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संभावित प्रश्न एवं उत्तर
Q1 (5 अंक — 50 शब्द)
UNESCO की "राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग" (2013) में शामिल छह दुर्गों के नाम बताइए। उनमें से जल दुर्ग कौन-सा है और क्यों?
आदर्श उत्तर: UNESCO की "राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग" (2013) में शामिल छह दुर्ग हैं — चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, गागरोन, आमेर और जैसलमेर। गागरोन दुर्ग (झालावाड़) जल दुर्ग है — यह आहू और काली सिंध नदियों के संगम पर स्थित है तथा इसकी कोई भी दीवार भूमि को नहीं छूती, जिससे चारों ओर प्राकृतिक जल सुरक्षा मिलती है।
Q2 (5 अंक — 50 शब्द)
"पैलेस ऑन व्हील्स" पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
आदर्श उत्तर: पैलेस ऑन व्हील्स RTDC और भारतीय रेलवे (NWR) द्वारा 1982 में आरम्भ (2009 में नवीनीकृत) की गई भारत की प्रमुख विलासिता विरासत रेलगाड़ी है। यह 8 रातों में जयपुर, रणथम्भौर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा को कवर करती है। कॉन्डे नास्ट ने इसे विश्व की शीर्ष 10 विलासिता रेलगाड़ियों में चुना; प्रति व्यक्ति प्रति रात USD 450-700 शुल्क है।
Q3 (5 अंक — 50 शब्द)
शेखावाटी की चित्रित हवेलियों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
आदर्श उत्तर: शेखावाटी (झुंझुनू, सीकर, चुरू जिले) में मारवाड़ी व्यापारियों द्वारा 1750-1900 ई. के बीच निर्मित 1,000+ चित्रित हवेलियाँ हैं। भित्तिचित्र के विषयों में राजपूत युद्ध, मुगल दरबार और ब्रिटिश औपनिवेशिक आकृतियाँ शामिल हैं। नवलगढ़, जहाँ प्रति वर्ग किमी सर्वाधिक हवेलियाँ हैं, "खुली वायु कला दीर्घा" कहलाता है। अनुपस्थित जमींदारी के कारण अनेक हवेलियाँ जीर्ण-शीर्ण हो रही हैं।
Q4 (5 अंक — 50 शब्द)
विरासत क्षेत्र पर्यटन के लिए राजस्थान होमस्टे नीति 2026 का क्या महत्त्व है?
आदर्श उत्तर: राजस्थान होमस्टे नीति 2026 (27 फरवरी 2026 को अधिसूचित) ने कमरों की सीमा 5 से बढ़ाकर 8 कर दी और अनिवार्य मालिक-निवास की शर्त हटा दी। यह नीति जैसलमेर, जोधपुर और झुंझुनू जैसे विरासत जिलों में महिला उद्यमियों और जनजातीय परिवारों को लक्षित करती है, जिससे हवेली मालिक अपनी सम्पत्ति होमस्टे के रूप में पंजीकृत कर जमीनी स्तर के विरासत पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं।
Q5 (10 अंक — 150 शब्द)
राजस्थान के UNESCO विश्व धरोहर स्थलों पर संरक्षण और पर्यटन में संतुलन बनाने की चुनौतियों की विवेचना कीजिए।
आदर्श उत्तर: राजस्थान के UNESCO स्थल — राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग (2013), केवलादेव घना (1985), जंतर-मंतर (2010) और जयपुर परकोटा नगरी (2019) — पर्यटन राजस्व और संरचनात्मक संरक्षण के बीच बढ़ते टकराव का सामना कर रहे हैं।
प्रमुख चुनौतियाँ:
वहन क्षमता से अधिक दर्शक: आमेर दुर्ग में 2023-24 में 19 लाख पर्यटक आए; वाहनों के कम्पन से 2022 से केवल बैटरी-शटल प्रवेश लागू किया गया। जैसलमेर जीवित दुर्ग में 3,000 निवासी और 4 लाख+ वार्षिक पर्यटक जल-निकासी तंत्र पर अत्यधिक दबाव डालते हैं।
अतिक्रमण: AMASR अधिनियम के 100 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र का उल्लंघन हो रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने नाहरगढ़ दुर्ग (2017) में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
वित्त पोषण की कमी: ASI का 3,693 स्मारकों के लिए राष्ट्रीय बजट ₹1,000 करोड़ है। विरासत गोद लें 2.0 (2023) के तहत कॉर्पोरेट सहयोग लिया जा रहा है।
पारिस्थितिक तनाव: केवलादेव घना पक्षी उद्यान में अजान बाँध से जल डायवर्जन के कारण पक्षी संख्या प्रभावित होती है — IUCN ने इसे बार-बार चिह्नित किया है।
निष्कर्ष: टिकाऊ विरासत पर्यटन के लिए वहन क्षमता नियमन, संरक्षित क्षेत्रों का सख्त प्रवर्तन, पर्याप्त सार्वजनिक वित्त पोषण और विरासत स्थलों के निकट रहने वाले 50,000+ निवासियों की भागीदारी आवश्यक है।
Q6 (10 अंक — 150 शब्द)
राजस्थान के पर्यटन परिपथों का वर्णन कीजिए और विरासत संवर्धन में उनके महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर: राजस्थान का पर्यटन बुनियादी ढाँचा विषयगत परिपथों में संगठित है जो पूरे राज्य में विरासत स्मारकों, वन्यजीव अभयारण्यों और सांस्कृतिक अनुभवों को जोड़ता है।
प्रमुख पर्यटन परिपथ:
विरासत परिपथ: जयपुर–आमेर–रणथम्भौर–चित्तौड़गढ़–उदयपुर–जैसलमेर–जोधपुर–भरतपुर — 6 UNESCO पर्वतीय दुर्गों में से 5 को जोड़ता है; पैलेस ऑन व्हील्स इस परिपथ को सेवा देती है।
मरु परिपथ: बीकानेर–जैसलमेर–बाड़मेर — ऊँट मेला, रेगिस्तानी संस्कृति और जैसलमेर दुर्ग; अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए।
मेवाड़-वागड़ परिपथ: उदयपुर–चित्तौड़गढ़–डूंगरपुर–बाँसवाड़ा — झील महल, जनजातीय विरासत और मध्यकालीन इतिहास।
शेखावाटी परिपथ: झुंझुनू–सीकर–चुरू — 1,000+ चित्रित हवेलियाँ; "खुली वायु कला दीर्घा" के रूप में वैश्विक विपणन।
महत्त्व: पर्यटन परिपथ जयपुर से परे पर्यटकों को वितरित करते हैं, एकल स्थलों पर अति-पर्यटन का दबाव कम करते हैं और स्थानीय शिल्प, व्यंजन एवं समुदाय से जोड़कर विरासत को व्यापक सांस्कृतिक आख्यान के रूप में प्रस्तुत करते हैं। 2023-24 में 5.77 करोड़ घरेलू पर्यटकों का आँकड़ा इसी परिपथ-आधारित विकास का परिणाम है।
निष्कर्ष: सुनियोजित परिपथ टिकाऊ विरासत पर्यटन की धुरी हैं — ये पर्यटक प्रवाह को संतुलित करते हैं, ग्रामीण रोजगार उत्पन्न करते हैं और राजस्थान की विविध विरासत को एक एकीकृत सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
