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इतिहास

प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ एवं रचनाकार

राजस्थानी भाषा एवं साहित्यिक कृतियाँ

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 5 / 15 0 PYQ 48 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ एवं रचनाकार

कान्हड़दे प्रबंध

पद्मनाभ द्वारा 1455 ई. में रचित कान्हड़दे प्रबंध पुरानी राजस्थानी की सबसे प्रारंभिक उपलब्ध आख्यान कविता है जिसकी रचना-तिथि विश्वसनीय रूप से स्थापित है। इसका ऐतिहासिक महत्त्व तीन स्तरों पर है:

  1. साहित्यिक: शुद्ध पुरानी राजस्थानी (अपभ्रंश-व्युत्पन्न) में लिखित; यह मध्यकालीन भाषा के शब्द-भंडार, व्याकरण और काव्यशास्त्र के अध्ययन के लिए आधारभूत ग्रंथ है।
  2. ऐतिहासिक: यह 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर द्वारा जालोर पर आक्रमण और कान्हड़दे सोनिगरा (जालोर के चाहमान शासक) के वीरतापूर्ण प्रतिरोध का वर्णन करता है।
  3. सांस्कृतिक: यह राजपूत वीर-नैतिकता, धर्म-युद्ध की परम्परा और राजपूत महिलाओं द्वारा जौहर की प्रथा को संरक्षित करता है।

हम्मीर महाकाव्य

नयनचंद्र सूरि (जैन विद्वान) द्वारा रचित हम्मीर महाकाव्य प्रारंभिक 15वीं शताब्दी का संस्कृत-राजस्थानी द्विभाषी ग्रंथ है। यह हम्मीर देव चाहमान का वर्णन करता है — रणथम्भौर के अंतिम स्वतंत्र शासक, जो 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के हाथों पराजित और मारे गए।

यह ग्रंथ महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसे एक जैन दरबारी विद्वान (चारण नहीं) ने लिखा, जो दर्शाता है कि जैन बौद्धिक समुदायों ने भी राजपूताना की साहित्यिक परम्परा में योगदान दिया।

पद्मावत

मलिक मुहम्मद जायसी (1477–1542 ई.) की पद्मावत तकनीकी रूप से अवधी में लिखी गई है, राजस्थानी में नहीं। तथापि, यह इस विषय में स्थान पाती है क्योंकि:

  • यह पूरी तरह राजस्थान (चित्तौड़गढ़) में स्थापित है
  • यह रानी पद्मिनी और मेवाड़ की रानी पद्मावती के बारे में राजस्थानी मौखिक परम्पराओं पर आधारित है
  • अलाउद्दीन खिलजी के घेरे (1303 ई.) की पृष्ठभूमि राजस्थानी इतिहास है
  • RPSC ने पूर्व में राजस्थानी सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में पद्मावत का परीक्षण किया है

यह काव्य 57 खंडों का सूफी रूपक महाकाव्य है (1540 ई.)। रतन सेन की पद्मावती की खोज की कहानी आत्मा की परमेश्वर की ओर यात्रा का रूपक है। यह पुरानी हिंदी/अवधी सूफी काव्य के पाँच महान प्रेमाख्यानों में से एक मानी जाती है।

वंश भास्कर

सूर्यमल्ल मिश्रण (1815–1868 ई.), बूँदी के महाराव राम सिंह II के दरबारी कवि, ने वंश भास्कर की रचना की — मिश्रित राजस्थानी-ब्रज में एक स्मारकीय काव्य-वृत्तांत। लगभग 20,000 छंदों में यह राजस्थानी साहित्यिक परम्परा का सबसे दीर्घ काव्य ग्रंथ है।

सूर्यमल्ल मिश्रण ने 1842 ई. में इसे आरम्भ किया और अपनी मृत्यु तक लिखते रहे; उनके शिष्य मुरारी दान ने अधूरे अंशों को पूर्ण किया।

वीर सतसई सूर्यमल्ल मिश्रण की अन्य प्रमुख रचना है — ब्रज में 707 दोहे राजपूत शौर्य के विषय पर। यह उस समय की रचना है (1850 के दशक) जब ब्रिटिश-विरोधी भावना उभर रही थी।

विश्व वल्लभ — 2018 PYQ

RPSC मेन्स 2018 में विशेष रूप से पूछा गया (2 अंक): "विश्व वल्लभ ग्रंथ का संक्षेप में वर्णन कीजिए।"

विश्व वल्लभ मंडलिक (मण्डलिक) द्वारा रचित एक संस्कृत-राजस्थानी विश्वकोशीय ग्रंथ है जिसे मंडोर (मारवाड़) के शासकों के दरबार में प्रारंभिक मध्यकाल में लिखा गया। यह एक नीतिशास्त्र ग्रंथ है जो शासन और नैतिक आचरण पर संस्कृत दार्शनिक सूक्तियों को राजस्थानी लोक टिप्पणी के साथ जोड़ता है। इसका महत्त्व संस्कृत के साथ राजस्थानी भाषा के प्रारंभिक उपयोग में है, जो दर्शाता है कि यह भाषा गंभीर बौद्धिक सामग्री की वाहिका के रूप में वैधता प्राप्त कर रही थी।