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इतिहास

आदर्श उत्तर रूपरेखा

राजस्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएँ तथा उनके बदलते स्वरूप

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 11 / 15 0 PYQ 41 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

आदर्श उत्तर रूपरेखा

5 अंक उत्तर टेम्पलेट (50 शब्द)

प्रश्न (2023 PYQ शैली पर आधारित): राजपूत प्रशासनिक व्यवस्था में ड्योढ़ीदार कौन थे?

आदर्श उत्तर:

ड्योढ़ीदार राजपूत राज्यों, विशेषकर जोधपुर और जयपुर में, राजमहल के द्वारपाल और दरबारी शिष्टाचार अधिकारी थे। ड्योढ़ी (देहरी/प्रवेश द्वार) से व्युत्पन्न, वे शासक तक पहुँच नियंत्रित करते, फरमान अभिलेख रखते और शाही समारोहों का प्रबंधन करते थे। औपचारिक कार्यों से परे, वे प्रशासनिक मध्यस्थ के रूप में कार्य करते — दरबारी अर्जियाँ छाँटते और संचार प्रेषित करते — जिससे राजपूत शासन में प्रभावशाली पदाधिकारी बने।

शब्द संख्या: ~52 शब्द | शब्द बजट: परिभाषा (10) + व्युत्पत्ति/संदर्भ (10) + कार्य (20) + प्रशासनिक महत्त्व (12)


प्रश्न (वैकल्पिक 5 अंक): मारवाड़ की रेख व्यवस्था क्या थी?

आदर्श उत्तर:

रेख मारवाड़ (जोधपुर राज्य) में गाँवों के लिए मानक राजस्व आकलन इकाई थी। प्रत्येक गाँव को कृषि क्षेत्र, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल के प्रकार के आधार पर एक निश्चित रेख मूल्य दिया जाता था; राजस्व माँग आनुपातिक रूप से गणना होती थी। मुहणोत नैणसी की विगत (लगभग 1664–65) हजारों मारवाड़ गाँवों के रेख मूल्यों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करती है, जिससे यह मध्यकालीन राजस्थान का प्राथमिक राजस्व दस्तावेज बनती है।

शब्द संख्या: ~52 शब्द | शब्द बजट: परिभाषा (15) + पद्धति (20) + स्रोत उद्धरण (17)


10 अंक उत्तर टेम्पलेट (150 शब्द)

प्रश्न (2024 PYQ पर आधारित): मध्यकालीन राजस्थान की राजस्व व्यवस्था का वर्णन करें।

आदर्श उत्तर:

परिचय: मध्यकालीन राजस्थान की राजस्व व्यवस्था मुगल प्रभाव से संशोधित सामंती जागीरदारी ढाँचा था, जो भूमि की तीन श्रेणियों और स्तरित राजकोषीय वसूलियों से विशेषीकृत था।

मुख्य बिंदु:

  1. त्रिपक्षीय भूमि संरचना: जागीर (सामंतों को सैन्य-सेवा आवंटन), खालसा (प्रत्यक्ष राज्य प्रबंधन में राजकीय भूमि) और भोम (आनुवंशिक भोमिया ग्राम भूमि) आधार बनाते थे। मारवाड़ के आकलित क्षेत्र का लगभग 70–75% जागीर था।

  2. आकलन तंत्र: मारवाड़ ने रेख प्रणाली (गाँव-स्तर की राजस्व इकाइयाँ) का उपयोग किया, जो मुहणोत नैणसी की विगत (लगभग 1664–65) में दर्ज है। अंबर जैसे मुगल-प्रभावित राज्यों ने 1580 से टोडर मल की दहसाला (10 वर्षीय औसत) और जब्त (क्षेत्र माप) प्रणाली अपनाई।

  3. राजकोषीय वसूलियाँ: मूल लगान के अलावा, काश्तकारों पर बेगार (जबरन श्रम), लाग-भाग (उपज उपकर), भेंट (औपचारिक उपहार) और राहदारी (पारगमन चुंगी) का बोझ था। मेवाड़ के बिजोलिया परगने में विजय सिंह पथिक (1916) ने 84 अलग-अलग उपकर दर्ज किए।

  4. प्रशासनिक अधिकारी: दीवान (मुख्य राजस्व प्रमुख) → फौजदार (जिला) → हाकिम (उप-जिला) → पटवारी (गाँव अभिलेख)।

निष्कर्ष: 1870 के दशक से शुरू ब्रिटिश बंदोबस्त कार्यवाहियों ने परंपरागत आकलन की जगह दस्तावेजी कार्यकाल ला दिया, जो जागीरदारी उन्मूलन अधिनियम, 1952 में परिणत हुई — जिसने राजस्थान की सामंती राजस्व व्यवस्था को आधुनिक काश्तकारी प्रणाली में बदल दिया।

शब्द संख्या: ~155 शब्द