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संभावित प्रश्न एवं उत्तर
प्र1 (5 अंक — 50 शब्द)
राजस्थान के प्रागैतिहासिक अभिलेख में बागोर (भीलवाड़ा) का पुरातात्त्विक महत्त्व क्या है?
आदर्श उत्तर: कोठारी नदी पर स्थित बागोर राजस्थान का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाण स्थल है, जिसे वी.एन. मिश्रा (1967–70) ने उत्खनित किया। इसके तीन-चरणीय अनुक्रम में लगभग 5000 ईसा पूर्व पशु-पालन (गाय, भेड़, बकरी) के साक्ष्य मिले — जो भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनतम हैं। 5.5 मीटर गहरा टीला दीर्घकालीन बस्ती और खाद्य उत्पादन संक्रमण में राजस्थान की केंद्रीय भूमिका की पुष्टि करता है।
प्र2 (5 अंक — 50 शब्द)
कालीबंगा की उन अद्वितीय विशेषताओं का वर्णन कीजिए जो इसे अन्य हड़प्पाई नगरों से अलग करती हैं।
आदर्श उत्तर: हनुमानगढ़ स्थित कालीबंगा, जिसे बी.बी. लाल और बी.के. थापर (1961–69) ने उत्खनित किया, की पाँच अद्वितीय हड़प्पाई विशेषताएँ हैं: (1) विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत (लगभग 2800 ईसा पूर्व), (2) गढ़ी और निचले नगर दोनों की अलग किलेबंदी, (3) गढ़ी पर अग्नि-वेदिकाएँ, (4) बेलनाकार पकी ईंट नालियाँ, और (5) मोहनजोदड़ो में अनुपस्थित पूर्व-हड़प्पाई स्तर।
प्र3 (5 अंक — 50 शब्द)
ताम्रपाषाण भारत के संदर्भ में गणेश्वर के महत्त्व की व्याख्या कीजिए।
आदर्श उत्तर: सीकर जिले में स्थित गणेश्वर, जिसे आर.सी. अग्रवाल (1977–84) ने तांबा-समृद्ध खेत्री क्षेत्र के पास उत्खनित किया, से 900 से अधिक तांबे के उपकरण — तीर, भाले, मछली के काँटे — मिले, जिनकी तिथि लगभग 2800–2200 ईसा पूर्व है। अयस्क-स्रोत विश्लेषण गणेश्वर के तांबे को हड़प्पाई नगरों से जोड़ता है। इसे "ताम्रपाषाण भारत की तांबे की राजधानी" कहा जाता है।
प्र4 (5 अंक — 50 शब्द)
राजस्थान के एक प्रारम्भिक ऐतिहासिक स्थल के रूप में बैराठ (विराटनगर) पर एक टिप्पणी लिखिए।
आदर्श उत्तर: बैराठ (जयपुर) प्राचीन मत्स्य महाजनपद (लगभग 600 ईसा पूर्व) की राजधानी और बाद में मौर्य प्रशासनिक केंद्र था। यहाँ मिले दो अशोक के लघु शिलालेख राजस्थान में एकमात्र अशोकीय अभिलेख हैं। एक वृत्ताकार बौद्ध मंदिर (स्तूप टीला) और महाभारत के अज्ञातवास से इसका सम्बंध इसे राजनीतिक इतिहास और प्रारम्भिक बौद्ध धर्म दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण बनाता है।
प्र5 (10 अंक — 150 शब्द)
अहाड़-बनास संस्कृति की राजस्थान की प्रमुख ताम्रपाषाण सभ्यता के रूप में आलोचनात्मक परीक्षा कीजिए। यह अपनी समकालीन हड़प्पा सभ्यता से किस प्रकार भिन्न है?
आदर्श उत्तर: अहाड़-बनास संस्कृति (लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व) राजस्थान की सर्वाधिक प्रलेखित ताम्रपाषाण संस्कृति है, जो बनास-बेड़च नदी घाटी में 90 से अधिक स्थलों पर फैली है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं: काले-लाल मृद्भांड (विपर्यय तकनीक से पकाए), तांबे के उपकरण (कुल्हाड़ी, चूड़ियाँ — केवल तांबा, कांसा नहीं), मिट्टी की ईंटों के आयताकार घर, मिश्रित कृषि-पशुपालन अर्थव्यवस्था, और अहाड़ में घर के फर्शों के नीचे दफनाने की परंपरा।
अहाड़ स्थल (उदयपुर) को पहले आर.सी. अग्रवाल (1953–54) और बाद में एच.डी. संकालिया, एस.आर. राव ने उत्खनित किया। बालाथल (उदयपुर) में तांबा-गलाने की भट्टियाँ मिलीं।
हड़प्पा सभ्यता से तुलना में: अहाड़-बनास में न लिपि थी, न नगरीय ग्रिड-योजना (बस्तियाँ 1–2 हेक्टेयर बनाम हड़प्पाई नगर 250 हेक्टेयर), न मानक बाट-माप, और न दूरगामी व्यापार नेटवर्क। अहाड़-बनास एक परिष्कृत ग्राम-आधारित ताम्रपाषाण समाज था — तकनीकी रूप से सक्षम, परंतु नगरीय नहीं।
प्र6 (10 अंक — 150 शब्द)
पुरापाषाण काल से प्रारम्भिक ऐतिहासिक काल तक राजस्थान में मानव बस्ती के विकास का अनुरेखण कीजिए, प्रमुख स्थलों और उनके योगदान को रेखांकित करते हुए।
आदर्श उत्तर: राजस्थान में मानव बस्ती का इतिहास लगभग 6,00,000 वर्षों में पाँच पुरातात्त्विक चरणों में फैला है।
निम्न पुरापाषाण (लगभग 6,00,000–1,00,000 ईसा पूर्व): लूनी घाटी और डीडवाना (नागौर) से क्वार्टजाइट हस्त-कुठार और विदारक। मध्यपाषाण (लगभग 10,000–5000 ईसा पूर्व): बागोर (भीलवाड़ा) में वी.एन. मिश्रा के उत्खनन ने सूक्ष्म उपकरण, पशु-पालन (लगभग 5000 ईसा पूर्व) और शैल-चित्र उजागर किए।
ताम्रपाषाण (लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व): दो अलग संस्कृतियाँ — अहाड़-बनास (बनास घाटी में 90+ ग्राम-स्थल, काले-लाल मृद्भांड) और गणेश्वर तांबा-संग्रह (900+ तांबे के उपकरण, खेत्री तांबे का हड़प्पाई नगरों को निर्यात)। हड़प्पाई चरण (लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व): केवल कालीबंगा — विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत और अद्वितीय द्विकालिक किलेबंदी।
प्रारम्भिक ऐतिहासिक (लगभग 600 ईसा पूर्व–300 ईस्वी): बैराठ (मत्स्य महाजनपद; दो अशोकीय लेख), नागरी/माध्यमिका (घोसुंडी अभिलेख — राजस्थान का प्राचीनतम संस्कृत ब्राह्मी लेख), रैढ़ (3,000+ मालव सिक्के)।
