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इतिहास

पर्यटन परिपथ

राजस्थान में विरासत स्थल एवं पर्यटन

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 5 / 15 0 PYQ 41 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

पर्यटन परिपथ

पर्यटन परिपथ की अवधारणा

एक पर्यटन परिपथ कई गंतव्यों को जोड़ता है जिन्हें एक पर्यटक एक ही यात्रा में देखता है, जिससे प्रति-आकर्षण विपणन लागत कम होती है और औसत प्रवास अवधि बढ़ती है। राजस्थान का परिपथ दृष्टिकोण पर्यटन मंत्रालय की PRASHAD और स्वदेश दर्शन योजनाओं से उभरा, जो परिपथ अवसंरचना — संकेत-पट्टिकाएँ, व्याख्या केंद्र और अंतिम-मील संपर्क — को निधि देती हैं।

चार प्रमुख परिपथ

1. मरु परिपथ

  • क्षेत्र: जैसलमेर – बीकानेर – बाड़मेर – नागौर
  • मुख्य आकर्षण: जैसलमेर दुर्ग (UNESCO); सैम रेत के टीले; ऊँट सफारी मार्ग
  • विशिष्ट तत्त्व: भारत का एकमात्र रेगिस्तान-आधारित सांस्कृतिक परिपथ
  • RTDC अवसंरचना: मूमल टूरिस्ट बंगला श्रृंखला; RTDC द्वारा लाइसेंस प्राप्त ऊँट सफारी संचालक
  • पर्यटन नोट: जैसलमेर के जीवित दुर्ग में लगभग 3,000 निवासी हैं और प्रतिवर्ष 4 लाख+ पर्यटक आते हैं; वहन क्षमता की चिंता एक आवर्ती संरक्षण मुद्दा है।

2. मेवाड़ परिपथ

  • क्षेत्र: उदयपुर – चित्तौड़गढ़ – कुम्भलगढ़ – राजसमंद – नाथद्वारा
  • मुख्य आकर्षण: झीलों का शहर (उदयपुर); चित्तौड़गढ़ दुर्ग (UNESCO); राणकपुर मंदिर
  • धार्मिक उप-परिपथ: नाथद्वारा (श्री नाथजी मंदिर, चढ़ावे में भारत के सबसे धनी मंदिरों में से एक) प्रतिवर्ष 20 लाख+ तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है।
  • मेवाड़ अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव (गणगौर, मार्च-अप्रैल) RTDC द्वारा समन्वित एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है।

3. हाड़ौती परिपथ

  • क्षेत्र: कोटा – बूँदी – बारां – झालावाड़
  • मुख्य आकर्षण: बूँदी की बावड़ियाँ और चित्रित महल; गागरोन दुर्ग (UNESCO); रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (राजस्थान में चौथा)
  • सांस्कृतिक पहचान: हाड़ौती चित्रकला परम्परा, बूँदी लघुचित्र; बावड़ी स्थापत्य (रानी जी की बावड़ी)
  • कम पर्यटित: UNESCO सूचीबद्धता (गागरोन) के बावजूद हाड़ौती परिपथ में चारों में सबसे कम पर्यटक आते हैं — यह परीक्षा-प्रासंगिक संरक्षण बनाम विकास तनाव है।

4. शेखावाटी परिपथ

  • क्षेत्र: झुंझुनू – सीकर – चुरू – नवलगढ़ – मंडावा – फतेहपुर
  • मुख्य आकर्षण: खुली वायु भित्तिचित्र हवेलियाँ — मारवाड़ी व्यापारियों द्वारा 18वीं-19वीं शताब्दी में निर्मित 1,000+ चित्रित मकान
  • UNESCO सम्भावना: चित्रित हवेलियों के क्रमिक नामांकन के रूप में अनंतिम सूची में मूल्यांकनाधीन
  • संरक्षण संकट: अधिकांश हवेलियाँ निजी स्वामित्व में हैं और मालिक अनुपस्थित हैं; अनुमानतः 200+ हवेलियाँ गम्भीर क्षरण में हैं (ASI-राजस्थान राज्य सर्वेक्षण, 2022)

अतिरिक्त परिपथ

स्वदेश दर्शन योजना के तहत पर्यटन मंत्रालय राजस्थान में विषयगत परिपथ भी नामित करता है:

परिपथ का नाम प्रमुख गंतव्य किसके तहत स्वीकृत
जनजातीय परिपथ डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ स्वदेश दर्शन 1.0
ग्रामीण परिपथ बाड़मेर शिल्प गाँव, साँभर झील स्वदेश दर्शन 2.0
आध्यात्मिक परिपथ पुष्कर-अजमेर-नाथद्वारा-राणकपुर PRASHAD + स्वदेश दर्शन
इको-पर्यटन परिपथ रणथम्भौर-सरिस्का-भरतपुर-केवलादेव इको-पर्यटन नीति 2021

स्रोत: पर्यटन मंत्रालय, स्वदेश दर्शन योजना कार्यान्वयन रिपोर्ट, 2023; RTDC वार्षिक योजना 2024-25