सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
भूकंप — परिभाषा और संरचना
- पृथ्वी की भूपर्पटी या मेंटल में भ्रंश (fault) के साथ संचलन के कारण ऊर्जा का अचानक मुक्त होना
- भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं: P-तरंगें, S-तरंगें, सतही तरंगें
- केंद्र/हाइपोसेंटर — भूमि के अंदर ऊर्जा मुक्ति का स्थान
- अधिकेंद्र (Epicentre) — सतह पर केंद्र के ठीक ऊपर का बिंदु
भूकंप मापक पैमाने
- रिक्टर पैमाना (लघुगणकीय, 1935) — प्रत्येक इकाई = 10× भूमि कंपन आयाम, ~32× ऊर्जा मुक्ति
- मोमेंट मैग्नीट्यूड पैमाना (Mw) — अब वैश्विक वैज्ञानिक मानक
- संशोधित मर्कल्ली तीव्रता पैमाना (I–XII) — किसी विशेष स्थान पर अनुभव की गई कंपन तीव्रता मापता है
परि-प्रशांत पेटी — अग्नि वलय (PYQ 2021)
- प्रशांत महासागर को ~40,000 km तक घेरती है; विश्व के ~80% भूकंपों और ~75% सक्रिय ज्वालामुखियों के लिए उत्तरदायी
- विस्तार: न्यूज़ीलैंड → पूर्व एशिया (जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया) → अलास्का → अमेरिकी प्रशांत तट (कास्केड्स, एंडीज)
- 2026 में पुनः प्रकट होने की सबसे अधिक संभावना वाला उप-विषय
केंद्र की गहराई के अनुसार भूकंप वर्गीकरण
- उथले केंद्र के भूकंप (0–70 km) — सर्वाधिक विनाशकारी; ऊर्जा शीघ्र सतह तक पहुँचती है
- मध्यम केंद्र के भूकंप (70–300 km) — मध्यम सतह प्रभाव; अवतलन पट्टियों के साथ
- गहरे केंद्र के भूकंप (300–700 km) — विस्तृत क्षेत्र में अनुभव; सतह पर कम विनाशकारी; अवतलन क्षेत्रों में
क्रियाशीलता के आधार पर ज्वालामुखी
- सक्रिय — हाल ही में उद्गार (एटना, स्ट्रोम्बोली, किलाउआ)
- प्रसुप्त/शांत — हाल में कोई उद्गार नहीं लेकिन विलुप्त नहीं (माउंट रेनियर, वेसुवियस)
- विलुप्त — उद्गार की संभावना नहीं (एडिनबर्ग कैसल रॉक, सैडलबैक)
- भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी: बैरन द्वीप (अंडमान सागर, अंतिम प्रमुख उद्गार 2017); नार्कोंडम प्रसुप्त है
कारण के अनुसार भूकंप के प्रकार
- विवर्तनिक भूकंप — सर्वाधिक सामान्य (~90%); भ्रंशों के साथ प्लेट संचलन से उत्पन्न
- ज्वालामुखी भूकंप — मैग्मा संचलन से संबंधित; उद्गार से पूर्व होते हैं
- पतन भूकंप — गुफा या खदान छत का ढहना; छोटे, स्थानीय
- जलाशय-प्रेरित भूकंप — कोयना बाँध (1967, रिक्टर 6.5) — भारत का सबसे बड़ा जलाशय-प्रेरित भूकंप; 180+ मौतें
सुनामी — मुख्य तथ्य
- समुद्री भूकंपों, पानी के अंदर भूस्खलन या ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न भूकंपी समुद्री तरंगें
- गति: खुले समुद्र में 700–900 km/h; तट के पास तरंग ऊँचाई नाटकीय रूप से बढ़ती है
- 2004 हिंद महासागर सुनामी (26 दिसम्बर, Mw 9.1–9.3, अधिकेंद्र सुमात्रा के पास): 14 देशों में 2.27 लाख मौतें
- सुंडा मेगाथ्रस्ट भ्रंश से उत्पन्न; बंदा आचे में तरंग ऊँचाई 30 m तक पहुँची
भारत के भूकंपीय क्षेत्र (BIS IS-1893)
- भारत को क्षेत्र II, III, IV और V में विभाजित किया गया है (क्षेत्र V = सर्वाधिक जोखिम; क्षेत्र I समाप्त)
- क्षेत्र V (अत्यधिक भूकंपीयता): संपूर्ण उत्तर-पूर्व, J&K, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरी बिहार, अंडमान
- राजस्थान: अधिकतर क्षेत्र II–III (मध्यम-निम्न); जैसलमेर क्षेत्र II है (सबसे कम)
RPSC के लिए प्रमुख हालिया भूकंप
- नेपाल (अप्रैल 2015, Mw 7.8, ~9,000 मौतें)
- तुर्किये-सीरिया (फरवरी 2023, Mw 7.8+7.7, ~58,000 मौतें)
- जापान 2011 (Mw 9.0 तोहोकू, 15,000+ मौतें, फुकुशिमा परमाणु आपदा)
- गुजरात भुज (26 जनवरी 2001, Mw 7.7, ~20,000 मौतें)
ज्वालामुखी उत्पाद
- लावा — सतह पर पिघली चट्टान; तापमान 700–1,200°C
- मैग्मा — पृथ्वी के नीचे पिघली चट्टान
- पायरोक्लास्टिक सामग्री — टेफ्रा, बम, लैपिली, राख
- ज्वालामुखी गैसें — SO₂, CO₂, H₂S, जल वाष्प; लहार — ज्वालामुखी कीचड़ प्रवाह
- बेसाल्टिक लावा प्रवाह 10–30 km/h; राइयोलिटिक लावा बहुत धीमा (अत्यधिक श्यानता)
भूमध्यसागरीय-हिमालयन (अल्पाइड) पेटी
- दूसरी प्रमुख भूकंप/ज्वालामुखी क्षेत्र; विश्व के ~15% भूकंपों के लिए उत्तरदायी
- अटलांटिक → भूमध्य सागर → मध्य पूर्व → हिमालय → दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली
- अफ्रीका-यूरेशिया और भारत-यूरेशिया प्लेट टकराव से निर्मित
- इस पेटी के प्रमुख भूकंप: भुज 2001, नेपाल 2015, तुर्की 2023
ज्वालामुखियों के सकारात्मक प्रभाव
- उपजाऊ मिट्टी — बेसाल्टिक ज्वालामुखी मिट्टी कृषि के लिए सर्वाधिक समृद्ध; जावा/इंडोनेशिया की चावल उत्पादकता असाधारण
- भूतापीय ऊर्जा — आइसलैंड 66% बिजली और 90% घरेलू तापन भूतापीय स्रोत से प्राप्त करता है
- खनिज भंडार — ज्वालामुखी गतिविधि से तांबा, सोना, सल्फर संबद्ध
- नई भूमि निर्माण — हवाई द्वीप पूर्णतः ज्वालामुखी गतिविधि द्वारा निर्मित
