसूची मान्यता आंदोलन शामिल है — को समेटता है।
RPSC 2026 पाठ्यक्रम इसे प्रश्नपत्र I, इकाई 1 (इतिहास), भाग A के अंतर्गत रखता है — यह मानते हुए कि राजस्थानी साहित्यिक परम्परा राजस्थान के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास से अविभाज्य है। दायरा पूर्णतः राजस्थान-केन्द्रित है: सामान्य पुरानी हिंदी या संस्कृत साहित्य इतिहास तब तक परिधि से बाहर है जब तक वह राजस्थानी साहित्यिक विकास से सीधे संबद्ध न हो।
PYQ प्रवृत्ति एवं परीक्षा महत्त्व
PYQ प्रवृत्ति विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि यह विषय तेजी से महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है: 2013 और 2016 में शून्य अंक, 2018 में 5 अंक (2-अंक का विश्व वल्लभ प्रश्न), 2021 में 10 अंक (चारण साहित्य निबंध), और 2023 में 7 अंक (बोली पहचान + वात/वचनिका व्याख्या)। तीन परीक्षाओं में कुल 22 अंक और बढ़ती प्रश्न जटिलता यह संकेत देती है कि 2026 में प्रमुख कृतियों, डिंगल-पिंगल भेद या 8वीं अनुसूची माँग पर विश्लेषणात्मक 10-अंक प्रश्न पूछे जाने की प्रबल संभावना है।
दायरे की सीमाएँ
यहाँ जो विषय शामिल हैं:
- भाषा-संरचना और औपचारिक साहित्यिक उत्पादन
जो विषय अन्य टॉपिक में हैं:
- लोक मौखिक साहित्य (दोहे, भजन, लोकगीत) → टॉपिक #6
- मीराबाई और कबीर जैसे धार्मिक संत-कवि → टॉपिक #11
- स्थापत्य और दृश्य कला संरक्षण → टॉपिक #5
- शासकों की राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियाँ → टॉपिक #2
