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शब्दावली
| पद (EN) | परिभाषा | परीक्षा प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| Palaeolithic (पुरापाषाण काल) | पुराना पाषाण युग (लगभग 6,00,000–10,000 ईसा पूर्व); बड़े छिले हुए पाषाण उपकरणों से युक्त; लूनी घाटी और डीडवाना से राजस्थान साक्ष्य | कम — मध्यपाषाण के लिए संदर्भ |
| Mesolithic (मध्यपाषाण काल) | मध्य पाषाण युग (लगभग 10,000–3000 ईसा पूर्व); सूक्ष्म पाषाण उपकरण, प्रारम्भिक पशुपालन, शैल-चित्र; राजस्थान का बागोर प्रमुख उदाहरण | उच्च |
| Microlith (सूक्ष्म पाषाण उपकरण) | चर्ट से बनी छोटी ज्यामितीय फलकें (त्रिभुज, अर्धचंद्र); संयुक्त हथियारों में जड़ी; राजस्थान में नैदानिक मध्यपाषाण कलाकृति | मध्यम |
| Chalcolithic (ताम्रपाषाण काल) | तांबा-पाषाण युग (लगभग 3000–1000 ईसा पूर्व); तांबे और पाषाण का एकसाथ उपयोग; अहाड़-बनास और गणेश्वर के साथ राजस्थान का सबसे समृद्ध प्रागैतिहासिक काल | उच्च |
| Ahar-Banas Culture (अहाड़-बनास संस्कृति) | राजस्थान की प्राथमिक ताम्रपाषाण इकाई (लगभग 2800–1500 ईसा पूर्व); बनास-बेड़च घाटी में 90+ स्थल; काले-लाल मृद्भांड और तांबे के उपकरणों से पहचान | उच्च |
| Black-and-Red Ware / BRW (काले-लाल मृद्भांड) | विपर्यय तकनीक से पकाई गई मृद्भांड — बाहर काला, अंदर लाल; सभी 90+ स्थलों पर अहाड़-बनास संस्कृति का नैदानिक चिह्नक | उच्च |
| Ganeshwar (गणेश्वर) | सीकर जिले में ताम्रपाषाण स्थल; 900+ तांबे के उपकरण (तीर, भाले, मछली के काँटे); "ताम्रपाषाण भारत की तांबे की राजधानी" कहा जाता है | उच्च |
| Kalibangan (कालीबंगा) | राजस्थान का एकमात्र प्रमुख हड़प्पाई स्थल (हनुमानगढ़); घग्गर (प्राचीन सरस्वती) नदी पर; बी.बी. लाल और बी.के. थापर द्वारा उत्खनित (1961–69) | उच्च |
| Pre-Harappan ploughed field (पूर्व-हड़प्पाई जुता हुआ खेत) | कालीबंगा की विशेषता (लगभग 2800 ईसा पूर्व) — जुते हुए खेत का विश्व का प्राचीनतम साक्ष्य; क्रॉस-हल प्रतिरूप अभी भी पुरातात्त्विक रूप से दृश्यमान | उच्च |
| Double Fortification (द्विकालिक किलेबंदी) | कालीबंगा की अद्वितीय विशेषता: गढ़ी (ऊपरी नगर) और निचला नगर दोनों अलग-अलग किलेबंद; मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में अनुपस्थित | उच्च |
| Fire Altars (अग्नि-वेदिकाएँ) | कालीबंगा की गढ़ी पर अनुष्ठान अग्नि-वेदिकाएँ; नीचे राख-कुंड; हड़प्पाई संसार में अग्नि-पंथ का अद्वितीय साक्ष्य | उच्च |
| Khetri Copper Belt (खेत्री तांबा पट्टी) | सीकर-झुंझुनू क्षेत्र में तांबे के अयस्क निक्षेप; गणेश्वर के उत्पादन का अयस्क स्रोत; अयस्क-स्रोत अध्ययन हड़प्पाई नगर तांबे की वस्तुओं से जोड़ता है | उच्च |
| Bagore (बागोर) | कोठारी नदी, भीलवाड़ा पर मध्यपाषाण स्थल; वी.एन. मिश्रा (1967–70); लगभग 5000 ईसा पूर्व गाय/भेड़/बकरी पालन दस्तावेज; तीन बसावट चरण | उच्च |
