सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
पुरापाषाण अभिलेख — लूनी घाटी और डीडवाना
- लूनी नदी घाटी और डीडवाना (नागौर) के क्वार्टजाइट उपकरण
- लगभग 1,00,000–30,000 ईसा पूर्व
- राजस्थान में मानव उपस्थिति के प्राचीनतम साक्ष्य
बागोर — सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाण स्थल
- भीलवाड़ा जिले में स्थित; वी.एन. मिश्रा (1967–70) द्वारा उत्खनित
- लगभग 5000 ईसा पूर्व पशु-पालन (गाय, भेड़, बकरी) के साक्ष्य
- भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनतम पशुपालन प्रमाणों में से एक
अहाड़-बनास संस्कृति — प्रमुख ताम्रपाषाण संस्कृति
- लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व; बनास नदी घाटी में 90 से अधिक स्थल
- काले-लाल मृद्भांड और तांबे के उपकरणों से पहचानी जाती है
- उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और टोंक में टीले (धूलकोट)
गणेश्वर — "ताम्रपाषाण भारत की तांबे की राजधानी"
- सीकर जिले में; आर.सी. अग्रवाल और वी. कुमार (1977–84) द्वारा उत्खनित
- 900 से अधिक तांबे के उपकरण: तीर, भाले, मछली के काँटे; लगभग 2800–2200 ईसा पूर्व
- अयस्क-स्रोत विश्लेषण हड़प्पाई नगरों को आपूर्ति का संकेत देता है
कालीबंगा — राजस्थान का एकमात्र प्रमुख हड़प्पाई स्थल
- हनुमानगढ़ में; बी.बी. लाल और बी.के. थापर (1961–69) द्वारा उत्खनित
- लगभग 2800 ईसा पूर्व का जुता हुआ खेत — विश्व का प्राचीनतम कृषि साक्ष्य
- ए. घोष (ASI) ने 1952 में पहचाना
कालीबंगा — अद्वितीय हड़प्पाई विशेषताएँ
- द्विकालिक किलेबंदी: गढ़ी और निचला नगर दोनों की अलग परकोटेबंदी
- गढ़ी पर अग्नि-वेदिकाएँ — मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में अनुपस्थित
- पकी ईंट निर्माण पूर्ण नगरीय एकीकरण की पुष्टि करता है
बैराठ — मत्स्य महाजनपद और मौर्य केंद्र
- मत्स्य महाजनपद की राजधानी (लगभग 600 ईसा पूर्व); जयपुर जिले में
- दो अशोक के लघु शिलालेख — राजस्थान में एकमात्र अशोकीय अभिलेख
- भाब्रू अभिलेख बौद्ध संघ को संबोधित; सात ग्रंथों की सिफारिश करता है
नागरी (माध्यमिका) — घोसुंडी शिलालेख
- शिबि जनजाति की राजधानी; चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित
- घोसुंडी शिलालेख (प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व): संस्कृत ब्राह्मी; वासुदेव-संकर्षण पूजा का उल्लेख
- राजस्थान का प्राचीनतम संस्कृत ब्राह्मी अभिलेख; भारत का प्राचीनतम वैष्णव शिलालेख
रैढ़ — मालव जनजाति की राजधानी
- टोंक जिले में; राजस्थान का सबसे बड़ा प्रारम्भिक ऐतिहासिक स्थल
- 3,000 से अधिक मालव सिक्के (तांबे के, पंच-चिह्नित और ढले हुए)
- मृण्मूर्तियाँ और लौह उपकरण द्वितीय-प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व की समृद्ध नगर-सभ्यता की पुष्टि
शैल-चित्र स्थल
- प्रमुख स्थल: कन्यादेह (बारां), दर्रा (कोटा) और चम्बल घाटी
- शिकार, पशु, ज्यामितीय आकृतियाँ और हस्त-छाप के चित्र
- मध्यपाषाण से प्रारम्भिक ऐतिहासिक काल तक की कालावधि
प्रमुख उत्खननकर्ता
- ए. घोष (ASI) ने 1952 में कालीबंगा की पहचान की; 1961 में बी.बी. लाल के नेतृत्व में उत्खनन शुरू
- वी.एन. मिश्रा ने बागोर उत्खनन (1967–70) किया
- आर.सी. अग्रवाल और एच.डी. संकालिया ने अहाड़ का उत्खनन किया
राजस्थान में प्राचीन नामों की पुनर्स्थापना (मार्च 2026)
- कामान का कामवन और जहाजपुर का यज्ञपुर नामकरण
- पुरातात्त्विक और ऐतिहासिक आधार पर प्राचीन नाम बहाल करने की राज्य नीति
- घोसुंडी अभिलेख साक्ष्य और व्यापक प्राचीन-पहचान आख्यान से जुड़ा
