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इतिहास

परिचय एवं पाठ्यक्रम

जनजातियाँ एवं उनकी परंपराएँ

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 2 / 14 0 PYQ 47 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

परिचय एवं पाठ्यक्रम

इस विषय में क्या शामिल है

यह विषय राजस्थान की जनजातीय समुदायों को समाहित करता है — उनका जनसांख्यिकीय वितरण, प्रमुख समूह, पारंपरिक सांस्कृतिक प्रथाएँ, सामाजिक रीति-रिवाज, धार्मिक आस्थाएँ तथा जनजातीय कल्याण के लिए संवैधानिक/विधायी ढाँचा।

RPSC 2026 मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में इसे प्रश्नपत्र I, इकाई 1 (इतिहास), भाग A के अंतर्गत रखा गया है — यह एक महत्त्वपूर्ण पुनर्वर्गीकरण है। इससे पहले जनजातीय प्रश्न लगभग पूरी तरह प्रश्नपत्र I इकाई III (समाजशास्त्र खंड) से आते थे, जैसा PYQ रिकॉर्ड (2016–2024, पाँच प्रश्न) में देखा जा सकता है। 2026 के पाठ्यक्रम परिवर्तन से स्पष्ट है कि RPSC अब जनजातीय संस्कृति को कल्याण-नीति की बजाय राजस्थान की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अंग के रूप में देखता है।

अभ्यर्थियों को दोनों पक्षों में दक्षता आवश्यक है:

  • ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पक्ष — परंपराएँ, रीति-रिवाज, त्योहार
  • कल्याण-शासन पक्ष — संवैधानिक प्रावधान, योजनाएँ, PVTGs

विषय-सीमा

विषय-सीमा: यह विषय राजस्थान की विशिष्ट जनजातियों और उनकी परंपराओं तक सीमित है। राष्ट्रीय जनसांख्यिकीय परिदृश्य, अखिल भारतीय जनजातीय आंदोलन और तुलनात्मक राज्य विश्लेषण केवल संदर्भ के रूप में हैं — 60% से अधिक सामग्री राजस्थान-विशिष्ट होनी चाहिए।

संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 342, पाँचवीं अनुसूची, PESA) राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में सर्वव्यापी हैं, किंतु इन्हें राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू करके देखना होगा। जनजातियों के जनसांख्यिकीय एवं भौगोलिक वितरण के लिए विषय #89 (जनसांख्यिकीय विशेषताएँ) देखें।

PYQ पैटर्न

2016 के बाद के सभी 5 PYQ प्रश्न समाजशास्त्र खंड से आए हैं। इनमें परीक्षण होता है:

  • (a) जनजातीय समस्याओं की गणना
  • (b) संवैधानिक/विधायी ढाँचा
  • (c) विशिष्ट जनजातियों (गरासिया, 2023) का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग
  • (d) सरकारी पहलों की सूचीबद्धता

2026 में इतिहास इकाई से संभावित प्रश्न कल्याण नीति की अपेक्षा परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रथाओं पर अधिक बल देगा — अभ्यर्थियों को इस बदलाव का अनुमान लगाकर तैयारी करनी चाहिए।

क्रॉस-रेफरेंस: जनजातीय समुदायों की लोक कला व प्रदर्शनी परंपराएँ विषय #6 (लोक परंपराएँ) से जुड़ती हैं; बाणेश्वर सहित जनजातीय मेले विषय #7 (मेले और त्योहार) से। जनजाति-आधारित भौगोलिक समूह विषय #89 में शामिल हैं।