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इतिहास

प्रमुख पशु मेले

मेले एवं त्योहार

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 4 / 14 0 PYQ 43 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

प्रमुख पशु मेले

3.1 पुष्कर मेला

पुष्कर (अजमेर जिला) में आयोजित पुष्कर मेला राजस्थान का सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयोजन है और विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला है। यह कार्तिक पूर्णिमा की ब्रह्मा मंदिर-तीर्थयात्रा से अभिन्न रूप से जुड़ा है — जो भारत में भगवान ब्रह्मा का एकमात्र क्रियाशील मंदिर है।

प्रमुख तथ्य

  • अवधि: 5 दिन (कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा, अक्टूबर–नवंबर)
  • पशु व्यापार: चरम वर्ष में लगभग 20,000–25,000 ऊँट, घोड़े और मवेशी (2019 के आँकड़े); 10,000–12,000 पशुओं के साथ ऊँट सर्वाधिक
  • आगंतुक: 2–3 लाख घरेलू तीर्थयात्री; 20,000–25,000 विदेशी पर्यटक (कोविड-पूर्व शीर्ष काल)
  • स्थान: पुष्कर झील के घाट (तीर्थयात्रा) और उत्तर में खुले मैदान (पशुधन)
  • विशेष प्रतियोगिताएँ: सर्वश्रेष्ठ सजे ऊँट, ऊँट दौड़, ऊँट पोलो — 1990 के दशक से प्रमुख पर्यटक आकर्षण
  • आर्थिक प्रभाव: वार्षिक लगभग ₹300–400 करोड़ की आर्थिक गतिविधि (राजस्थान पर्यटन अनुमान, 2023)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेले का द्विआयामी चरित्र — पवित्र तीर्थ और वाणिज्यिक पशु व्यापार — कम से कम 8वीं शताब्दी ई. से चला आ रहा है, जब पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर की परम्परा सुस्थापित थी। मध्यकालीन राजपूत वृत्तांतों में पुष्कर के व्यापार मेले का उल्लेख मिलता है। UNESCO ने पुष्कर मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची के लिए एक उम्मीदवार के रूप में प्रलेखित किया है।

3.2 नागौर मेला

नागौर जिला मुख्यालय में आयोजित नागौर पशु मेला सोनपुर (बिहार) के बाद एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला है। यह माघ शुक्ल (जनवरी–फरवरी) में 4 दिनों तक चलता है।

प्रमुख तथ्य

  • पशु व्यापार: बैल, भैंसें, घोड़े, ऊँट — नागौर की सफेद नागौरी बैल नस्ल जुताई के लिए विशेष रूप से मूल्यवान है
  • व्यापार मात्रा: 70,000–80,000 पशु (2024 के आँकड़े); मेले का व्यापार मूल्य लगभग ₹60–80 करोड़
  • द्वितीयक बाजार: लकड़ी के फर्नीचर, पीतल के बर्तन, लाल मिर्च (नागौरी लाल मिर्च — GI टैग प्राप्त), और हाथ से बुने वस्त्रों के लिए राजस्थान का सबसे बड़ा बाजार
  • सरकारी सुविधाएँ: राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड मेले में पशु चिकित्सा शिविर और पशु स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित करता है

आर्थिक महत्त्व

नागौर मेला अर्ध-शुष्क राजस्थान की कृषि-पशुचारण अर्थव्यवस्था को संबल देता है। नागौर, बाड़मेर, जोधपुर और चुरू जिलों के किसान यहाँ कृषि पशुओं का आदान-प्रदान करते हैं, जो पश्चिमी राजस्थान के रबी मौसम के कृषि चक्र को प्रभावित करता है।

3.3 तिलवाड़ा मेला

बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा में लूनी नदी के तट पर माघ शुक्ल में आयोजित तिलवाड़ा मेला राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा पशु मेला है। अधिष्ठाता देवता मल्लिनाथ महाराज हैं — मालानी (बाड़मेर) के 14वीं शताब्दी के राजपूत शासक जो मृत्योपरांत लोक संत बन गए।

  • पशु विशेषता: कांकरेज/मल्ली पशु नस्ल — शुष्क क्षेत्र के लिए विकसित सूखा-प्रतिरोधी नस्ल — इसका केन्द्रबिन्दु है
  • अवधि: 15 दिन (चैत्र कृष्ण 11 से चैत्र शुक्ल 11) — राजस्थान का सबसे लम्बा पशु मेला
  • नाम सम्बन्धी टिप्पणी: तिलवाड़ा लूनी नदी पर एक मध्यपाषाणकालीन पुरातात्त्विक स्थल का भी नाम है (उत्खनन 1962–63); एक ही भौगोलिक स्थान, सहस्राब्दियों में भिन्न सांस्कृतिक अर्थ (देखें विषय #1)

3.4 झालरापाटन मेला

झालावाड़ जिला मुख्यालय में कार्तिक पूर्णिमा को चन्द्रभागा नदी तट पर आयोजित झालरापाटन मेला चौथा सबसे बड़ा पशु मेला है। यह हरियाणा नस्ल के मवेशियों और मालवी मवेशियों के व्यापार में विशेषज्ञ है, जो हाड़ौती (कोटा-बारां-झालावाड़ क्षेत्र) की कृषि-पशुचारण पट्टी की सेवा करता है। सम्बद्ध मंदिर चन्द्रभागा मंदिर (सूर्य मंदिर, 10वीं शताब्दी ई.) है।