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त्वरित पुनरावलोकन सारणी
| विषय | विवरण | संदर्भ |
|---|---|---|
| राजस्थान में प्राचीनतम पुरापाषाण स्थल प्रकार | लूनी घाटी हस्त-कुठार/विदारक स्थल (क्वार्टजाइट) | निम्न पुरापाषाण, लगभग 6,00,000 ईसा पूर्व |
| बागोर का स्थान | कोठारी नदी, भीलवाड़ा जिला | मध्यपाषाण स्थल |
| बागोर उत्खननकर्ता | वी.एन. मिश्रा, डेक्कन कॉलेज, पुणे | 1967–70 |
| बागोर की प्रमुख खोज | गाय/भेड़/बकरी पालन | लगभग 5000 ईसा पूर्व (राजस्थान में प्राचीनतम) |
| तिलवाड़ा का स्थान | लूनी नदी, बाड़मेर जिला | मध्यपाषाण स्थल |
| अहाड़-बनास कालावधि | लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व | ताम्रपाषाण |
| अहाड़-बनास नैदानिक मृद्भांड | काले-लाल मृद्भांड (BRW) | विपर्यय पकाने की तकनीक |
| अहाड़-बनास स्थलों की संख्या | 90+ | बनास-बेड़च नदी घाटी |
| अहाड़ (धूलकोट) उत्खननकर्ता | एच.डी. संकालिया, आर.सी. अग्रवाल | 1953–54 |
| बालाथल का महत्त्व | तांबा-गलाने की भट्टी साक्ष्य | वी.एस. शिंदे, 1993–2006 |
| गणेश्वर का स्थान | नीम का थाना, सीकर जिला | खेत्री तांबा पट्टी के निकट |
| गणेश्वर तांबे के उपकरण | 900+ वस्तुएँ (तीर, मछली के काँटे, कुल्हाड़े) | आर.सी. अग्रवाल और वी. कुमार, 1977–84 |
| गणेश्वर की तिथियाँ | लगभग 2800–2200 ईसा पूर्व | पूर्व-हड़प्पाई से प्रारम्भिक हड़प्पाई |
| कालीबंगा का स्थान | घग्गर नदी का बायाँ किनारा, हनुमानगढ़ | हड़प्पाई स्थल |
| कालीबंगा का अर्थ | "काली चूड़ियाँ" (स्थानीय राजस्थानी बोली) | सतही निष्कर्षों से |
| कालीबंगा की पहचान | ए. घोष (ASI महानिदेशक) | 1952 |
| कालीबंगा उत्खननकर्ता | बी.बी. लाल और बी.के. थापर, ASI | 1961–69 |
| विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत | कालीबंगा, पूर्व-हड़प्पाई स्तर | लगभग 2800 ईसा पूर्व |
| कालीबंगा अद्वितीय विशेषता 1 | द्विकालिक किलेबंदी (गढ़ी + निचला नगर) | मोहनजोदड़ो/हड़प्पा में अनुपस्थित |
| कालीबंगा अद्वितीय विशेषता 2 | गढ़ी पर अग्नि-वेदिकाएँ (5–6 मंच) | अन्य हड़प्पाई स्थलों में अनुपस्थित |
| मत्स्य महाजनपद राजधानी | विराटनगर (बैराठ), जयपुर जिला | लगभग 600 ईसा पूर्व |
| राजस्थान में अशोकीय लेख | बैराठ में दो लघु शिलालेख | राजस्थान में एकमात्र अशोकीय अभिलेख |
| भाब्रू लेख का महत्त्व | बौद्ध संघ को संबोधित; 7 ग्रंथों की सूची | सभी अशोकीय लेखों में अद्वितीय |
| घोसुंडी शिलालेख | नागरी (माध्यमिका) के निकट, चित्तौड़गढ़ | प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व |
| घोसुंडी भाषा/लिपि | संस्कृत, ब्राह्मी लिपि | राजस्थान का प्राचीनतम संस्कृत ब्राह्मी |
| घोसुंडी विषय-वस्तु | वासुदेव-संकर्षण पूजा परिसर | प्राचीनतम अभिलेखीय वैष्णव संदर्भ |
| रैढ़ का स्थान | टोंक जिला | मालव जनजातीय राजधानी |
| रैढ़ की प्रमुख खोज | 3,000+ मालव सिक्के | के.एन. पुरी, ASI, 1938–40 |
| मालव सिक्का किंवदंती | "मालवानां जयः" (मालवों की विजय) | पंच-चिह्नित और ठप्पा-निर्मित |
| कन्यादेह शैल-चित्र | बारां जिला | मध्यपाषाण–ताम्रपाषाण काल |
| शैल-चित्र शैली संबंध | मध्य भारतीय प्रांत (भीमबेटका परंपरा) | वी.एस. वाकणकर का वर्गीकरण |
| एकमात्र प्रत्यक्ष PYQ (मेन्स) | अहाड़ संस्कृति की विशेषताएँ | RPSC मेन्स 2018, 10 अंक |
