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परिचय एवं पाठ्यक्रम
पाठ्यक्रम का दायरा
यह विषय राजस्थान के मेलों और उत्सवों को समाहित करता है — उनका वर्गीकरण, भौगोलिक वितरण, धार्मिक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक महत्त्व, पशुधन/आर्थिक कार्य, तथा राजस्थान की लोक परम्परा (देखें विषय #6), जनजातीय संस्कृति (देखें विषय #8) और धार्मिक विरासत (देखें विषय #11) से सम्बन्ध।
RPSC 2026 पाठ्यक्रम में विशेष रूप से "मेले एवं त्यौहार" को प्रश्नपत्र I, इकाई 1 (इतिहास) के अंतर्गत सम्मिलित किया गया है, जो इस समझ को दर्शाता है कि मेले और उत्सव राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक परम्परा के प्रमुख वाहक हैं।
विषय की सीमाएँ
यह विषय स्पष्ट रूप से राजस्थान-केन्द्रित है: दीपावली और होली जैसे राष्ट्रीय त्यौहार केवल तभी प्रासंगिक हैं जब राजस्थान में इनके विशिष्ट स्थानीय रूप प्रचलित हों।
इस विषय की सीमाएँ निम्न विषयों से मिलती हैं:
- विषय #6 — मेलों में लोक प्रदर्शन कलाएँ
- विषय #8 — बेणेश्वर जैसे जनजातीय उत्सव
- विषय #9 — धरोहर आयोजनों की पर्यटन अर्थव्यवस्था
- विषय #11 — रामदेवजी, गोगाजी, तेजाजी जैसे लोक देवता जिनकी पूजा मेलों में होती है
तीर्थयात्री अर्थशास्त्र या पर्यटन राजस्व के गहन विवेचन की आवश्यकता वाले प्रश्न विषय #9 और #34 से सम्बन्धित हैं।
पूर्व वर्षों के प्रश्नों का स्तर और परीक्षा की सम्भावना
यह PYQ टियर 5 (नया/अंतराल) विषय है — पिछली पाँच RPSC मुख्य परीक्षाओं (2013, 2016, 2018, 2021, 2023/2024) में इससे कोई सीधा प्रश्न नहीं पूछा गया। तथापि, उत्सव-सम्बन्धी सामग्री लोक संस्कृति (विषय #6) और धार्मिक विश्वासों (विषय #11) पर आधारित प्रश्नों में नियमित रूप से आती है।
RPSC 2026 के संशोधित पाठ्यक्रम में इसे स्पष्ट रूप से नामित किया गया है, जो "अप्रत्याशित प्रश्न" के रूप में इसके आने की प्रबल सम्भावना दर्शाता है। सर्वाधिक सम्भावित प्रश्न प्रारूप निम्न हैं:
- (क) राजस्थान के प्रमुख मेलों का वर्गीकरण एवं वर्णन करो (10 अंक)
- (ख) पुष्कर या बेणेश्वर मेले का वर्णन करो (5 अंक)
- (ग) राजस्थान की महिला संस्कृति में गणगौर या तीज का महत्त्व (5 अंक)
