सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
प्रभावशाली द्वि-दलीय व्यवस्था
- 2023 चुनाव में BJP और Congress को मिलाकर कुल मतों का 81.2% प्राप्त हुआ
- जनता पार्टी युग (1977–79) के बाद से किसी तृतीय दल ने सत्ता-संतुलन नहीं संभाला
- 1993 से यह द्वयी लगातार सुदृढ़ होती रही है
भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP)
- 2023 में राजकुमार रोत (बागीडोरा, बांसवाड़ा) द्वारा स्थापित
- 2023 राजस्थान विधानसभा चुनाव में 3 सीटें जीतीं
- मेवाड़-वागड़ पट्टी में जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व — वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण नई राजनीतिक शक्ति
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP)
- हनुमान बेनीवाल (नागौर) के नेतृत्व में; 2023 में 1 सीट जीती (बेनीवाल स्वयं खींवसर से)
- NDA गठबंधन में थे; 2020 में किसान आंदोलन के मुद्दों पर BJP से गठबंधन तोड़ा
- मुख्यतः नागौर और सीकर क्षेत्र में जाट समुदाय की आवाज
BJP की संगठनात्मक शक्ति
- RSS प्रचारक नेटवर्क, महिला मोर्चा, युवा शाखा (BJYM) और OBC मोर्चा पर आधारित
- बूथ-स्तरीय प्रबंधन प्रणाली (पन्ना प्रमुख + शक्ति केंद्र) से सूक्ष्म-स्तरीय मतदाता जानकारी
- राज्य में अनुमानित 10+ लाख सक्रिय कार्यकर्ता
Congress का राजस्थान आधार
- ऐतिहासिक रूप से SC/ST मत, अल्पसंख्यक समुदाय, शहरी व्यापारी और पूर्वी राजस्थान के किसान समुदायों पर आधारित
- 2018–23 सरकार गहलोत-पायलट गुटीय संघर्ष से चिह्नित रही
- संस्थागत कैडर के स्थान पर करिश्माई नेताओं पर निर्भर संगठनात्मक शक्ति
गठबंधन सरकारें दुर्लभ हैं
- 1993 से सभी सरकारें एकल दल ने आरामदायक बहुमत से बनाई हैं
- अंतिम गठबंधन जनता दल-नेतृत्व 1990–93 प्रयोग था (Congress ने भैरों सिंह शेखावत को बाहर से समर्थन दिया)
- संरचनात्मक कारण: FPTP प्रणाली, सशक्त क्षेत्रीय दलों का अभाव, द्विआधारी जाति-ध्रुवीकरण
सचिन पायलट विद्रोह (2020)
- उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और 18 कांग्रेस MLA जुलाई 2020 में हरियाणा के होटलों में डेरा जमाए रहे
- उन्होंने राजस्थान विधानसभा सत्र में भाग लेने से इनकार किया — राज्य के इतिहास में Congress का सबसे गंभीर आंतरिक विद्रोह
- सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप और राजनीतिक वार्ता के बाद समाधान हुआ
वामपंथी दल — हाशिए की उपस्थिति
- CPI-M और CPI चुनिंदा जनजातीय और खनन-पट्टी निर्वाचन क्षेत्रों (बांसवाड़ा, अलवर, सीकर) में लड़ते हैं
- 1980 के दशक से हाशिए की शक्तियों तक सिमट गए हैं
- दोनों दल राजस्थान की BJP-विरोधी गठबंधन राजनीति में Congress का समर्थन करते हैं
BSP — सीमित किंतु उपस्थित
- 2023 चुनाव में 2 सीटें (बांदीकुई और साहड़ा) जीतीं
- दलित-बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में उपस्थिति
- 2023 में 0.78% मत प्राप्त किए — सीमित किंतु नगण्य नहीं SC मत-हिस्सा
क्षेत्रीय आकांक्षाएं और जनजातीय राजनीति
- 2013 के बाद दक्षिण राजस्थान के जनजातीय समुदायों ने बढ़ते हुए अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की
- 2023 में BAP का गठन इसी मांग की परिणति था
- Congress और BJP दोनों द्वारा जनजातीय हितों (वन अधिकार अधिनियम, PESA) की कथित उपेक्षा के विरुद्ध मुकाबला
दल-वित्त और चुनाव-व्यय
- 2023 राजस्थान चुनाव में रिकॉर्ड अभियान-व्यय दर्ज हुआ — सभी दलों और उम्मीदवारों को मिलाकर अनुमानित ₹8,000–10,000 करोड़
- विधानसभा के लिए ECI व्यय-सीमा प्रति उम्मीदवार ₹40 लाख थी
- अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में वास्तविक व्यय आधिकारिक सीमा से कहीं अधिक रहा
अंतर-दलीय लोकतंत्र — काफी हद तक अनुपस्थित
- BJP और Congress दोनों सर्वेक्षणों, संगठनात्मक प्रतिक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व के ओवरराइड से उम्मीदवार चुनते हैं
- दोनों दलों में उम्मीदवार चयन के लिए वास्तविक आंतरिक चुनाव अनुपस्थित हैं
- इसी से बागी उम्मीदवारी और टिकट-वंचित असंतोष जन्म लेता है
