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इतिहास

समसामयिकी संबंध

मेले एवं त्योहार

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 12 / 14 0 PYQ 43 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

समसामयिकी संबंध

हालिया घटनाक्रम

  • राम नवमी 2026 — राज्य स्तरीय उत्सव (अप्रैल 2026): राम नवमी 2026 (चैत्र शुक्ल नवमी — 6 अप्रैल 2026) पर राजस्थान में बड़े पैमाने पर राज्य प्रायोजित उत्सव मनाए गए। भजनलाल शर्मा सरकार ने सभी 33 जिला मुख्यालयों में पुलिस एस्कॉर्ट के साथ शोभायात्राएँ आयोजित कीं। कई जिला प्रशासनों ने अर्ध-दिवस सार्वजनिक अवकाश घोषित किया। 2026 में राम नवमी पर राजस्थान सरकार के सक्रिय संरक्षण से हिन्दू धार्मिक उत्सवों के लिए राज्य समर्थन बढ़ाने की एक नीतिगत प्रवृत्ति दिखती है — जो राज्य की उत्सव नीति और प्रशासन पर प्रश्नों के लिए प्रासंगिक है।

  • राजस्थान विधानसभा ने पंचायती राज चुनावों के लिए दो-बच्चा मानदंड हटाया (मार्च 2025): राजस्थान विधानसभा ने पंचायती राज चुनाव पात्रता के लिए दो-बच्चा मानदंड हटाने का संशोधन पारित किया। यह परिवर्तन बेणेश्वर और डूँगरपुर पट्टी की जनजातीय समुदायों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जहाँ परिवार नियोजन मानदंडों ने ऐतिहासिक रूप से जनजातीय राजनीतिक भागीदारी में बाधाएँ उत्पन्न की थीं। इस मानदंड को हटाने के पीछे आंशिक रूप से हाशियाई समुदायों की जनसांख्यिकीय चिंताएँ थीं। यद्यपि यह सीधे "मेले" की समसामयिकी नहीं है, लेकिन यह जनजातीय मेलों (भील, गरासिया) से सर्वाधिक सक्रिय रूप से जुड़े समुदायों को प्रभावित करता है। उत्सव संस्कृति को जनजातीय राजनीतिक अधिकारों से जोड़ने वाले परीक्षा प्रश्न उभर सकते हैं।

  • पुष्कर मेला — डिजिटल टिकटिंग और पर्यटन नीति (2024–25): राजस्थान पर्यटन विभाग ने 2024 से पुष्कर मेले में विदेशी पर्यटकों के लिए पूर्व-पंजीकृत डिजिटल प्रवेश प्रारंभ किया, जिसका उद्देश्य ऊँट मैदानों में भीड़ प्रबंधन करना था। एक समर्पित "पुष्कर मेला पर्यटन क्षेत्र" अधिसूचित किया गया, जो वाणिज्यिक ऊँट व्यापार को पर्यटक गतिविधि से अलग करता है। यह इस बात में नीतिगत बदलाव को दर्शाता है कि राज्य प्रमुख मेलों में तीर्थाटन, व्यापार और पर्यटन को कैसे संतुलित करता है।

  • खाटू श्यामजी मंदिर कॉरिडोर परियोजना (2024–25): राजस्थान सरकार ने 2024 में ₹500 करोड़ की खाटू श्यामजी मंदिर कॉरिडोर विकास परियोजना (काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, वाराणसी के प्रतिरूप पर) की घोषणा की। कार्य 2025 में आरंभ हुआ; परियोजना का लक्ष्य 1.5 करोड़ वार्षिक तीर्थयात्रियों को अधिक कुशलता से संभालना है। यह राजस्थान के किसी मेले/उत्सव स्थल में अब तक का सबसे बड़ा एकल अवसंरचना निवेश है।

समसामयिकी से सम्भावित परीक्षा प्रश्न

  1. सम्भावित प्रश्न: राजस्थान सरकार की मेले एवं उत्सव नीति 2015 मेलों को कैसे वर्गीकृत करती है? पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए इसका क्या महत्त्व है?
    उत्तर संकेत: चार-स्तरीय वर्गीकरण (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय, राज्य, जिला, स्थानीय); RTDC "सिग्नेचर इवेंट" सूची; सांस्कृतिक संरक्षण का दायित्व; पर्यटन राजस्व सृजन; वाणिज्यिक विकास और अमूर्त विरासत के बीच संघर्ष

  2. सम्भावित प्रश्न: राजस्थान की भील जनजाति के लिए बेणेश्वर मेले के सामाजिक-धार्मिक महत्त्व की विवेचना करें। यह कुम्भ मेले के समानांतर कैसे कार्य करता है?
    उत्तर संकेत: माही-सोम-जाखम त्रिवेणी संगम; माघ पूर्णिमा स्नान; अस्थि विसर्जन; माँवजी महाराज की परम्परा; सामुदायिक एकता; 4–5 लाख उपस्थिति; जनजातीय पहचान चिह्न; मेले में जाति पदानुक्रम का अभाव

  3. सम्भावित प्रश्न: "राजस्थान के मेले और उत्सव राज्य की सम्मिश्र संस्कृति को प्रतिबिम्बित करते हैं।" हिन्दू और इस्लामी परम्पराओं दोनों के उदाहरणों से पुष्टि करें।
    उत्तर संकेत: अजमेर उर्स (चिश्तिया सिलसिला; प्रधानमंत्री चादर); रामदेवरा (रामापीर/रामसा पीर); गोगामेड़ी (गोगा पीर); पुष्कर (ब्रह्मा मंदिर + पशु मेले में वाणिज्यिक मुस्लिम-राजपूत-जाट मिश्रण); पुष्कर का ऐतिहासिक मुग़ल संरक्षण