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आदर्श उत्तर रूपरेखा
5-अंकीय उत्तर रूपरेखा A: वाद्य वर्णन (50 शब्द)
प्रश्न: रावणहत्था क्या है? राजस्थान की लोक संगीत परम्परा में इसके महत्त्व का वर्णन करो।
आदर्श उत्तर:
रावणहत्था नारियल के खोल के अनुनादक वाला दो-तारों का धनुषवाद्य है जो 5,000 से अधिक वर्ष पुराना माना जाता है। राजस्थान के भोपा समुदाय द्वारा विशेष रूप से बजाया जाने वाला यह वाद्य पाबूजी की फड़ मौखिक महाकाव्य पाठ के साथ संगत करता है। भोपा-भोपी जोड़ा रात भर 14वीं शताब्दी के राजपूत नायक पाबूजी की कहानी सुनाते हुए प्रदर्शन करता है।
शब्द बजट: वाद्य परिभाषा (15 शब्द) + समुदाय/सन्दर्भ (20 शब्द) + महाकाव्य सम्बन्ध (15 शब्द) = ~50 शब्द
5-अंकीय उत्तर रूपरेखा B: नृत्य रूप वर्णन (50 शब्द)
प्रश्न: कालबेलिया नृत्य रूप और उसकी अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता का वर्णन करो।
आदर्श उत्तर:
कालबेलिया राजस्थान का साँप-चर्मकार समुदाय का नृत्य है जिसे कालबेलिया (सपेरा) महिलाएँ नागिन की गति की अनुकृति करने वाली वक्र भाव-भंगिमाओं से प्रस्तुत करती हैं। काली कढ़ाईदार घागरा और बीन (पुँगी) संगत इसे विशिष्ट बनाती है। UNESCO ने इसे 2010 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया। नृत्यांगना गुलाबो सपेरा को वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए 2016 में पद्म श्री मिला।
शब्द बजट: परिभाषा (10 शब्द) + विशेषताएँ (15 शब्द) + UNESCO मान्यता (15 शब्द) + कलाकार (10 शब्द) = ~50 शब्द
10-अंकीय उत्तर रूपरेखा: लोक संगीत परम्पराएँ (150 शब्द)
प्रश्न: राजस्थान की लंगा और मँगनियार लोक संगीत परम्पराओं पर चर्चा करो। इन परम्पराओं के प्रमुख वाद्य, प्रदर्शन सन्दर्भ और चुनौतियाँ क्या हैं?
आदर्श उत्तर:
परिचय: बाड़मेर और जैसलमेर जिलों के लंगा और मँगनियार समुदाय राजस्थान की सबसे समृद्ध पेशेवर वंशानुगत संगीत परम्परा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो 400 वर्षों से चली आ रही संरक्षण-आधारित प्रदर्शन व्यवस्था को जीवित रखे हुए हैं।
प्रमुख बिन्दु:
- लंगा मुस्लिम संगीतकार हैं जो सिन्धी-मुस्लिम पशुचर समुदायों द्वारा संरक्षित हैं; उनका प्राथमिक वाद्य सिन्धी सारंगी (3 मुख्य + 15–17 सहानुभूति तार) है; भण्डार में सोहर (जन्म गीत), सेहरा (विवाह गीत) और मौसमी लोक रचनाएँ शामिल हैं।
- मँगनियार भी मुस्लिम हैं किन्तु हिन्दू राजपूत और बिश्नोई भू-स्वामियों द्वारा संरक्षित — एक अनूठा अन्तर-धार्मिक संरक्षण मॉडल; प्राथमिक वाद्य कमायचा (12 तार)। उस्ताद साकार खान को पद्म श्री 2012 मिला।
- दोनों को राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (RIFF), जोधपुर (2007 से) के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय दृश्यता मिली, प्रतिवर्ष 25,000+ अन्तर्राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचते हैं।
- प्रमुख चुनौती: कमायचा के 15 से कम सक्रिय उस्ताद (2024); 1947 के भूमि सुधारों के बाद भू-स्वामियों द्वारा जजमानी सम्बन्ध न बनाए रखने से संरक्षण का क्षरण।
निष्कर्ष: लंगा-मँगनियार परम्परा परम्परागत संरक्षण के बजाय महोत्सव अर्थव्यवस्था से जीवित है, जिसे वाद्यों के विलुप्त होने से बचाने के लिए निरन्तर संस्थागत समर्थन की आवश्यकता है।
शब्द बजट: परिचय (20) + बिन्दु 1 (35) + बिन्दु 2 (30) + बिन्दु 3 (25) + बिन्दु 4 (25) + निष्कर्ष (20) = ~155 शब्द
5-अंकीय उत्तर रूपरेखा C: लोकदेवता महाकाव्य (50 शब्द)
प्रश्न: राजस्थान की देवनारायण महाकाव्य परम्परा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
आदर्श उत्तर:
देवनारायण महाकाव्य — अजमेर-भीलवाड़ा के नायक-भोपा जोड़ों द्वारा जंतर वाद्य और चित्रित फड़ पट के साथ प्रस्तुत — 10 लाख से अधिक शब्दों का अनुमानित है, जो इसे विश्व के सक्रिय प्रदर्शन परम्परा में सबसे लम्बे मौखिक लोक महाकाव्यों में से एक बनाता है। गुज्जर समुदाय के इस आराध्य देव की परम्परा को UNESCO ने 2013 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में अंकित किया।
शब्द बजट: परिभाषा/वर्णन (20 शब्द) + सांख्यिकीय विशिष्टता (15 शब्द) + UNESCO मान्यता (15 शब्द) = ~50 शब्द
