सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
राजस्थान में मेलों के प्रकार
- राजस्थान में प्रतिवर्ष 1,000 से अधिक मेले आयोजित होते हैं
- इन्हें चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: धार्मिक, जनजातीय, पशु/पशुधन, और मौसमी
पुष्कर मेला
- विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला, प्रतिवर्ष कार्तिक (अक्टूबर–नवंबर) में 5 दिनों के लिए अजमेर जिले में आयोजित होता है
- 2019 में 20,000 से अधिक पशुओं का क्रय-विक्रय हुआ; ऊँट इसका प्रमुख आकर्षण हैं
- UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की दावेदारी में शामिल
गणगौर
- राजस्थान का सर्वप्रमुख महिला पर्व, होली से चैत्र शुक्ल तृतीया तक 18 दिनों तक मनाया जाता है
- पार्वती के शिव से मिलन का प्रतीक; विवाहित और अविवाहित दोनों प्रकार की महिलाएँ इसे मनाती हैं
- इस स्वरूप में यह पर्व अन्य किसी भारतीय राज्य में नहीं मनाया जाता
बेणेश्वर मेला
- राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला, डूँगरपुर में माही-सोम-जाखम नदियों के संगम पर माघ (जनवरी–फरवरी) में आयोजित होता है
- इसे "आदिवासियों का कुम्भ" कहा जाता है
- राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के 4–5 लाख भील जनजाति के लोग इसमें भाग लेते हैं
रामदेवरा मेला
- जैसलमेर में रामदेवजी की समाधि स्थल पर भाद्र शुक्ल 2–11 को आयोजित होता है
- यह एक सम्मिश्र हिन्दू-मुस्लिम मेला है: रामापीर (हिन्दू) और रामसा पीर (मुस्लिम) एक ही देवता के नाम हैं
- लोक पूजा में सांप्रदायिक सौहार्द का यह राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है
नागौर मेला
- एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला, माघ (जनवरी–फरवरी) में 4 दिनों के लिए आयोजित होता है
- बैल, घोड़े और ऊँटों के लिए प्रसिद्ध; पीतल के बर्तन और वस्त्र व्यापार के लिए भी विख्यात
- सरकार इसे आधिकारिक रूप से राज्य स्तरीय मेले के रूप में मान्यता देती है
अजमेर उर्स
- हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (मृत्यु 1236 ई.) की वार्षिक स्मृति में रज्जब मास में 6 दिनों तक मनाया जाता है
- 810वाँ उर्स (2026) में अंतरराष्ट्रीय सूफी श्रद्धालुओं सहित 3–4 लाख दर्शनार्थी आते हैं
- प्रधानमंत्री राज्य सम्मान के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय चादर भेजते हैं
तीज
- मानसून आगमन का प्रतीक; श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है
- जयपुर में तीज शोभायात्रा महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने 1778 ई. में प्रारंभ की थी
- राजस्थान पर्यटन विकास निगम द्वारा प्रबंधित राज्य-प्रायोजित धरोहर आयोजन
गोगामेड़ी मेला
- हनुमानगढ़ जिले में गोगा जाहर वीर की समाधि पर भाद्र शुक्ल नवमी को आयोजित होता है
- उत्तरी राजस्थान का सबसे बड़ा मेला, जिसमें प्रतिवर्ष 5–6 लाख श्रद्धालु आते हैं
- गोगा जाहर वीर, रामदेवजी के बाद राजस्थान के सर्वाधिक पूजित लोक देवता हैं
कैला देवी मेला
- करौली जिले में कालीसिल नदी के तट पर त्रिकूट पहाड़ियों में चैत्र माह में आयोजित होता है
- राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से 15–20 लाख तीर्थयात्री आते हैं
- कुल उपस्थिति की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा मेला
मकर संक्रांति
- 14 जनवरी को राजस्थान के पतंग पर्व के रूप में मनाया जाता है
- जयपुर में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 1989 में प्रारंभ हुआ
- भारत के पतंग उत्पादन में राजस्थान का योगदान लगभग 25–30% है
तिलवाड़ा मेला
- बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा में लूनी नदी के तट पर माघ माह में आयोजित होता है
- राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा पशु मेला; मालिनाथ नस्ल के मवेशियों के लिए प्रसिद्ध
- उसी स्थान पर स्थित एक मध्यपाषाण पुरातात्त्विक स्थल का भी यही नाम है (देखें विषय #1)
राजस्थान मेले और उत्सव नीति 2015
- मेलों को राष्ट्रीय, राज्य, जिला और स्थानीय स्तरों में वर्गीकृत करती है
- पर्यटन विभाग अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के लिए 5 "सिग्नेचर इवेंट" आयोजित करता है
- सिग्नेचर इवेंट में पुष्कर मेला और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल शामिल हैं
