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समसामयिकी संबंध
हालिया घटनाक्रम
राजस्थान नगर नामकरण पहल (मार्च 2026): राजस्थान सरकार ने राज्य भर के कई नगरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित करने की घोषणा की — औपनिवेशिक प्रशासन के दौरान अंग्रेजीकृत या प्रशासनिक रूप से सरलीकृत नाम पाने वाली बस्तियों को उनके मूल राजस्थानी-भाषा के नाम लौटाए जाएँगे। इस पहल का राजस्थानी भाषाई पहचान की राजनीति से सीधा संबंध है। समर्थकों का तर्क है कि मूल राजस्थानी रूप में स्थान-नाम जीवित भाषाई विरासत का हिस्सा हैं और उनकी पुनर्स्थापना व्यापक 8वीं अनुसूची मान्यता आंदोलन का समर्थन करती है।
ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026: राजस्थान सरकार ने ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026 आयोजित किया जिसमें आदिवासी प्रदर्शन कलाएँ, मौखिक साहित्य (मुख्यत: वागड़ी और अन्य आदिवासी राजस्थानी बोलियों में) और लोक संगीत परम्पराएँ प्रदर्शित हुईं। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से भील मौखिक आख्यान परम्पराएँ शामिल थीं — जिनमें से कई केवल वागड़ी (राजस्थानी उप-बोली) में मौजूद हैं और लिखित रूप में संकलित नहीं हुई हैं। रूपायन संस्थान ने लोक प्रदर्शनों की पुरालेखीय रिकॉर्डिंग के साथ भाग लिया।
8वीं अनुसूची आंदोलन — 2025–26: राजस्थानी भाषा मान्यता समिति सहित नागरिक समाज संगठनों ने RPSC 2026 पाठ्यक्रम जारी होने से पहले अभियान तेज किया, भाषाई पहचान के संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 29) के ढाँचे में भाषा मान्यता माँग को रखते हुए। अप्रैल 2026 तक संसद में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जैसलमेर पांडुलिपि डिजिटीकरण परियोजना (2024–26): भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NAMAMI) ने जैसलमेर जैन भंडार संग्रह के डिजिटीकरण का चरण 1 पूर्ण किया — राजस्थानी-भाषा पांडुलिपियों तक डिजिटल पहुँच तैयार की जो पहले केवल जैसलमेर जाने वाले विद्वानों के लिए उपलब्ध थी। चरण 1 में लगभग 800 पांडुलिपियाँ डिजिटीकृत हुईं।
समसामयिक घटनाओं से संभावित परीक्षा प्रश्न
संभावित प्रश्न: राजस्थान सरकार की ऐतिहासिक नगर नामकरण पहल का राजस्थानी भाषाई पहचान के लिए क्या महत्त्व है?
उत्तर संकेत: स्थान-नामों में राजस्थानी मौखिक-साहित्यिक परम्पराओं का संबंध; ऐतिहासिक राजस्थानी टोपोनिम बनाम औपनिवेशिक अंग्रेजीकरण; 8वीं अनुसूची माँग से संबंध; सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और प्रशासनिक व्यावहारिकता में संतुलन।संभावित प्रश्न: भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में राजस्थानी की शामिलगी की माँग की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर संकेत: 8वीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएँ; राजस्थानी के ~8 करोड़ वक्ता (जनगणना 2011); विधान सभा सर्वसम्मति प्रस्ताव 2003; पाटासकर समिति सिफारिश 2015; 92वाँ संशोधन (2003) ने 4 भाषाएँ जोड़ीं किंतु राजस्थानी बाहर; संसद ने कार्रवाई नहीं की; अनुच्छेद 29 भाषाई सुरक्षा प्रदान करता है लेकिन अनुसूची शामिलगी को अधिकार नहीं मानता।संभावित प्रश्न: रूपायन संस्थान राजस्थानी मौखिक साहित्यिक परम्परा के संरक्षण में कैसे योगदान करता है?
उत्तर संकेत: स्थापना 1960, बोरुंदा; विजयदान देथा और कोमल कोठारी; 15,000+ लोकगीत; 500+ वाद्ययंत्र रिकॉर्डिंग; वात मौखिक परम्परा का दस्तावेजीकरण; बातां री फुलवारी पुरालेखीय क्षेत्र-कार्य का साहित्यिक आउटपुट।
टॉपिक 10 में से 138 | प्रश्नपत्र I, इकाई 1 — इतिहास | निर्मित: 2026-04-06
