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परिचय एवं पाठ्यक्रम
इस अध्याय में क्या है
यह अध्याय RPSC 2026 पाठ्यक्रम में परिभाषित राजस्थान की भौतिक और प्रदर्शनकारी सांस्कृतिक विरासत की पूरी श्रेणी को कवर करता है।
पाँच परीक्षा उप-क्षेत्र इस प्रकार हैं:
- प्रदर्शन कलाएँ — लोक नृत्य, लोक संगीत, कठपुतली, नाटक
- ललित कलाएँ — लघुचित्र शैलियाँ, भित्ति चित्रकला, मूर्तिकला
- हस्तशिल्प — वस्त्र, मृत्तिकाशिल्प, धातुकर्म, रत्नकार्य, चर्मशिल्प
- वास्तुकला — किला वास्तुकला, मंदिर वास्तुकला, बावड़ियाँ, हवेलियाँ
- स्मारक — UNESCO धरोहर स्थल, जंतर मंतर, हवा महल, और अन्य राष्ट्रीय संरक्षित संरचनाएँ
परीक्षा महत्त्व
RPSC 2026 पाठ्यक्रम में यह प्रश्न-पत्र I, इकाई 1 (इतिहास), भाग A के अंतर्गत आता है, जिसमें 70 अंकों का इकाई आवंटन है। 6 परीक्षाओं में 7 PYQ प्रश्नों के साथ प्रति परीक्षा औसतन 7.4 अंक होने के कारण, यह इकाई का सर्वाधिक परीक्षित उप-विषय है।
प्रमुख परीक्षा प्रारूप:
- 2013 से 2024 तक प्रत्येक परीक्षा में कम से कम एक कला/संस्कृति/वास्तुकला प्रश्न पूछा गया है
- 2016: 10 अंक (दो 5-अंक प्रश्न); 2021 और 2023: प्रत्येक में 10 अंक (एक 10-अंक प्रश्न)
- प्रारूप मिश्रित है — तथ्यात्मक स्मरण और विश्लेषणात्मक तुलना दोनों आते हैं
विषय-क्षेत्र की सीमाएँ
- यहाँ नहीं: सामान्य भारतीय कला इतिहास (अजंता, एलोरा, खजुराहो) → विषय #12 (भारतीय विरासत)
- यहाँ नहीं: पूर्व-मध्यकालीन राजस्थान वास्तुकला (6वीं शताब्दी ई. से पहले, कालीबंगा, बैराठ) → विषय #1 (प्राचीन स्थल)
- यह अध्याय: प्रतिहार काल (8वीं शताब्दी ई.) से ध्यान केंद्रित करता है
- यहाँ नहीं: विरासत की नीति और आर्थिक आयाम → विषय #9 (विरासत और पर्यटन)
PYQ पर ध्यान
RPSC ने परीक्षण किया है: किला वास्तुकला (2016), जैन मंदिर वास्तुकला (2021), सूर्य मंदिर (2023), सम्राट यंत्र (2024), लघुचित्र शैली तुलना (बूंदी बनाम किशनगढ़, 2016), नाथद्वारा चित्रकला (2013), और मूर्तिकला कला (2018)।
2026 के लिए, संतुलन बताता है:
- राजपूत महल वास्तुकला, दिलवाड़ा मंदिर, या मेवाड़-मारवाड़ चित्रकला तुलना पर 10-अंक प्रश्न
- विशिष्ट हस्तशिल्प या प्रदर्शन कलाओं पर 5-अंक प्रश्न
