सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
राजस्थान के 4 UNESCO विश्व धरोहर स्थल
- "राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग" — 6 दुर्ग, 2013 में अंकित
- केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान — 1985 में अंकित
- जंतर-मंतर जयपुर — 2010 में अंकित
- जयपुर परकोटा नगरी — 2019 में अंकित
राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग — क्रमिक UNESCO अंकन (2013)
- छह दुर्ग: चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, गागरोन, आमेर और जैसलमेर
- 7वीं से 19वीं शताब्दी की राजपूत सैन्य स्थापत्य कला के लिए चयनित
- UNESCO मानदंड (ii) और (iii) — मूल्यों का आदान-प्रदान; असाधारण सांस्कृतिक साक्ष्य
- भारत में दुर्गों का एकमात्र क्रमिक नामांकन
राजस्थान में ASI-संरक्षित स्मारक
- 174 केंद्रीय संरक्षित स्मारक — सभी राज्यों में दूसरा सर्वाधिक
- केवल उत्तर प्रदेश (745) और मध्य प्रदेश (294) में अधिक
- सभी 6 UNESCO पर्वतीय दुर्ग ASI संरक्षण में हैं
- स्रोत: ASI वार्षिक रिपोर्ट 2022-23
पर्यटक आगमन एवं राजस्व (2023-24)
- 5.77 करोड़ घरेलू पर्यटकों ने राजस्थान का भ्रमण किया
- 17.28 लाख विदेशी पर्यटकों ने राजस्थान का भ्रमण किया
- राज्य अर्थव्यवस्था में योगदान: लगभग ₹1.05 लाख करोड़
- पर्यटन राजस्थान के GSDP में लगभग 8-9% का योगदान करता है
पैलेस ऑन व्हील्स — RTDC विरासत रेलगाड़ी
- RTDC और भारतीय रेलवे (NWR) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित
- 1982 में प्रारम्भ; 2009 में नवीनीकृत
- 8 रातों में 8 विरासत गंतव्यों को कवर करती है
- कॉन्डे नास्ट द्वारा विश्व की शीर्ष 10 विलासिता रेलगाड़ियों में स्थान
राजस्थान की UNESCO अनंतिम सूची
- जयपुर की परकोटा नगरी (पिंक सिटी) — 2012 में प्रस्तुत
- राजस्थान की बावड़ियों का क्रमिक नामांकन — मूल्यांकनाधीन
- मरु राष्ट्रीय उद्यान, सैम, जैसलमेर — 2006 में प्रस्तुत
राजस्थान के प्रमुख पर्यटन परिपथ
- मरु परिपथ: जैसलमेर–बीकानेर–बाड़मेर
- मेवाड़ परिपथ: उदयपुर–चित्तौड़गढ़–कुम्भलगढ़
- हाड़ौती परिपथ: कोटा–बूँदी–बारां–झालावाड़
- शेखावाटी परिपथ: झुंझुनू–सीकर–चुरू
राजस्थान होमस्टे नीति 2026
- 27 फरवरी 2026 को अधिसूचित
- कमरों की अधिकतम सीमा 5 से बढ़ाकर 8 की
- अनिवार्य मालिक-निवास की शर्त हटाई
- ग्रामीण एवं विरासत क्षेत्र पर्यटन विस्तार के लिए बनाई गई
राजस्थान के विरासत होटल
- 100 से अधिक वर्गीकृत विरासत होटल — भारत में सर्वाधिक
- पर्यटन मंत्रालय की तीन श्रेणियाँ: हेरिटेज ग्रैंड, हेरिटेज क्लासिक, हेरिटेज बेसिक
- हेरिटेज ग्रैंड: 100+ वर्ष पुराना, महल या दुर्ग संरचनाएँ (5-स्टार के समकक्ष)
- हेरिटेज क्लासिक: 75-100 वर्ष पुरानी, हवेलियाँ या शिकार लॉज (4-स्टार के समकक्ष)
CM भजनलाल शर्मा द्वारा नगर पुनर्नामकरण (फरवरी-मार्च 2026)
- माउंट आबू → आबू राज (प्राचीन वैदिक संबंध, दिलवाड़ा मंदिर)
- जहाजपुर → यज्ञपुर (प्राचीन यज्ञों की भूमि, भीलवाड़ा जिला)
- कामाँ → कामवन (ब्रज सांस्कृतिक क्षेत्र, कात्यायनी देवी मंदिर)
राजस्थान के वार्षिक पर्यटन उत्सव
- मरु महोत्सव (जैसलमेर, जनवरी-फरवरी)
- पुष्कर ऊँट मेला (नवम्बर, कार्तिक पूर्णिमा)
- तीज उत्सव और गणगौर (जयपुर, जुलाई-अगस्त और मार्च-अप्रैल)
- हाथी महोत्सव (जयपुर, होली)
गागरोन दुर्ग — राजस्थान का एकमात्र जल दुर्ग
- झालावाड़ जिले में स्थित
- आहू और काली सिंध नदियों के संगम पर स्थित
- कोई भी नींव दीवार भूमि को नहीं छूती — चारों ओर प्राकृतिक जल सुरक्षा
- दो ऐतिहासिक जौहरों का स्थल; डोडिया-खींची राजपूतों द्वारा निर्मित (12वीं शताब्दी ई.)
कुम्भलगढ़ की रिकॉर्ड-लम्बी परिधि दीवार
- दीवार की लम्बाई: 36 किमी — विश्व की दूसरी सबसे लम्बी निरंतर दीवार
- केवल चीन की महान दीवार अधिक लम्बी है
- दुर्ग परिसर में 360 मंदिर समाहित
- महाराणा प्रताप का जन्म स्थान; राणा कुम्भा द्वारा निर्मित (1458 ई.)
शेखावाटी — विश्व की खुली वायु कला दीर्घा
- क्षेत्र में नवलगढ़, मंडावा, फतेहपुर, रामगढ़ (झुंझुनू, सीकर, चुरू जिले) शामिल
- 18वीं-19वीं शताब्दी की 1,000 से अधिक चित्रित हवेलियाँ
- भित्तिचित्र के विषय: राजपूत युद्ध, मुगल दरबार जीवन, ब्रिटिश औपनिवेशिक आकृतियाँ
- UNESCO अनंतिम सूची में क्रमिक नामांकन के रूप में मूल्यांकनाधीन
AMASR अधिनियम 1958 — स्मारक संरक्षण क्षेत्र
- ASI स्मारक संरक्षण को नियंत्रित करता है; 2010 में महत्त्वपूर्ण संशोधन
- प्रतिबंधित क्षेत्र: स्मारक से 0-100 मीटर — किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं
- नियंत्रित क्षेत्र: 100-300 मीटर — निर्माण के लिए NMA की अनुमति आवश्यक
- 2010 संशोधन के तहत राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) की स्थापना
