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आदर्श उत्तर रूपरेखा
5-अंकीय प्रश्न 1 (50 शब्द): गरासिया जनजाति प्रोफाइल
प्रश्न (2023 PYQ): गरासिया जनजाति का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल प्रस्तुत करो।
आदर्श उत्तर:
गरासिया (जनसंख्या ~3.09 लाख, जनगणना 2011) राजस्थान के सिरोही, पाली और उदयपुर जिलों में केंद्रित हैं। ये विशिष्ट प्रथाओं का पालन करते हैं — छोड़ प्रथा (औपचारिक तलाक के बिना पत्नी का परित्याग) और मोरम प्रथा (औपचारिक विवाह से पूर्व परीक्षण सहवास)। अर्थव्यवस्था वन संग्रहण और वर्षा-आधारित कृषि का मिश्रण है। साक्षरता राज्य के औसत से नीचे (~45%) है। गरासिया राजस्थान के पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आते हैं।
शब्द बजट: प्रोफाइल परिचय (10) + रीति-रिवाज (15) + अर्थव्यवस्था (10) + कल्याण आँकड़ा (10) + संवैधानिक स्थिति (5) = ~50 शब्द
5-अंकीय प्रश्न 2 (50 शब्द): जनजातियों के लिए संवैधानिक प्रावधान
प्रश्न (2018 PYQ पर आधारित): राजस्थान में जनजातीय कल्याण के लिए क्या संवैधानिक प्रावधान हैं?
आदर्श उत्तर:
प्रमुख संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 342 (ST की राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना), पाँचवीं अनुसूची (अनुसूचित क्षेत्र; जनजातीय सलाहकार परिषद), अनुच्छेद 244 (अनुसूचित क्षेत्र प्रशासन), अनुच्छेद 338A (राष्ट्रीय ST आयोग, स्थापना 2003)। PESA अधिनियम 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में लघु वन उपज के स्वामित्व सहित ग्राम सभा की शक्तियों का विस्तार करता है। वन अधिकार अधिनियम 2006 अधिकतम 4 हेक्टेयर के व्यक्तिगत वन पट्टे प्रदान करता है।
शब्द बजट: अनुच्छेद उद्धरण (25) + PESA (15) + FRA (10) = ~50 शब्द
5-अंकीय प्रश्न 3 (50 शब्द): जनजातीय समुदाय की समस्याएँ
प्रश्न (2021 PYQ पर आधारित): राजस्थान के जनजातीय समुदाय की पाँच प्रमुख समस्याएँ लिखो।
आदर्श उत्तर:
- भूमि-अन्यारोपण — राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के संरक्षण के बावजूद गैर-जनजातियों का अतिक्रमण।
- शिक्षा का अभाव — ST साक्षरता 52.5% बनाम राज्य औसत 66.1% (जनगणना 2011)।
- विस्थापन — बाँध और खनन परियोजनाएँ समुचित पुनर्वास के बिना समुदायों को विस्थापित करती हैं।
- स्वास्थ्य/कुपोषण — जनजातीय जिलों में IMR राज्य के औसत से 15–20% अधिक।
- बंधुआ मजदूरी — 1976 उन्मूलन अधिनियम के बावजूद सहरिया और कथोड़ी में जारी।
शब्द बजट: विशिष्ट आँकड़ों सहित 5 समस्याएँ = ~50 शब्द
10-अंकीय प्रश्न (150 शब्द): जनजातीय परंपराएँ और रीति-रिवाज
प्रश्न: राजस्थान के जनजातीय समुदायों की प्रमुख परंपराओं और रीति-रिवाजों का, विशेष रूप से विवाह प्रथाओं और त्योहारों के संदर्भ में, वर्णन करो।
आदर्श उत्तर:
परिचय: राजस्थान की 12 अनुसूचित जनजातियाँ (जनसंख्या का 13.48%, जनगणना 2011) वन पर्यावरण और ऐतिहासिक अलगाव से निर्मित विशिष्ट सामाजिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएँ रखती हैं।
प्रमुख बिंदु:
विवाह प्रथाएँ: भील दापा प्रथा (वधू मूल्य — वर वधू के परिवार को देता है) और नाता प्रथा (प्रथम पति को मुआवज़ा देकर सामाजिक रूप से मान्य द्वितीयक संबंध) का पालन करते हैं। गरासिया छोड़ प्रथा (पत्नी-परित्याग) और मोरम प्रथा (औपचारिक विवाह से पूर्व परीक्षण सहवास) का पालन करते हैं, जो महिलाओं को असामान्य सामाजिक स्वायत्तता देती हैं।
प्रदर्शन कलाएँ: भील गवरी लोकनाट्य रक्षा बंधन के बाद 40 लगातार दिनों तक चलता है, शिव पौराणिक कथाओं का मंचन करता है। पुरुष कलाकार अनुष्ठानिक पवित्रता बनाए रखते हैं; भ्रमणशील प्रदर्शन उदयपुर और राजसमंद जिलों में गाँव-गाँव घूमता है।
बाणेश्वर मेला: माघ पूर्णिमा पर सोम-माही-जाखम त्रिवेणी संगम, डूँगरपुर में आयोजित — 3–5 लाख भील और गरासिया आदिवासी सम्मिलित होते हैं; इसे "राजस्थान का आदिवासी कुम्भ" कहा जाता है। भील संत मावजी महाराज को समर्पित।
धार्मिक समन्वयवाद: जनजातीय धर्म जीवात्मवाद (भूमिया/ठाकुर बाबा पूजा, पवित्र वन सरना) और हिंदू देवी-देवता पूजा (शिव, दुर्गा) का मिश्रण है, जो जनजातीय और मुख्यधारा परंपराओं के ऐतिहासिक एकीकरण को प्रदर्शित करता है।
निष्कर्ष: राजस्थान की जनजातीय परंपराएँ जीवित सांस्कृतिक विरासत हैं; PESA 1996 और वन अधिकार अधिनियम 2006 जनजातीय अधिकार सुनिश्चित करते हुए इस विरासत के संरक्षण का विधायी आधार प्रदान करते हैं।
शब्द बजट: परिचय (20) + बिंदु 1 (35) + बिंदु 2 (30) + बिंदु 3 (25) + बिंदु 4 (20) + निष्कर्ष (20) ≈ 150 शब्द
