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इतिहास

आदर्श उत्तर रूपरेखा

प्रागैतिहासिक संस्कृति एवं प्राचीन ऐतिहासिक स्थल

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 10 / 14 0 PYQ 42 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

आदर्श उत्तर रूपरेखा

5-अंक उत्तर टेम्पलेट (50 शब्द)

प्रश्न: राजस्थान के प्रागैतिहासिक अभिलेख में बागोर (भीलवाड़ा) का पुरातात्त्विक महत्त्व क्या है?

आदर्श उत्तर:

कोठारी नदी पर स्थित बागोर राजस्थान का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाण स्थल है। वी.एन. मिश्रा (1967–70) द्वारा उत्खनित, इसमें लगभग 5000 ईसा पूर्व पशु-पालन (गाय, भेड़, बकरी) के साक्ष्य मिले — भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनतम में से एक। इसका स्तरीकृत तीन-चरणीय अनुक्रम (मध्यपाषाण–ताम्रपाषाण–लौह युग) पश्चिम भारत में शिकारी-संग्राहक से खाद्य उत्पादन तक के पूर्ण संक्रमण का प्रलेखन करता है।

शब्द बजट: स्थल पहचान (10 शब्द) + उत्खननकर्ता + तिथि (8 शब्द) + प्रमुख खोज + तिथि (15 शब्द) + महत्त्व (15 शब्द) = लगभग 48 शब्द


प्रश्न: कालीबंगा की तीन अद्वितीय विशेषताओं का नाम बताएँ जो इसे अन्य हड़प्पाई स्थलों से अलग करती हैं।

आदर्श उत्तर:

बी.बी. लाल (1961–69) द्वारा उत्खनित कालीबंगा (हनुमानगढ़) की तीन अद्वितीय हड़प्पाई विशेषताएँ हैं: (1) विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत (लगभग 2800 ईसा पूर्व, पूर्व-हड़प्पाई स्तर); (2) द्विकालिक किलेबंदी — गढ़ी और निचला नगर दोनों स्वतंत्र रूप से किलेबंद, हड़प्पाई संसार में अद्वितीय; (3) गढ़ी पर अग्नि-वेदिकाएँ (5–6 अनुष्ठान मंच, राख-कुंड सहित) — मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में अनुपस्थित।

शब्द बजट: परिचय (8 शब्द) + विशेषता 1 (12 शब्द) + विशेषता 2 (12 शब्द) + विशेषता 3 (14 शब्द) = लगभग 46 शब्द


10-अंक उत्तर टेम्पलेट (150 शब्द)

प्रश्न: राजस्थान की अहाड़ संस्कृति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (RPSC मेन्स 2018)

आदर्श उत्तर:

परिचय: अहाड़-बनास संस्कृति (लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व) राजस्थान की प्राथमिक ताम्रपाषाण संस्कृति है, जो दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की बनास-बेड़च नदी घाटी में 90 से अधिक स्थलों पर फैली है।

प्रमुख बिंदु:

  1. मृद्भांड: नैदानिक चिह्नक है काले-लाल मृद्भांड — बाहर काला, अंदर लाल, विपर्यय पकाने की तकनीक से उत्पादित। समकालीन हड़प्पाई मृद्भांड से भिन्न।

  2. तांबे का उपयोग: स्थानीय खेत्री-जावर खानों से प्राप्त तांबे की चपटी कुल्हाड़ियाँ, चूड़ियाँ, छेनी और अँगूठियाँ (कांसा नहीं)। बालाथल उत्खनन (वी.एस. शिंदे, 1993–2006) ने तांबा-गलाने की भट्टियाँ प्रकट कीं।

  3. बस्ती: मिट्टी की ईंटों के आयताकार घर; कोई नगरीय योजना या मानक बाट-माप नहीं; ग्राम-पैमाने की बस्तियाँ, नगर नहीं। प्ररूप-स्थल: अहाड़ (धूलकोट टीला), उदयपुर।

  4. अर्थव्यवस्था: मिश्रित कृषि-पशुपालन — गेहूँ, जौ, बाजरा; गाय, भेड़, बकरी पालन; शिकार से पूरक।

निष्कर्ष: अहाड़-बनास एक स्वतंत्र ताम्रपाषाण परंपरा है, जो हड़प्पा सभ्यता के समकालीन किंतु संरचनात्मक रूप से भिन्न है, जो दक्षिण-पूर्वी राजस्थान को दक्षिण एशिया में कांस्य-युगीन ग्राम-संस्कृति के एक पृथक उद्गम क्षेत्र के रूप में पुष्टि करती है।


प्रश्न: राजस्थान में एक प्राचीन स्थल के रूप में बैराठ (विराटनगर) के ऐतिहासिक महत्त्व पर चर्चा कीजिए।

आदर्श उत्तर:

परिचय: बैराठ (विराटनगर, जयपुर जिला), मत्स्य महाजनपद की राजधानी (लगभग 600 ईसा पूर्व), राजस्थान का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्रारम्भिक ऐतिहासिक स्थल है।

प्रमुख बिंदु:

  1. महाभारत संबंध: बैराठ विराट के राज्य के रूप में पहचाना जाता है जहाँ पांडवों ने अज्ञातवास वर्ष बिताया — इस क्षेत्र का पुराणेतिहासिक संदर्भ और सबसे पुराना पाठ्य उल्लेख।

  2. अशोकीय अभिलेख: यहाँ दो अशोक के लघु शिलालेख मिले — राजस्थान में एकमात्र अशोकीय अभिलेख। भाब्रू/कलकत्ता-बैराठ लेख (बौद्ध संघ को संबोधित, सात विहित बौद्ध ग्रंथों की सिफारिश) सभी अशोकीय लेखों में अद्वितीय है।

  3. बौद्ध विरासत: बैराठ में उत्खनित एक वृत्ताकार बौद्ध मंदिर और अर्धवृत्ताकार हॉल मौर्यकालीन बौद्ध उपस्थिति राजस्थान तक की पुष्टि करते हैं।

  4. स्तरिकीय गहराई: स्थल NBPW स्तरों (लगभग 500 ईसा पूर्व) से मौर्य और मौर्योत्तर चरणों तक निरंतर बसावट दर्शाता है।

निष्कर्ष: बैराठ की बहु-कालीन महत्ता — महाजनपद राजधानी, अशोकीय प्रशासनिक चौकी और बौद्ध केंद्र — इसे राजस्थान का सर्वाधिक समृद्ध प्रारम्भिक ऐतिहासिक स्थल बनाती है।