सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
कालबेलिया — UNESCO पंजीकरण
- राजस्थान का यह नृत्य 2010 में UNESCO की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया
- इसे विशेष रूप से कालबेलिया (साँप पकड़ने वाले) समुदाय की महिलाएँ प्रस्तुत करती हैं
- कोई अन्य समुदाय यह नृत्य नहीं करता
रावणहत्था — प्राचीन वाद्ययंत्र
- दो तारों वाला यह धनुषवाद्य 5,000+ वर्ष पुराना माना जाता है
- परम्परागत रूप से भोपा समुदाय के कलाकारों द्वारा पाबूजी की फड़ महाकाव्य के पाठ में प्रयुक्त
- घोड़े के बाल का धनुष और नारियल के खोल का अनुनादक (रेज़ोनेटर) इसमें उपयोग होता है
लंगा और मँगनियार विरासत
- पश्चिमी राजस्थान के समुदाय (मुख्यतः बाड़मेर और जैसलमेर जिले)
- 400 से अधिक वर्षों से वंशानुगत पेशेवर संगीतकार (बैठक परम्परा)
- राजपूत और मुसलमान भू-स्वामियों द्वारा संरक्षित
माण्ड — शास्त्रीय-लोक राग
- राजस्थान का शास्त्रीय-लोक राग, जयपुर और बीकानेर की माण्ड गायिकाओं से संबद्ध
- "केसरिया बालम" इसकी सर्वाधिक प्रतिष्ठित रचना है
- यह राजस्थान का अनौपचारिक सांस्कृतिक गान माना जाता है
घूमर — राज्य नृत्य
- राजस्थान का राजकीय लोक नृत्य, सभी जातियों की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत
- विशेष चक्कर (घूमना) और ओढ़नी के संचालन से यह पहचाना जाता है
- राजस्थान सरकार ने इसे 2023 में आधिकारिक रूप से राजकीय नृत्य घोषित किया
पाँच लोकदेवता महाकाव्य परम्पराएँ
- पाँच लोकदेवता परम्पराएँ जो अभी भी मौखिक महाकाव्य के रूप में जीवित हैं: पाबूजी, देवनारायण, रामदेवजी, गोगाजी, और तेजाजी
- प्रत्येक के लिए एक समर्पित प्रस्तुतकर्ता समुदाय, वाद्ययंत्र और क्षेत्रीय आधार है
- ये राजस्थान की विशिष्ट जीवन्त मौखिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करते हैं
देवनारायण महाकाव्य — UNESCO मान्यता
- 10 लाख से अधिक शब्दों वाला विश्व के सर्वाधिक लम्बे सक्रिय मौखिक लोक महाकाव्यों में से एक
- भोपा-भोपी जोड़े द्वारा जंतर (रावणहत्थे का एक रूप) पर चित्रित पट (फड़) के साथ प्रस्तुत
- 2013 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में अंकित
कमायचा — गम्भीर खतरे में
- बाड़मेर और जैसलमेर के मँगनियार संगीतकारों द्वारा विशेष रूप से बजाया जाने वाला 12-तारों का स्पाइक लूट
- साकार खान मँगनियार को कमायचे में दक्षता के लिए पद्म श्री (2012) प्राप्त हुआ
- 2025 तक केवल 15 से कम सक्रिय उस्ताद कलाकार शेष — अत्यधिक संकटग्रस्त
चरी नृत्य — किशनगढ़
- किशनगढ़ (अजमेर) की गुज्जर समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत
- नृत्यांगनाएँ सिर पर जलते मिट्टी के घड़े (चारी) सँभालती हैं
- किशनगढ़ तहसील की GI-टैग लोक परम्परा के रूप में मान्यता प्राप्त
तेरहताली — मंजीरा नृत्य
- कामड़ समुदाय (नागौर और पाली जिले) की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से प्रस्तुत
- शरीर पर 13 पीतल के मंजीरे बाँधे जाते हैं — 9 दाएँ घुटने पर, 2 बाएँ पर, 1-1 प्रत्येक हाथ पर
- रामदेव भक्ति गीतों के साथ प्रस्तुत किया जाता है
अलगोजा — दोहरी बाँसुरी
- एक साथ नाक और मुँह से बजाई जाने वाली बाँसुरियों का जोड़ा
- बाँसवाड़ा, डूँगरपुर और प्रतापगढ़ के भील और मेघवाल समुदायों से संबद्ध
- भील जनजातीय संगीत में निरन्तर धुन (ड्रोन) उत्पन्न करता है
मोरचंग और बाड़मेर महोत्सव
- मँगनियार और जोगी संगीत में प्रयुक्त लोहे या काँसे की जॉ-हार्प
- भारत में मोरचंग प्रदर्शन का प्राथमिक केन्द्र राजस्थान है
- बाड़मेर मोरचंग महोत्सव (2017 से वार्षिक) इस वाद्य को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाता है
राजस्थान घूमर महोत्सव 2025
- नवम्बर 2025 में सभी 7 संभागीय मुख्यालयों पर एक साथ आयोजित
- स्थान: जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर
- राज्य सरकार की लोक कला संवर्धन पहल का हिस्सा
