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इतिहास

कर्नल टॉड और राजपूत प्रशासन का दस्तावेजीकरण

राजस्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएँ तथा उनके बदलते स्वरूप

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 6 / 15 0 PYQ 41 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

कर्नल टॉड और राजपूत प्रशासन का दस्तावेजीकरण

प्रशासनिक इतिहास में टॉड का योगदान

कर्नल जेम्स टॉड (1782–1835), पश्चिमी राजपूताना के राजनीतिक एजेंट (1818–22), ने राजस्थानी प्रशासनिक इतिहास का आधारभूत अंग्रेजी-भाषा दस्तावेजीकरण तैयार किया। उनकी Annals and Antiquities of Rajasthan (खंड I, 1829; खंड II, 1832) इन पर आधारित थी:

  • प्रमुख राजपूत राज्यों में प्रत्यक्ष प्रशासनिक अनुभव
  • राज्य अभिलेखागारों से फारसी और राजस्थानी पांडुलिपियाँ
  • राजपूत सामंतों और प्रशासनिक अधिकारियों के साक्षात्कार
  • उनके स्वयं के राजस्व सर्वेक्षण और पत्राचार

जागीरदारी व्यवस्था, बारद परंपराओं, भूमि कार्यकाल और प्रशासनिक शब्दावली पर टॉड के विवेचन ने Annals को उन ब्रिटिश प्रशासकों के लिए अपरिहार्य बना दिया जो 1818 के बाद प्रभुसत्ता ढाँचा बना रहे थे। इस पुस्तक ने "सामंती राजस्थान" जैसे पद और यूरोपीय शिष्टता से तुलना प्रस्तुत की — एक सादृश्य जो रोमांटिक रूप से अतिरंजित होने के बावजूद अगली सदी तक राजपूत राज्यों के प्रति ब्रिटिश नीति को आकार देता रहा।

मुहणोत नैणसी — देशज समकक्ष

मुहणोत नैणसी ने दो कृतियाँ रचीं जो 17वीं सदी के राजस्थान के सबसे व्यापक देशज प्रशासनिक अभिलेख हैं:

  • नैणसी की ख्यात — राजनीतिक-वंशावली इतिहास
  • नैणसी की विगत (लगभग 1664–65) — राजस्व-प्रशासनिक सर्वेक्षण

महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के अधीन दीवान के रूप में कार्य करते हुए, नैणसी को राज्य अभिलेखों तक सीधी पहुँच थी। इतिहासकार N.S. Bose ने विगत के गाँव-स्तर के डेटा (फसल, जनसंख्या, रेख आकलन, स्थानीय प्रशासनिक नोट) की तुलना अपनी प्रशासनिक महत्त्वाकांक्षा में डोम्सडे बुक (1086) से की है।