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राजस्थान स्थान-नाम पुनर्स्थापना (मार्च 2026)
राजस्थान सरकार ने तीन ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण स्थानों के नाम बदले:
- माउंट आबू → आबू राज: राजस्थानी साहित्य में अरबुदा पर्वत से लिया गया पूर्व-औपनिवेशिक नाम पुनर्स्थापित
- कामन (भरतपुर) → कामवन: कृष्ण-बलराम पौराणिकता से जुड़ा कामवना नाम पुनर्स्थापित; कामन की चौरासी खंभों की छतरी एक मध्यकालीन कछवाहा स्मारक है
- जहाज़पुर (भीलवाड़ा) → यज्ञपुर: वैदिक यज्ञ परम्पराओं और परमार काल से जुड़ा प्राचीन नाम पुनर्स्थापित
ये नामकरण मध्यकालीन स्थान-पहचानों को प्रतिबिम्बित करते हैं जिनमें इस अध्याय के शासक निवास करते थे और ये सीधे परीक्षा योग्य हैं।
मेहरानगढ़ दुर्ग संरक्षण (2024–2025)
मेहरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट ने फूल महल संरक्षण परियोजना के चरण III (2024) को पूरा किया, जिसमें पारम्परिक आरिश (चूना-आधारित) तकनीक से 18वीं शताब्दी के सुनहरे प्लास्टर-कार्य को पुनर्स्थापित किया। दुर्ग ने 2024–25 में 12 लाख पर्यटकों को आकर्षित किया — आमेर दुर्ग के बाद राजस्थान का दूसरा सर्वाधिक दर्शनीय विरासत स्थल।
आमेर दुर्ग पर्यटक संख्या (2025)
आमेर दुर्ग को वित्त वर्ष 2024–25 में ~24 लाख पर्यटक आए, जिससे ₹68 करोड़ का टिकट राजस्व प्राप्त हुआ — राजस्थान के राज्य-प्रबंधित विरासत स्थलों में सर्वोच्च। यह राजस्थान की पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए कछवाहा स्थापत्य विरासत के आर्थिक महत्त्व को रेखांकित करता है।
चित्तौड़गढ़ स्मृति-समारोह
राणा कुम्भा की 1000वीं जयंती (अनुमानतः 2033 ई.) की तैयारी एक प्रमुख राजस्थान पर्यटन आयोजन के रूप में हो रही है, जो मेवाड़ की मध्यकालीन विरासत को सांस्कृतिक राजनीति के लिए बढ़ावा देने में राज्य की निरंतर रुचि का संकेत है।
समसामयिकी से संभावित परीक्षा प्रश्न
संभावित प्रश्न: राजस्थान ने मार्च 2026 में माउंट आबू का नाम आबू राज क्यों रखा? इसका ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?
उत्तर संकेत: राजस्थानी साहित्य में अरबुदा पर्वत का उल्लेख; दिलवाड़ा मंदिर स्थल की मध्यकालीन विरासत; नाम का औपनिवेशिक-काल अंग्रेज़ीकरण; प्रमुख विरासत स्थलों पर पूर्व-औपनिवेशिक राजपूत-काल की पहचान पुनर्स्थापित करने की राज्य नीति।संभावित प्रश्न: राजस्थान के पर्वतीय दुर्ग अपने संस्थापक राजवंशों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों को किन प्रकारों से प्रतिबिम्बित करते हैं?
उत्तर संकेत: प्रत्येक दुर्ग एक विशिष्ट राजवंश और शासक से जुड़ा (चित्तौड़गढ़-सिसोदिया, कुम्भलगढ़-राणा कुम्भा, रणथंभौर-चाहमान, आमेर-कछवाहा, जैसलमेर-भाटी, गागरोण-खींची); UNESCO 2013 क्रमिक अंकन; राजनीतिक वैधता-संकेत के रूप में दुर्ग-स्थापत्य; जैसलमेर का जीवंत दुर्ग; कुम्भलगढ़ की 36 किमी दीवार; आज विरासत पर्यटन का आर्थिक महत्त्व।
