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| विषय | विवरण | वर्ष / संदर्भ |
|---|---|---|
| तराइन प्रथम युद्ध | पृथ्वीराज III ने मुहम्मद गोरी को पराजित किया | 1191 ई. |
| तराइन द्वितीय युद्ध | पृथ्वीराज III पराजित और वीरगति | 1192 ई. |
| पृथ्वीराज रासो | चंद बरदाई द्वारा महाकाव्य; पृथ्वीराज III का दरबार | 12वीं–13वीं शताब्दी ई. |
| रणथंभौर दुर्ग स्थापना | वाग्भट्ट (चाहमान); सवाई माधोपुर | लगभग 944 ई. |
| रणथंभौर 1301 जौहर | हम्मीरदेव का अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध | 11 जुलाई 1301 ई. |
| हम्मीर महाकाव्य | नयनचंद्र सूरि का संस्कृत काव्य; 14 सर्ग | लगभग 1400 ई. |
| बप्पा रावल | गुहिल संप्रभुता की नींव; एकलिंगजी मंदिर | लगभग 728–734 ई. |
| सारंगपुर युद्ध | राणा कुम्भा ने मालवा के महमूद खिलजी को पराजित किया | 1437 ई. |
| विजय स्तम्भ | 9-मंजिला स्तम्भ, 37 मीटर, चित्तौड़गढ़; राजस्थान प्रतीक | 1448 ई. |
| कुम्भलगढ़ दीवार | 36 किमी परकोटा; UNESCO 2013; भीतर 360 मंदिर | 1458 ई. |
| संगीत-राज | राणा कुम्भा का संगीतशास्त्र ग्रंथ; 5 खंड | लगभग 1440–1468 ई. |
| राणा कुम्भा — 32 दुर्ग | कुम्भलगढ़, अचलगढ़ सहित | 1433–1468 ई. |
| खानवा युद्ध | राणा साँगा बाबर से पराजित; आगरा से 37 किमी पश्चिम | 16 मार्च 1527 ई. |
| हल्दीघाटी युद्ध | प्रताप बनाम मान सिंह I; खमनोर, राजसमंद | 18 जून 1576 ई. |
| चेतक | प्रताप का घोड़ा; प्रताप को सुरक्षित पहुँचाकर मृत्यु | 1576 ई. |
| प्रताप की मृत्यु | चावंड (डूंगरपुर); शिकार की चोट से | 19 जनवरी 1597 ई. |
| मेहरानगढ़ दुर्ग स्थापना | राव जोधा; 122-मीटर चट्टान; जोधपुर | 1459 ई. |
| मेहरानगढ़ — फतेहपोल | मुगलों के निष्कासन का स्मारक | 1707 ई. |
| मेहरानगढ़ — जयपोल | जयपुर-बीकानेर पर विजय का स्मारक | 1806 ई. |
| सामेल युद्ध | मालदेव के सेनापति जैता और कूंपा बनाम शेरशाह | 5 जनवरी 1544 ई. |
| शेरशाह की उक्ति | "मुट्ठी भर बाजरे के लिए..." — सामेल युद्ध के बाद | 1544 ई. |
| मान सिंह I मनसब | 7,000 जात — राजपूत सरदारों में सर्वोच्च | अकबर का शासनकाल |
| गोविंददेव मंदिर | वृंदावन; संरक्षक मान सिंह I | लगभग 1590 ई. |
| जैसलमेर दुर्ग स्थापना | राव जैसल; त्रिकूट पहाड़ी; 250 फुट ऊँची; 99 बुर्ज | 1156 ई. |
| दिलवाड़ा मंदिर | विमल शाह (1031 ई.); तेजपाल-वास्तुपाल (1231 ई.); माउंट आबू | 1031–1231 ई. |
| जयपुर नगर स्थापना | विद्याधर भट्टाचार्य (वास्तुकार); 9 क्षेत्र | 1727 ई. |
| जयपुर UNESCO | विश्व धरोहर — जयपुर नगर | 2019 ई. |
| जंतर मंतर जयपुर | UNESCO विश्व धरोहर | 2010 ई. |
| सम्राट यंत्र | विश्व की सबसे बड़ी धूपघड़ी; 27 मीटर शंकु; 2 सेकंड सटीकता | जयपुर, 1734 ई. |
| ज़ीज-ए-मुहम्मद शाही | जय सिंह II की खगोलीय सारणियाँ; मुगल सम्राट के नाम पर | 1738 ई. |
| अश्वमेध यज्ञ | किसी भारतीय शासक द्वारा अंतिम — जय सिंह II | 1734 ई. |
| रानीजी की बावड़ी | 46 मीटर गहरी; 3-मंजिला बावड़ी; बूँदी | 1699 ई. |
| बानी ठनी | किशनगढ़ शैली; निहाल चंद; 1973 डाक टिकट | लगभग 1750 ई. |
| पर्वतीय दुर्ग UNESCO | 6 दुर्ग (चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, रणथंभौर, आमेर, जैसलमेर, गागरोण) | 2013 ई. |
| दीन-ए-इलाही | अकबर का समन्वित पंथ; ~18 अनुयायी; 1605 ई. में समाप्त | 1582 ई. |
