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पिछले वर्षों के प्रश्न विश्लेषण
पूछे गए प्रश्न
इस विषय के सभी पाँच PYQ प्रश्न 2016 से 2024 के बीच समाजशास्त्र खंड (प्रश्नपत्र I इकाई III) से आए:
- RPSC मुख्य परीक्षा 2016, प्रश्नपत्र I (समाजशास्त्र), (2 अंक): "राजस्थान की जनजातियों के सामने आने वाली चार प्रमुख समस्याओं को पहचानिए।"
- RPSC मुख्य परीक्षा 2018, प्रश्नपत्र I (समाजशास्त्र), (5 अंक): "राजस्थान में जनजातियों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या संवैधानिक प्रयास किए गए हैं?"
- RPSC मुख्य परीक्षा 2021, प्रश्नपत्र I (समाजशास्त्र), (5 अंक): "राजस्थान के जनजातीय समुदाय की पाँच प्रमुख समस्याएँ लिखो।"
- RPSC मुख्य परीक्षा 2023, प्रश्नपत्र I (समाजशास्त्र), (5 अंक): "गरासिया जनजाति का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल प्रस्तुत करो।"
- RPSC मुख्य परीक्षा 2024, प्रश्नपत्र I (समाजशास्त्र), (5 अंक): "भारत सरकार द्वारा जनजातीय कल्याण के लिए की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख करो।"
RPSC क्या परखता है
PYQ के 6 वर्षों में तीन सुसंगत उपविषय उभरते हैं:
जनजातीय समस्याएँ (2016, 2021): तथ्यात्मक सूचीबद्धता — भूमि-अन्यारोपण, विस्थापन, शिक्षा का अभाव, स्वास्थ्य, बंधुआ मजदूरी। RPSC विश्लेषणात्मक चर्चा के बजाय विशिष्ट आँकड़ों सहित सूची-प्रारूप उत्तर पसंद करता है।
संवैधानिक/कानूनी ढाँचा (2018): अनुच्छेद 342, पाँचवीं अनुसूची, PESA अधिनियम 1996, वन अधिकार अधिनियम 2006 का सटीक ज्ञान परखा जाता है — अभ्यर्थियों को अस्पष्ट सारांश नहीं बल्कि सटीक अनुच्छेद/धारा संख्याएँ और प्रमुख प्रावधान उद्धृत करने होते हैं।
विशिष्ट जनजाति प्रोफाइलिंग (2023 — गरासिया): एक जनजाति की सामाजिक-आर्थिक स्थिति — जनसंख्या, स्थान, रीति-रिवाज, अर्थव्यवस्था, कल्याण चुनौतियाँ — पर गहन जानकारी परखी जाती है। 2023 का प्रश्न संकेत देता है कि RPSC भविष्य में अन्य जनजातियों (सहरिया, भील, मीणा) का प्रोफाइलिंग पूछ सकता है।
कल्याण योजनाएँ (2024): केंद्र सरकार की पहलों — PM-JANMAN, EMRS, TRIFED, VDVKs, MSP-MFP योजना — की जानकारी परखी जाती है। इस प्रकार का प्रश्न ज्ञान-आधारित है और वर्तमान कल्याण ढाँचे का अनुसरण करने वाले अभ्यर्थियों को पुरस्कृत करता है।
आवृत्ति और प्रवृत्ति
- उपस्थिति: समाजशास्त्र खंड से 5 परीक्षाओं में 5 प्रश्न (2016, 2018, 2021, 2023, 2024) — वस्तुतः 5/5
- प्रवृत्ति: बढ़ती और विविधीकरण हो रही है। प्रारंभिक प्रश्न (2016: 2 अंक) संक्षिप्त थे; 2021–2024 तक प्रश्न विशिष्ट जनजाति या योजना केंद्रित पूर्ण 5-अंकीय हो गए हैं
- अंक सीमा: प्रति उपस्थिति 2–5 अंक। अभी तक कोई 10-अंक का प्रश्न नहीं पूछा गया, किंतु नए इतिहास इकाई में स्थानांतरण 2026 में 10-अंक का प्रश्न आमंत्रित कर सकता है
- इतिहास इकाई में स्थानांतरण: RPSC 2026 संशोधित पाठ्यक्रम इस विषय को प्रश्नपत्र I इकाई 1 (इतिहास) में स्थानांतरित करता है, जिसमें 3 × 10-अंक के प्रश्न हैं। यह पहली बार जनजातीय परंपराओं पर 10-अंक के प्रश्न की संभावना का संकेत देता है।
2026 का पूर्वानुमान
इतिहास में पाठ्यक्रम पुनर्वर्गीकरण और PYQ पैटर्न को देखते हुए, 2026 के लिए दो प्रश्न प्रकार सर्वाधिक संभावित हैं:
5-अंकीय तथ्यात्मक: "भील जनजाति की गवरी लोक परंपरा पर एक टिप्पणी लिखो।" / "नाता प्रथा क्या है? इसके सामाजिक महत्त्व का वर्णन करो।" / "बाणेश्वर मेले का महत्त्व क्या है?"
10-अंकीय विश्लेषणात्मक: "राजस्थान के किन्हीं दो जनजातीय समुदायों की प्रमुख परंपराओं और रीति-रिवाजों का वर्णन करो।" अथवा "राजस्थान में जनजातीय कल्याण के संवैधानिक ढाँचे का, विशेष रूप से PESA 1996 और वन अधिकार अधिनियम 2006 के संदर्भ में, आलोचनात्मक परीक्षण करो।"
समसामयिकी-प्रेरित: "PM-JANMAN क्या है? PVTGs के लिए इसके महत्त्व पर चर्चा करो।" अथवा "RISA जनजातीय ब्रांड पहल (2026) और जनजातीय कारीगरों के लिए इसके महत्त्व का वर्णन करो।"
