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इतिहास

पिछले वर्षों के प्रश्न विश्लेषण

शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ (18वीं शताब्दी तक)

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 11 / 16 0 PYQ 49 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

पिछले वर्षों के प्रश्न विश्लेषण

पूछे गए प्रश्न

  • RPSC मुख्य परीक्षा 2013, प्रश्नपत्र I (2 अंक): "अकबर के दीन-ए-इलाही के बारे में आप क्या जानते हैं?"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2013, प्रश्नपत्र I (5 अंक): "रणथंभौर दुर्ग के रणनीतिक महत्त्व के बारे में लिखिए।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2013, प्रश्नपत्र I (20 अंक): "मालदेव के हुमायूँ और शेरशाह के साथ संबंधों का वर्णन कीजिए।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2016, प्रश्नपत्र I (5 अंक): "कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में महाराणा कुम्भा के योगदान की विवेचना कीजिए।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2018, प्रश्नपत्र I (5 अंक): "भारतीय इतिहास में पृथ्वीराज तृतीय की भूमिका की विवेचना कीजिए।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2021, प्रश्नपत्र I (10 अंक): "कला एवं संस्कृति में मुगल शासकों के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2023, प्रश्नपत्र I (5 अंक): "कला एवं विज्ञान में सवाई जय सिंह द्वितीय के योगदान।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2024, प्रश्नपत्र I (5 अंक): "मेहरानगढ़ दुर्ग की स्थापत्य विशेषताओं एवं महत्त्व का वर्णन कीजिए।"
  • RPSC मुख्य परीक्षा 2024, प्रश्नपत्र I (10 अंक): "मध्यकालीन राजस्थान की राजस्व व्यवस्था का वर्णन कीजिए।" (विषय #3 से अतिव्यापन)

RPSC क्या परीक्षण करता है

सभी 9 PYQ प्रश्नों के विश्लेषण से एक सुसंगत दोहरी अपेक्षा प्रकट होती है:

  1. राजवंश नहीं, विशिष्ट व्यक्ति: प्रत्येक प्रश्न किसी विशिष्ट शासक (पृथ्वीराज III, राणा कुम्भा, मालदेव, जय सिंह II) या किसी विशिष्ट स्मारक (रणथंभौर, मेहरानगढ़) का नाम लेता है। RPSC कभी नहीं पूछता "राठौड़ वंश की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए" — वह एक शासक या एक स्मारक के बारे में पूछता है।

  2. राजनीतिक एवं सांस्कृतिक, दोनों आयाम: प्रश्न स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि किस आयाम की परीक्षा है। 2016 के प्रश्न में राणा कुम्भा के लिए "कला और संस्कृति" (सैन्य नहीं) निर्दिष्ट था। 2013 का 20-अंकीय मालदेव प्रश्न राजनीतिक-कूटनीतिक था। विद्यार्थियों को प्रत्येक प्रमुख शासक के दोनों आयाम जानने चाहिए।

  3. तथ्यात्मक सटीकता आवश्यक: "रणथंभौर का रणनीतिक महत्त्व" के लिए विशिष्ट स्थलाकृतिक तथ्य (ऊँचाई, दर्रे पर नियंत्रण, जलाशय) चाहिए, न कि केवल "यह एक महत्त्वपूर्ण दुर्ग था।" "मेहरानगढ़ की स्थापत्य विशेषताएँ" के लिए नामित द्वार, तिथियाँ और आंतरिक संरचनाएँ चाहिए।

  4. मुगल संपर्क लगातार दिखता है: दीन-ए-इलाही (2013), मुगल कला (2021), मालदेव के हुमायूँ-शेरशाह संबंध (2013) — RPSC बार-बार राजपूत-मुगल संपर्क की परीक्षा लेता है। केवल राजपूत-केंद्रित वर्णन इस पैटर्न को चूक जाते हैं।

आवृत्ति एवं प्रवृत्ति

  • उपस्थिति: यह विषय 6 में से 5 हालिया परीक्षाओं (2013, 2016, 2018, 2023, 2024) में आया — आधिकारिक टियर 4 वर्गीकरण के बावजूद लगभग टियर A योग्यता।
  • प्रवृत्ति: बढ़ती हुई — 2024 में 2 प्रश्न (मेहरानगढ़ + राजस्व व्यवस्था) थे। 2026 के संशोधित पाठ्यक्रम में "18वीं शताब्दी तक" का व्यापक दायरा निरंतर जोर का संकेत देता है।
  • अंक सीमा: 2 अंक (2013 दीन-ए-इलाही) से 20 अंक (2013 मालदेव) तक — अत्यंत विस्तृत सीमा। प्रत्येक प्रमुख शासक के लिए 5-अंक गहराई (50 शब्द) और 10-अंक गहराई (150 शब्द) दोनों स्तरों पर तैयारी करें।

2026 पूर्वानुमान

PYQ पैटर्न और 2026 पाठ्यक्रम संशोधन के आधार पर, सर्वाधिक संभावित प्रश्न हैं:

  1. 5 अंक: "मेवाड़ की राजनीतिक एवं धार्मिक नींव में बप्पा रावल के योगदान का वर्णन कीजिए।" (गुहिल वंश का संस्थापक PYQ में प्रत्यक्ष रूप से नहीं आया; 2026 के पाठ्यक्रम विस्तार में वंश की उत्पत्ति से आरम्भ होता है।)
  2. 5 अंक: "किशनगढ़ चित्र-शैली की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?" (किशनगढ़ की बानी ठनी सुप्रसिद्ध है किंतु मुख्य परीक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अभी परीक्षित नहीं।)
  3. 10 अंक: "मेवाड़ के इतिहास में राणा कुम्भा के सैन्य एवं सांस्कृतिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।" (राणा कुम्भा एक बार 5-अंक संस्कृति प्रश्न के रूप में आए हैं; 10-अंकीय संयुक्त प्रश्न बकाया है।)
  4. 10 अंक: "जंतर मंतर वेधशालाओं के संदर्भ में सवाई जय सिंह द्वितीय के खगोलीय योगदान के महत्त्व की विवेचना कीजिए।" (2023 में यह 5 अंकों पर परीक्षित हुआ; 10-अंकीय संस्करण संभव है।)