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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

मुख्य बिंदु

राजस्थान: राजनीतिक दल, गठबंधन राजनीति

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 1 / 11 PYQ-शैली 24 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

  1. प्रभावशाली द्वि-दलीय व्यवस्था

    • 2023 चुनाव में BJP और Congress को मिलाकर कुल मतों का 81.2% प्राप्त हुआ
    • जनता पार्टी युग (1977–79) के बाद से किसी तृतीय दल ने सत्ता-संतुलन नहीं संभाला
    • 1993 से यह द्वयी लगातार सुदृढ़ होती रही है
  2. भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP)

    • 2023 में राजकुमार रोत (बागीडोरा, बांसवाड़ा) द्वारा स्थापित
    • 2023 राजस्थान विधानसभा चुनाव में 3 सीटें जीतीं
    • मेवाड़-वागड़ पट्टी में जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व — वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण नई राजनीतिक शक्ति
  3. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP)

    • हनुमान बेनीवाल (नागौर) के नेतृत्व में; 2023 में 1 सीट जीती (बेनीवाल स्वयं खींवसर से)
    • NDA गठबंधन में थे; 2020 में किसान आंदोलन के मुद्दों पर BJP से गठबंधन तोड़ा
    • मुख्यतः नागौर और सीकर क्षेत्र में जाट समुदाय की आवाज
  4. BJP की संगठनात्मक शक्ति

    • RSS प्रचारक नेटवर्क, महिला मोर्चा, युवा शाखा (BJYM) और OBC मोर्चा पर आधारित
    • बूथ-स्तरीय प्रबंधन प्रणाली (पन्ना प्रमुख + शक्ति केंद्र) से सूक्ष्म-स्तरीय मतदाता जानकारी
    • राज्य में अनुमानित 10+ लाख सक्रिय कार्यकर्ता
  5. Congress का राजस्थान आधार

    • ऐतिहासिक रूप से SC/ST मत, अल्पसंख्यक समुदाय, शहरी व्यापारी और पूर्वी राजस्थान के किसान समुदायों पर आधारित
    • 2018–23 सरकार गहलोत-पायलट गुटीय संघर्ष से चिह्नित रही
    • संस्थागत कैडर के स्थान पर करिश्माई नेताओं पर निर्भर संगठनात्मक शक्ति
  6. गठबंधन सरकारें दुर्लभ हैं

    • 1993 से सभी सरकारें एकल दल ने आरामदायक बहुमत से बनाई हैं
    • अंतिम गठबंधन जनता दल-नेतृत्व 1990–93 प्रयोग था (Congress ने भैरों सिंह शेखावत को बाहर से समर्थन दिया)
    • संरचनात्मक कारण: FPTP प्रणाली, सशक्त क्षेत्रीय दलों का अभाव, द्विआधारी जाति-ध्रुवीकरण
  7. सचिन पायलट विद्रोह (2020)

    • उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और 18 कांग्रेस MLA जुलाई 2020 में हरियाणा के होटलों में डेरा जमाए रहे
    • उन्होंने राजस्थान विधानसभा सत्र में भाग लेने से इनकार किया — राज्य के इतिहास में Congress का सबसे गंभीर आंतरिक विद्रोह
    • सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और राजनीतिक वार्ता के बाद समाधान हुआ
  8. वामपंथी दल — हाशिए की उपस्थिति

    • CPI-M और CPI चुनिंदा जनजातीय और खनन-पट्टी निर्वाचन क्षेत्रों (बांसवाड़ा, अलवर, सीकर) में लड़ते हैं
    • 1980 के दशक से हाशिए की शक्तियों तक सिमट गए हैं
    • दोनों दल राजस्थान की BJP-विरोधी गठबंधन राजनीति में Congress का समर्थन करते हैं
  9. BSP — सीमित किंतु उपस्थित

    • 2023 चुनाव में 2 सीटें (बांदीकुई और साहड़ा) जीतीं
    • दलित-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में उपस्थिति
    • 2023 में 0.78% मत प्राप्त किए — सीमित किंतु नगण्य नहीं SC मत-हिस्सा
  10. क्षेत्रीय आकांक्षाएं और जनजातीय राजनीति

    • 2013 के बाद दक्षिण राजस्थान के जनजातीय समुदायों ने बढ़ते हुए अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की
    • 2023 में BAP का गठन इसी मांग की परिणति था
    • Congress और BJP दोनों द्वारा जनजातीय हितों (वन अधिकार अधिनियम, PESA) की कथित उपेक्षा के विरुद्ध मुकाबला
  11. दल-वित्त और चुनाव-व्यय

    • 2023 राजस्थान चुनाव में रिकॉर्ड अभियान-व्यय दर्ज हुआ — सभी दलों और उम्मीदवारों को मिलाकर अनुमानित ₹8,000–10,000 करोड़
    • विधानसभा के लिए ECI व्यय-सीमा प्रति उम्मीदवार ₹40 लाख थी
    • अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में वास्तविक व्यय आधिकारिक सीमा से कहीं अधिक रहा
  12. अंतर-दलीय लोकतंत्र — काफी हद तक अनुपस्थित

    • BJP और Congress दोनों सर्वेक्षणों, संगठनात्मक प्रतिक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व के ओवरराइड से उम्मीदवार चुनते हैं
    • दोनों दलों में उम्मीदवार चयन के लिए वास्तविक आंतरिक चुनाव अनुपस्थित हैं
    • इसी से बागी उम्मीदवारी और टिकट-वंचित असंतोष जन्म लेता है