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महत्त्वपूर्ण आँकड़े एवं सांख्यिकी
तालिका 1: राजस्थान के प्रागैतिहासिक और प्राचीन ऐतिहासिक काल का कालानुक्रमिक अवलोकन
| काल | कालावधि | सांस्कृतिक चरण | प्रमुख स्थल | प्रमुख उत्खननकर्ता |
|---|---|---|---|---|
| निम्न पुरापाषाण | लगभग 6,00,000–1,00,000 ईसा पूर्व | एशलियन हस्त-कुठार | लूनी घाटी, डीडवाना | आर.वी. जोशी (1960 के दशक) |
| मध्य पुरापाषाण | लगभग 1,00,000–30,000 ईसा पूर्व | शल्क-उपकरण उद्योग | बूढ़ा पुष्कर, रोहिड़ा | ASI सर्वेक्षण |
| उच्च पुरापाषाण | लगभग 30,000–10,000 ईसा पूर्व | फलक-ब्यूरिन उद्योग | जायल (नागौर) | वी.एन. मिश्रा |
| मध्यपाषाण | लगभग 10,000–3000 ईसा पूर्व | सूक्ष्म पाषाण; प्राचीनतम पशुपालन | बागोर (भीलवाड़ा), तिलवाड़ा (बाड़मेर) | वी.एन. मिश्रा (1967–70) |
| ताम्रपाषाण — अहाड़-बनास | लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व | काले-लाल मृद्भांड; तांबा | अहाड़ (उदयपुर), गिलुंड, बालाथल | संकालिया, अग्रवाल, शिंदे |
| ताम्रपाषाण — गणेश्वर | लगभग 2800–2200 ईसा पूर्व | तांबा-संग्रह; OCP | गणेश्वर (सीकर), जोधपुरा | अग्रवाल और कुमार (1977–84) |
| हड़प्पाई (कालीबंगा) | लगभग 2900–1900 ईसा पूर्व | नगरीय; द्विकालिक किलेबंदी | कालीबंगा (हनुमानगढ़) | बी.बी. लाल और बी.के. थापर (1961–69) |
| चित्रित धूसर मृद्भांड | लगभग 1200–600 ईसा पूर्व | लौह-युग ग्राम | बैराठ, नोह (भरतपुर) | ASI |
| महाजनपद (NBPW) | लगभग 600–300 ईसा पूर्व | नगरीय गणराज्य | बैराठ, नागरी, रैढ़ | विभिन्न ASI |
| मौर्य | लगभग 325–185 ईसा पूर्व | राज्य; अशोकीय लेख | बैराठ, नागरी | ASI (कनिंघम, 1840+) |
| मौर्योत्तर (शुंग–कुषाण) | लगभग 185 ईसा पूर्व–300 ईस्वी | पंच-चिह्नित और जनजातीय सिक्के | रैढ़, नागरी, साँभर | के.एन. पुरी (1938–40) |
स्रोत: ASI वार्षिक रिपोर्टों का संकलन; वी.एन. मिश्रा, "Prehistoric Cultures of Rajasthan," 1989; RPSC मेन्स 2018 प्रश्नपत्र I
तालिका 2: राजस्थान के प्रमुख पुरातात्त्विक स्थल — तुलनात्मक प्रोफाइल
| स्थल | जिला | संस्कृति/काल | नैदानिक विशेषता | उत्खननकर्ता | उत्खनन वर्ष |
|---|---|---|---|---|---|
| बागोर | भीलवाड़ा | मध्यपाषाण–लौह युग | राजस्थान में प्राचीनतम पशु-पालन (लगभग 5000 ईसा पूर्व) | वी.एन. मिश्रा | 1967–70 |
| अहाड़ (धूलकोट) | उदयपुर | अहाड़-बनास ताम्रपाषाण | प्ररूप-स्थल; काले-लाल मृद्भांड | एच.डी. संकालिया, आर.सी. अग्रवाल | 1953–54 |
| गिलुंड | राजसमंद | अहाड़-बनास ताम्रपाषाण | मिट्टी की ईंट वास्तुकला; सर्वाधिक पूर्वी स्थल | डेक्कन कॉलेज | 1959–60 |
| बालाथल | उदयपुर | अहाड़-बनास ताम्रपाषाण | तांबा-गलाने की भट्टी साक्ष्य | वी.एस. शिंदे | 1993–2006 |
| गणेश्वर | सीकर (नीम का थाना) | तांबा-संग्रह / OCP | 900+ तांबे के उपकरण; पूर्व-हड़प्पाई तांबा स्रोत | आर.सी. अग्रवाल और वी. कुमार | 1977–84 |
| कालीबंगा | हनुमानगढ़ | पूर्व-हड़प्पाई + परिपक्व हड़प्पाई | विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत; द्विकालिक किलेबंदी; अग्नि-वेदिकाएँ | बी.बी. लाल और बी.के. थापर | 1961–69 |
| बैराठ | जयपुर | महाजनपद–मौर्य | दो अशोक के लघु शिलालेख; बौद्ध मंदिर | ए. कनिंघम (1837); दयाराम साहनी (1936) | 1836–1940 |
| नागरी | चित्तौड़गढ़ | शिबि जनजाति नगर; शुंग | घोसुंडी शिलालेख (प्राचीनतम संस्कृत ब्राह्मी + वैष्णव); मालव सिक्के | डी.आर. भंडारकर | 1904 |
| रैढ़ | टोंक | मालव जनजातीय राजधानी | 3,000+ मालव सिक्के; लोहे के उपकरण | के.एन. पुरी (ASI) | 1938–40 |
| तिलवाड़ा | बाड़मेर | मध्यपाषाण | सूक्ष्म पाषाण उपकरण; लूनी सोपान | बी.वी. उपाध्याय | 1962–63 |
स्रोत: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण वार्षिक रिपोर्टें; बी.बी. लाल, "The Earliest Civilization of South Asia" (1997); वी.एन. मिश्रा, Indian Archaeology — A Review (1967–70)
तालिका 3: कालीबंगा बनाम अन्य प्रमुख हड़प्पाई स्थल — अद्वितीय विशेषताएँ
| विशेषता | कालीबंगा | मोहनजोदड़ो | हड़प्पा | धोलावीरा (गुजरात) |
|---|---|---|---|---|
| पूर्व-हड़प्पाई जुता हुआ खेत | हाँ — विश्व का प्राचीनतम (लगभग 2800 ईसा पूर्व) | नहीं | नहीं | नहीं |
| द्विकालिक किलेबंदी (गढ़ी + निचला नगर) | हाँ — अद्वितीय | केवल गढ़ी | केवल गढ़ी | हाँ (भिन्न प्रकार) |
| गढ़ी पर अग्नि-वेदिकाएँ | हाँ — 5–6 मंच | नहीं | नहीं | नहीं |
| महास्नानागार | नहीं | हाँ | नहीं | नहीं (जलाशय प्रकार) |
| हड़प्पाई लिपि | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ |
| अन्नागार | संभावित | हाँ | हाँ | हाँ |
| घग्गर-हाकरा नदी पर स्थिति | हाँ | नहीं (सिंधु) | नहीं (रावी) | नहीं (कच्छ का रण) |
| खोज वर्ष | ए. घोष, 1952 | आर.डी. बनर्जी, 1922 | दयाराम साहनी, 1921 | जे.पी. जोशी, 1967 |
स्रोत: बी.बी. लाल और बी.के. थापर, "Excavations at Kalibangan," ASI Memoir No. 98 (2003); ASI पुरातात्त्विक रिपोर्टें