| Bairath / Viratnagar (बैराठ / विराटनगर) | प्राचीन मत्स्य महाजनपद राजधानी (जयपुर जिला); दो अशोक के लघु शिलालेख; वृत्ताकार बौद्ध मंदिर; महाभारत का अज्ञातवास स्थल | उच्च |
| Matsya Mahajanapada (मत्स्य महाजनपद) | 16 महाजनपदों में से एक (लगभग 600 ईसा पूर्व); राजधानी बैराठ में; आधुनिक राजस्थान का जयपुर-भरतपुर क्षेत्र; काशी, मगध का समकालीन | मध्यम |
| Ghosundi Inscription (घोसुंडी शिलालेख) | प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व का संस्कृत ब्राह्मी अभिलेख, नागरी (चित्तौड़गढ़) के पास; वासुदेव-संकर्षण पूजा का उल्लेख; राजस्थान का प्राचीनतम संस्कृत अभिलेखीय अभिलेख | उच्च |
| Nagari / Madhyamika (नागरी / माध्यमिका) | शिबि जनजाति की राजधानी (चित्तौड़गढ़ जिला); ग्रीक-प्रभावित नगर; घोसुंडी शिलालेख; बेड़च नदी पर प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व की नगरीय बस्ती | मध्यम |
| Rairh (रैढ़) | राजस्थान का सबसे बड़ा प्रारम्भिक ऐतिहासिक स्थल (टोंक जिला); 3,000+ मालव-कालीन तांबे के पंच-चिह्नित सिक्के; लोहे के उपकरण; द्वितीय–प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व नगरीय बस्ती | मध्यम |
| Tilwara (तिलवाड़ा) | लूनी नदी (बाड़मेर जिला) पर मध्यपाषाण स्थल; बी.वी. उपाध्याय का उत्खनन (1962–63); पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र में मध्यपाषाण बसावट की पुष्टि | मध्यम |
| Balathal (बालाथल) | अहाड़-बनास स्थल (उदयपुर); वी.एस. शिंदे द्वारा उत्खनित 1993–2006; अहाड़-बनास बस्ती के भीतर तांबा-गलाने की भट्टियों का प्रथम प्रत्यक्ष साक्ष्य | उच्च |
| Ochre Coloured Pottery / OCP (गेरू-रंग मृद्भांड) | गणेश्वर तांबा-संग्रह परिसर से जुड़ा मृद्भांड प्रकार; नारंगी-बफ़ कपड़े पर गेरू लेप; देर के ताम्रपाषाण और प्रारम्भिक हड़प्पाई चरणों को जोड़ता है | मध्यम |
| Rock Art / Shailchitra (शैलचित्र) | प्रागैतिहासिक गुफा चित्र; राजस्थान स्थल — कन्यादेह (बारां), दर्रा (कोटा), चम्बल घाटी; शिकार, पशु, ज्यामितीय आकृतियाँ; मध्यपाषाण से प्रारम्भिक ऐतिहासिक | मध्यम |
| Ahar (Dhulkot) (अहाड़ / धूलकोट) | अहाड़-बनास संस्कृति का प्ररूप-स्थल (उदयपुर); स्थानीय भाषा में धूलकोट; आर.सी. अग्रवाल (1953–54) द्वारा प्रथम उत्खनन; संस्कृति को अपना नाम देता है | उच्च |
| Didwana (डीडवाना) | नागौर जिले का खारा झील क्षेत्र; राजस्थान का सबसे समृद्ध पुरापाषाण संग्रह; क्वार्टजाइट में हस्त-कुठार और लेवलॉइस शल्क; झील-किनारे आवास क्षेत्र | कम |
| A. Ghosh (ए. घोष) | ASI के निदेशक जिन्होंने 1952 में क्षेत्र सर्वेक्षण के दौरान कालीबंगा की पहचान की; औपचारिक उत्खनन 1961 में बी.बी. लाल के अधीन शुरू हुआ | मध्यम |
विषय 1 / 138 | प्रश्नपत्र I, इकाई 1 — इतिहास | निर्मित: 2026-04-06
