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इतिहास

आदर्श उत्तर रूपरेखा

19वीं-20वीं शताब्दी: 1857 का विद्रोह, किसान एवं जनजातीय आंदोलन, राजनीतिक जागृति, एकीकरण

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 10 / 14 0 PYQ 51 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

आदर्श उत्तर रूपरेखा

5-अंक उत्तर — उदाहरण 1 (PYQ 2021)

प्रश्न: 'संयुक्त राजस्थान' में सिरोही के एकीकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (RPSC मेन्स 2021, 5 अंक)

आदर्श उत्तर:

सिरोही के महारावल ने दिसंबर 1947 में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। 26 जनवरी 1950 को सिरोही राजस्थान में विलीन हुआ, लेकिन जैन तीर्थ महत्व के कारण आबू और देलवाड़ा तहसीलें अनंतिम रूप से बॉम्बे को सौंपी गईं। गोकुलभाई भट्ट ("राजस्थान के गाँधी"), सिरोही प्रजा मंडल नेता, ने राजस्थान विलय का समर्थन किया। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत आबू क्षेत्र बॉम्बे में रहा; शेष सिरोही राजस्थान में पुष्ट हुआ।


5-अंक उत्तर — उदाहरण 2 (PYQ 2021)

प्रश्न: राजस्थान के बेगूँ किसान आंदोलन की आलोचनात्मक परीक्षा कीजिए। (RPSC मेन्स 2021, 5 अंक)

आदर्श उत्तर:

बेगूँ आंदोलन (1921–23) चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ जागीरदारी के तहत अवैध लागों और बेगार के विरुद्ध था, नेतृत्व रामनारायण चौधरी ने किया। गोमेंडा गोलीकांड (13 जुलाई 1923) में जागीरदार के बलों ने एकत्रित किसानों पर गोलियाँ चलाईं — दो किसान रूपाजी और कृपाजी शहीद हुए। राज्य आयोग ने किसानों को "अवैध सभा" का दोषी ठहराया, जो रियासती न्याय के सामंती पूर्वाग्रह को उजागर करता है। निरंतर जन-संगठन के अभाव में इसका दीर्घकालिक संरचनात्मक प्रभाव सीमित रहा।


5-अंक उत्तर — उदाहरण 3 (PYQ 2023)

प्रश्न: भारत छोड़ो आंदोलन के प्रति जयपुर प्रजा मंडल के दृष्टिकोण का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (RPSC मेन्स 2023, 5 अंक)

आदर्श उत्तर:

जब गाँधी ने भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त 1942) शुरू किया, हीरालाल शास्त्री के जयपुर प्रजा मंडल ने सतर्क रुख अपनाया — प्रत्यक्ष कार्रवाई पर जयपुर शासकों के साथ उत्तरदायी शासन संवाद को प्राथमिकता दी, बदले में "जीवन कुटी" रचनात्मक कार्यक्रम शुरू किया। रणनीतिक रूप से, इसने संगठन को राज्य दमन से बचाया। आलोचनात्मक रूप से, मेवाड़ प्रजा मंडल की तुलना में कम जन-लामबंदी हुई और राष्ट्रीय मुक्ति पर संगठनात्मक आत्मरक्षा को प्राथमिकता देने के आरोप लगे।


10-अंक उत्तर टेम्पलेट

प्रश्न: राजपूताना की रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण (1947–1950) में सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन की भूमिका की परीक्षा कीजिए। (अनुमानित 2026 प्रश्न)

आदर्श उत्तर:

परिचय: राजपूताना की 22 रियासतें सरदार पटेल की राजनीतिक रणनीति और वी.पी. मेनन के प्रशासनिक निष्पादन से छह चरणों (मार्च 1948 – नवंबर 1956) में भारतीय संघ में एकीकृत हुईं।

मुख्य बिंदु:

  1. कानूनी ढाँचा: पटेल और मेनन ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के तहत विलय-पत्र का उपयोग किया। मेनन ने चरण 3 अधिमिलन (18 अप्रैल 1948) के लिए उदयपुर के महाराणा भूपाल सिंह (वरिष्ठतम राजपूत शासक) को लक्षित किया, जिनकी सहमति ने छोटी रियासतों का प्रतिरोध तोड़ दिया।

  2. वित्तीय प्रोत्साहन: शासकों को गारंटीकृत प्रीवी पर्स मिला — उदयपुर ₹26 लाख वार्षिक, जयपुर ₹18 लाख, जोधपुर ₹17.5 लाख — संविधान के मूल अनुच्छेद 291 में सुरक्षित (बाद में 26वें संशोधन, 1971 द्वारा समाप्त)।

  3. प्रतिरोध से निपटना: जोधपुर के हनवंत सिंह ने पाकिस्तान विलय तलाशा; मेनन के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप ने भौगोलिक असंभवता पर बल देकर उनकी सहमति प्राप्त की। जैसलमेर की अव्यवहार्यता ने अधिमिलन सरल बनाया।

  4. परिणाम: छह-चरणीय एकीकरण ने क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य (3,42,239 वर्ग किमी) बनाया। राजस्थान का प्रादेशिक समेकन राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत अजमेर-मेरवाड़ा विलय से पूर्ण हुआ — किसी भी राजपूताना रियासत के विरुद्ध एक भी सैन्य अभियान नहीं चलाया गया।

निष्कर्ष: राजपूताना एकीकरण स्वतंत्रता-उपरांत भारत का सबसे जटिल बहु-राज्य विलय था — 8 वर्षों में बिना सशस्त्र संघर्ष के कानूनी कौशल, वित्तीय वार्ता और रणनीतिक दबाव का संयोजन।