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इतिहास

समसामयिकी संबंध

राजस्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएँ तथा उनके बदलते स्वरूप

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 13 / 15 0 PYQ 41 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

समसामयिकी संबंध

हालिया घटनाक्रम

राजस्थान में ऐतिहासिक कस्बों का नामकरण (मार्च 2026): राजस्थान राज्य सरकार ने कामान (भरतपुर जिला) का नाम कामवन और जहाजपुर (भीलवाड़ा जिला) का नाम यज्ञपुर रखा। दोनों मध्यकाल में महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक और वाणिज्यिक केंद्र थे। कामवन का उल्लेख मध्यकालीन ग्रंथों में मथुरा-पुष्कर व्यापार मार्ग के एक बाजार कस्बे के रूप में मिलता है; जहाजपुर मेवाड़ के पूर्वी प्रशासन में एक महत्त्वपूर्ण जागीरदारी केंद्र था। नामकरण पुरालेखीय और पाठ्य साक्ष्यों से प्रमाणित स्थलनामों को पुनर्स्थापित करता है।

अपना खाता — डिजिटल राजस्व अभिलेख (2016–जारी): राजस्थान के अपना खाता पोर्टल ने 44,000 से अधिक गाँवों में 2.3 करोड़ से अधिक भूमि अभिलेख (जमाबंदी) डिजिटल किए हैं। 2025 तक राजस्थान के 95% से अधिक राजस्व अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे अधिकांश नियमित भूमि अभिलेख आवश्यकताओं के लिए पटवारी कार्यालय जाने की जरूरत समाप्त हो गई। यह निकोलसन के 1891–95 के कागज-आधारित बंदोबस्त के साथ शुरू हुए प्रशासनिक रूपांतरण की परिणति है।

राजस्थान राजस्व सुधार — 2024 संशोधन: राजस्थान सरकार ने 2024 में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 के तहत राजस्व प्रक्रियाओं में ऑनलाइन नामांतरण प्रक्रिया सक्षम करने के लिए संशोधन किया। इससे औसत नामांतरण समय 45 दिन से घटकर 7 कार्य दिवस रह गया। पटवारी कार्य का यह डिजिटलीकरण मध्यकालीन खसरा-खतौनी प्रणाली से पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ओर संक्रमण का नवीनतम चरण है।

समसामयिकी से संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. संभावित प्रश्न: राजस्थान में 2026 में कामान और जहाजपुर के नामकरण का क्या महत्त्व है?
    उत्तर संकेत: दोनों कस्बों का ऐतिहासिक प्रशासनिक महत्त्व; कामान मध्यकालीन व्यापार-मार्ग बाजार कस्बे के रूप में; जहाजपुर मेवाड़ जागीरदारी केंद्र के रूप में; पुरालेखीय रूप से प्रमाणित मध्यकालीन नामों को पुनर्स्थापित करने की राज्य नीति; क्षेत्र की मध्यकालीन राजस्व-प्रशासनिक भूगोल से जोड़ता है।

  2. संभावित प्रश्न: अपना खाता पहल ने राजस्थान की भूमि प्रशासन व्यवस्था को कैसे बदला है?
    उत्तर संकेत: 2.3 करोड़ भूमि अभिलेखों तक डिजिटल पहुँच; 44,000 से अधिक गाँवों में 95%+ कवरेज; नियमित पटवारी भेंट समाप्त; मुगल-राजपूत युग में स्थापित पटवारी-खसरा प्रणाली से निरंतरता; 45 दिन की बजाय 7 दिन में ऑनलाइन नामांतरण; नैणसी की विगत (1664) से वर्तमान तक राजस्व दस्तावेजीकरण के लंबे इतिहास से जोड़ता है।

  3. संभावित प्रश्न: मध्यकालीन राजस्थान से डिजिटल युग तक पटवारी संस्था के विकास का पता लगाएँ।
    उत्तर संकेत: मुगल-युगीन खसरा-खतौनी उत्पत्ति; नैणसी की विगत संकलन में भूमिका; ब्रिटिश बंदोबस्त कार्यवाहियों का औपचारिकरण; राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956; अपना खाता 2016 डिजिटलीकरण; 2024 सुधार में वर्तमान ऑनलाइन नामांतरण।