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इतिहास

राजस्थान के मेलों का वर्गीकरण

मेले एवं त्योहार

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 3 / 14 0 PYQ 43 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

राजस्थान के मेलों का वर्गीकरण

प्रकारात्मक वर्गीकरण

राजस्थान के मेलों को चार प्रमुख मानदंडों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है: धार्मिक कार्य, जातीय/सामुदायिक चरित्र, आर्थिक उद्देश्य, और मौसमी समय। अधिकांश प्रमुख मेले एक से अधिक आयाम समेटते हैं — पुष्कर एक साथ धार्मिक मेला (ब्रह्मा मंदिर), पशु मेला और कार्तिक पूर्णिमा का मौसमी मेला है।

प्रकार प्राथमिक कार्य प्रमुख उदाहरण जिला
धार्मिक तीर्थ स्थलों पर पूजा-अर्चना पुष्कर, कैला देवी, रामदेवरा, गोगामेड़ी, खाटू श्यामजी अजमेर, करौली, जैसलमेर, हनुमानगढ़, सीकर
जनजातीय भील/मीणा जनजाति का सामुदायिक समागम बेणेश्वर, गौतमेश्वर, सीताबाड़ी डूँगरपुर, सिरोही, बारां
पशु/पशुधन मवेशी, ऊँट, घोड़ों का व्यापार पुष्कर, नागौर, तिलवाड़ा, झालरापाटन अजमेर, नागौर, बाड़मेर, झालावाड़
मौसमी कृषि चक्र, महिला उत्सव गणगौर, तीज, अक्षय तृतीया, मकर संक्रांति राज्यव्यापी

स्रोत: राजस्थान पर्यटन विकास निगम, मेला महोत्सव कैलेंडर 2024–25; राजस्थान पर्यटन वार्षिक रिपोर्ट 2023–24

प्रशासनिक वर्गीकरण (राजस्थान मेले एवं उत्सव नीति 2015)

राजस्थान मेले एवं उत्सव नीति, 2015 मेलों को स्तर के अनुसार वर्गीकृत करती है:

  • राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर: पुष्कर मेला, डेज़र्ट फेस्टिवल (जैसलमेर), एलीफेंट फेस्टिवल (जयपुर), उर्स अजमेर — इन्हें पर्यटन विभाग का "सिग्नेचर इवेंट" दर्जा और समर्पित अंतरराष्ट्रीय विपणन बजट प्राप्त होता है।
  • राज्य स्तर: कैला देवी मेला, गणगौर (जयपुर), गोगामेड़ी मेला, बेणेश्वर मेला, रामदेवरा मेला — जिला कलेक्टर आयोजन समितियों की अध्यक्षता करते हैं।
  • जिला स्तर: लगभग 50 अधिसूचित मेले; जिला प्रशासन बुनियादी अवसंरचना उपलब्ध कराता है।
  • स्थानीय स्तर: शेष 900+ मेले; ग्राम पंचायतों और ट्रस्टों द्वारा प्रबंधित।

पर्यटन विभाग ने अपने "पधारो म्हारे देश" वैश्विक अभियान के लिए 5 "सिग्नेचर इवेंट" चिह्नित किए हैं: पुष्कर ऊँट मेला, डेज़र्ट फेस्टिवल जैसलमेर, गणगौर जयपुर, एलीफेंट फेस्टिवल जयपुर, और तीज महोत्सव जयपुर।

भौगोलिक वितरण

मेले राजस्थान में समान रूप से वितरित नहीं हैं। क्षेत्र के अनुसार भौगोलिक प्रतिरूप:

  • पूर्वी और दक्षिणी जिले (करौली, टोंक, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा) — मंदिरों की अधिक सघनता के कारण प्रमुख धार्मिक मेलों का सर्वाधिक घनत्व
  • पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर) — रेगिस्तानी पशुचारण अर्थव्यवस्था के कारण पशु मेलों में अग्रणी
  • उत्तरी राजस्थान (हनुमानगढ़, चुरू, श्रीगंगानगर) — प्रमुख लोक देवता मेलों का आयोजन (गोगामेड़ी, भाद्र तीज)