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ASI एवं राज्य-संरक्षित स्मारक
केंद्रीय संरक्षित स्मारक
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) प्राचीन स्मारक और पुरातत्त्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR अधिनियम) के तहत स्मारकों की रक्षा करता है।
राजस्थान में:
- 174 केंद्रीय संरक्षित स्मारक — सभी राज्यों में उत्तर प्रदेश (745) और मध्य प्रदेश (294) के बाद दूसरे स्थान पर (स्रोत: ASI वार्षिक रिपोर्ट 2022-23)
- इनमें सभी 6 UNESCO-सूचीबद्ध पर्वतीय दुर्ग शामिल हैं
- तीन ASI मंडल राजस्थान को कवर करते हैं: जयपुर, आगरा (आंशिक अतिव्यापन) और जोधपुर मंडल
AMASR अधिनियम 1958 — प्रमुख प्रावधान
AMASR अधिनियम, 1958, जिसे 2010 में महत्त्वपूर्ण रूप से संशोधित किया गया (AMASR संशोधन और विधिमान्यता अधिनियम, 2010), प्रत्येक केंद्रीय संरक्षित स्मारक के चारों ओर दो-क्षेत्र संरक्षण प्रणाली बनाता है:
| क्षेत्र | दूरी | प्रतिबंध |
|---|---|---|
| प्रतिबंधित क्षेत्र | स्मारक सीमा से 0-100 मीटर | किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं; अनधिकृत संरचनाओं के लिए विध्वंस आदेश |
| नियंत्रित क्षेत्र | स्मारक सीमा से 100-300 मीटर | निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) की पूर्व अनुमति आवश्यक |
स्रोत: AMASR अधिनियम 1958, धाराएँ 20A-20L (2010 संशोधन द्वारा सम्मिलित)
राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) की स्थापना 2010 संशोधन के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई। इसके अधिदेश के तीन घटक हैं:
- प्रत्येक संरक्षित स्मारक के लिए विरासत उपनियम तैयार करना
- नियंत्रित क्षेत्र में निर्माण अनुमतियाँ देना या अस्वीकार करना
- स्मारक एजेंटों का रजिस्टर बनाए रखना
2010 संशोधन सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी (रिट याचिका सिविल 2006) के जवाब में आया कि 35 ASI स्मारकों में प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण हुआ था — जिनमें राजस्थान के कई स्मारक भी थे।
राज्य-संरक्षित स्मारक
राजस्थान राज्य पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान स्मारक, पुरातत्त्व स्थल और पुरावशेष अधिनियम, 1961 के तहत एक अलग सूची बनाए रखता है। 2023-24 तक राजस्थान में ASI के अधिकार क्षेत्र से बाहर की हवेलियों, मंदिरों, बावड़ियों और छोटे दुर्गों सहित 400 से अधिक राज्य-संरक्षित स्मारक हैं।
प्रमुख राज्य-संरक्षित स्थलों में शामिल हैं:
- दिलवाड़ा मंदिर (आबू राज/माउंट आबू, सिरोही): जैन संगमरमर मंदिर, 11वीं-13वीं शताब्दी ई.; विमल वसही (1031 ई.) और लूण वसही (1230 ई.) — राज्य संरक्षण में, ASI में नहीं
- राणकपुर जैन मंदिर (पाली): 15वीं शताब्दी; 1,444 अनूठे नक्काशीदार संगमरमर स्तम्भ
- शेखावाटी की हवेलियाँ (झुंझुनू, सीकर, चुरू जिले): विभिन्न स्तरों की सुरक्षा में 1,000+ चित्रित हवेलियाँ
विरासत होटल और उनका नियामक ढाँचा
पर्यटन मंत्रालय की विरासत होटल वर्गीकरण प्रणाली विरासत संरचनाओं में स्थित होटलों के लिए एक अलग श्रेणी बनाती है:
| श्रेणी | भवन की आयु | मानक |
|---|---|---|
| हेरिटेज ग्रैंड | 100+ वर्ष; महल, दुर्ग | 5-स्टार के समकक्ष सुविधाएँ |
| हेरिटेज क्लासिक | 75-100 वर्ष; हवेलियाँ, शिकार लॉज | 4-स्टार के समकक्ष |
| हेरिटेज बेसिक | 50-75 वर्ष; मनोर हाउस | 3-स्टार के समकक्ष |
स्रोत: पर्यटन मंत्रालय, विरासत होटल वर्गीकरण हेतु दिशानिर्देश, 2020
राजस्थान में 100 से अधिक वर्गीकृत विरासत होटल हैं — भारत में सर्वाधिक। प्रमुख उदाहरण:
- उम्मेद भवन पैलेस (जोधपुर): अंशतः संग्रहालय, अंशतः ताज होटल्स की सम्पत्ति; 347 कमरे; 1943 में निर्मित
- ताज लेक पैलेस (उदयपुर): 17वीं शताब्दी का पिछोला झील पर तैरता महल; महाराणा जगत सिंह II द्वारा 1746 में निर्मित
- सामोद पैलेस (जयपुर, चोमू): 475 वर्ष पुराना महल; अब सामोद होटल्स
- नीमराणा फोर्ट पैलेस (अलवर): 15वीं शताब्दी का दुर्ग; भारत की विरासत होटल अवधारणा का अग्रदूत (1986 में परिवर्तित)
इन संरचनाओं के स्थापत्य विवरण के लिए विषय #5 देखें।
